'Haunted 3D Ghosts Of The Past' रिव्यू: न 'राज' जैसा सस्पेंस, न '1920' जैसा खौफ; सिर्फ कमजोर VFX और शोर में उलझ कर रह गए विक्रम भट्ट
भारतीय सिनेमा में जब भी हॉरर और सस्पेंस-थ्रिलर फिल्मों का जिक्र होता है, निर्देशक विक्रम भट्ट का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। एक दौर था जब उनका नाम ही सिनेमाघरों में दर्शकों की रीढ़ में सिहरन पैदा करने के लिए काफी था। 'राज' (Raaz), '1920' और 'हाउंटेड 3D' (2011) जैसी फिल्मों से उन्होंने हॉरर जॉनर को एक नई ऊंचाई दी थी। उनकी फिल्मों में सिर्फ डरावने चेहरे नहीं होते थे, बल्कि एक खौफनाक माहौल, रोंगटे खड़े कर देने वाला सस्पेंस और रूहानी संगीत होता था जो थियेटर से बाहर निकलने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता था। लेकिन, उनकी नई रिलीज फिल्म 'हाउंटेड 3D: घोस्ट्स ऑफ द पास्ट' (Haunted 3D: Ghosts Of The Past) अपनी ही विरासत के सामने बेहद पस्त और कमजोर नजर आती है। आइए जानते हैं आखिर कहां चूक गए हॉरर फिल्मों के बेताज बादशाह।
फिल्म की बुनियादी जानकारी और रेटिंग
निर्देशक: विक्रम भट्ट
मुख्य कलाकार: चेतना पांडे, महाक्षय (मिमोह) चक्रवर्ती, मानवीर चौधरी, प्रनीत भट्ट, हेमंत पांडे
अवधि: 2 घंटे 20 मिनट
फिल्म रेटिंग: 2.5
'राज' जैसा दिमागी सस्पेंस गायब, सिर्फ लाउड म्यूजिक और शोर
'राज' की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) उसका धीमा और दिमाग में उतरने वाला सस्पेंस था, जहां डर धीरे-धीरे दर्शकों को अपनी गिरफ्त में लेता था। लेकिन 'घोस्ट्स ऑफ द पास्ट' में निर्देशक ने कहानी और रहस्य बुनने के बजाय बैकग्राउंड स्कोर की तेज आवाजों और अचानक स्क्रीन पर आने वाले घटिया 'जंप स्केयर्स' (Jump Scares) पर ज्यादा भरोसा किया है। फिल्म देखते समय डर कम और तेज आवाज के कारण सिरदर्द ज्यादा होता है। स्क्रीन पर वह बेचैनी और थ्रिल पूरी तरह नदारद है जो कभी भट्ट कैंप की फिल्मों की पहचान हुआ करती थी।
'1920' जैसी रूहानी हवेली और खौफनाक वातावरण का अभाव
फिल्म '1920' में मोमबत्तियों की मद्धम रोशनी, पुरानी विशाल हवेली और उसके अंधेरे, लंबे गलियारों ने बिना किसी भूत के भी एक अलग ही स्तर का सस्पेंस पैदा किया था। उस फिल्म में लोकेशन खुद एक जिंदा किरदार की तरह महसूस होती थी। 'हाउंटेड 3D' के इस नए सीक्वल में भी वैसा ही गॉथिक माहौल बनाने की नाकाम कोशिश तो की गई है, लेकिन स्क्रीन पर दिखने वाले ज्यादातर सेट्स और विजुअल्स बेहद बनावटी और कृत्रिम लगते हैं। कई दृश्य तो हॉरर फिल्म के बजाय किसी सस्ते वीडियो गेम के ग्राफ़िक्स जैसे महसूस होते हैं।
15 साल पहले आई ओरिजिनल 'Haunted 3D' से भी तकनीकी रूप से पीछे
सबसे ज्यादा निराश फिल्म की तकनीक करती है। साल 2011 में आई 'हाउंटेड 3D' भारत की पहली स्टीरियोस्कोपिक 3D हॉरर फिल्म थी, जिसकी उस दौर में तकनीक, रूहानी गानों और एक बेहद भावुक लव स्टोरी के लिए खूब तारीफ हुई थी। आज 15 साल बाद, साल 2026 में जब तकनीक 10 गुना आगे बढ़ चुकी है, यह नई फिल्म तकनीकी रूप से आगे जाने के बजाय कई कदम पीछे खिसकती हुई नजर आती है।
मिमोह चक्रवर्ती की फीकी वापसी और चेतना पांडे का अधूरा किरदार
फिल्म में मुख्य अभिनेता महाक्षय (मिमोह) चक्रवर्ती की वापसी से फैंस को उम्मीद थी कि पुरानी 'हाउंटेड' का जादू दोबारा देखने को मिलेगा। लेकिन बेहद लचर स्क्रीनप्ले और सपाट लेखन के कारण उनका अभिनय भी पूरी तरह सीमित नजर आया। जहां पहली फिल्म में उनका किरदार कहानी का इमोशनल सेंटर था, वहीं यहां वह सिर्फ स्क्रीन पर हो रही घटनाओं के मूक दर्शक बनकर रह गए हैं।
दूसरी ओर, अभिनेत्री चेतना पांडे स्क्रीन पर खूबसूरत तो दिखी हैं, लेकिन उनका किरदार बेहदसतही है। आमतौर पर हॉरर फिल्मों में मजबूत महिला किरदार ही डर और सस्पेंस को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन यहां उनका रोल सिर्फ दृश्यों को एक से दूसरे के साथ जोड़ने का माध्यम मात्र बनकर रह गया है।
'AI जैसे' नकली VFX ने तोड़ दिया डर का भ्रम
विक्रम भट्ट की पुरानी फिल्मों में जब तकनीक सीमित थी, तब भी व्यावहारिक इफेक्ट्स (Practical Effects) के कारण डर असली और डरावना लगता था। लेकिन इस फिल्म में आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स होने के बावजूद कई दृश्य बेहद नकली और कार्टूनिश लगते हैं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन रिव्यूज़ में भी फिल्म की ग्रीन स्क्रीन और कृत्रिम विजुअल्स को लेकर दर्शकों ने काफी गुस्सा जाहिर किया है। कई दर्शकों ने तो फिल्म के विजुअल्स को "सस्ता AI जनरेटेड कंटेंट" और "टीवी सीरियल से भी बदतर" करार दिया है।
कमजोर संगीत भी नहीं लगा पाया नैय्या पार
भट्ट कैंप की फिल्मों की आधी कामयाबी उनके शानदार और चार्टबस्टर गानों में छिपी होती थी। 'जानिया', 'आया रे' और 'सौ बरस' जैसे गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं। लेकिन 'Ghosts Of The Past' का संगीत बेहद औसत है और कोई भी गाना थियेटर से बाहर निकलने के बाद याद नहीं रहता। पुरानी फिल्म की वह भावनात्मक गहराई और रूहानी धुनें इस नए पार्ट में पूरी तरह मिसिंग हैं।
अंतिम फैसला: थियेटर जाएं या ओटीटी का इंतजार करें?
'हाउंटेड 3D: घोस्ट्स ऑफ द पास्ट' एक ऐसी फिल्म है जो अपने पुराने नाम और फ्रेंचाइजी की कल्ट क्रेडिबिलिटी का फायदा उठाने की कोशिश तो करती है, लेकिन क्वालिटी के मामले में उसके आस-पास भी नहीं फटकती। विक्रम भट्ट का पुराना निर्देशन कौशल, मिमोह की वापसी और चेतना पांडे की ग्लैमरस मौजूदगी, इनमें से कोई भी तत्व फिल्म को डूबने से नहीं बचा पाता। यदि आप विक्रम भट्ट की पुरानी हॉरर फिल्मों के फैन हैं जिन्होंने आपकी रातों की नींद उड़ाई थी, तो यह फिल्म थियेटर्स में सिर्फ आपके धैर्य की परीक्षा लेगी। बेहतर होगा कि आप इसके ओटीटी (OTT) पर आने का इंतजार करें।