सिनेमा के 25 साल, 'लगान' से 'लापता लेडीज' तक: आमिर खान प्रोडक्शंस ने कैसे बदला बॉलीवुड का इतिहास
भारतीय सिनेमा के इतिहास में यदि किसी एक प्रोडक्शन बैनर ने कंटेंट, कमर्शियल सक्सेस और रचनात्मकता के बीच सबसे सटीक संतुलन बनाकर अपनी एक अमिट पहचान बनाई है, तो वह निस्संदेह आमिर खान का 'आमिर खान प्रोडक्शंस' (Aamir Khan Productions) है। यह प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस अब अपने गौरवशाली और बेमिसाल 25 साल पूरे कर चुका है। बॉलीवुड में जहां कल्ट फिल्में या तो केवल क्रिटिक्स को पसंद आती हैं या फिर सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर नोट छापती हैं, वहीं आमिर खान के इस बैनर ने लगातार ऐसी फिल्में दी हैं जिन्होंने क्रिटिक्स का दिल भी जीता और दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिए। अपनी सार्थक, सामाजिक रूप से जागरूक और मनोरंजक कहानी कहने की अनूठी शैली के कारण इस बैनर ने मॉडर्न इंडियन सिनेमा को एक बिल्कुल नई दिशा दी है।
पहली ही फिल्म से ऑस्कर का सफर: 'लगान' ने रचा था इतिहास
आमिर खान प्रोडक्शंस की शुरुआत साल 2001 में एक ऐसे प्रोजेक्ट के साथ हुई थी, जिसे उस दौर में हर बड़े डिस्ट्रीब्यूटर ने 'फ्लॉप' मानकर रिजेक्ट कर दिया था— वह फिल्म थी ‘लगान: वन्स अपॉन अ टाइम इन इंडिया’। आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन और आमिर खान के जुनून से सजी ग्रामीण भारत और क्रिकेट के ताने-बाने पर बनी यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म ने न केवल देश में सफलता के झंडे गाड़े, बल्कि एकेडमी अवार्ड्स (Oscars) में 'बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म' की कैटेगरी में अंतिम पांच में जगह बनाकर वैश्विक मंच पर भारत का डंका बजाया। 'मदर इंडिया' और 'सलाम बॉम्बे' के बाद ऑस्कर नामांकित होने वाली यह महज तीसरी भारतीय फिल्म थी। भारतीय सिनेमा के इतिहास में किसी भी अन्य प्रोडक्शन हाउस ने अपनी पहली ही फिल्म के साथ ऐसा वैश्विक मुकाम हासिल नहीं किया है।
'तारे ज़मीन पर' से 'पीपली लाइव' तक: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई साख
'लगान' की ऐतिहासिक सफलता के बाद इस बैनर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आमिर खान प्रोडक्शंस ने लगातार ऐसे संवेदनशील और अनूठे विषयों पर फिल्में बनाईं जिन पर मुख्यधारा का बॉलीवुड दांव लगाने से डरता था। साल 2007 में आई ‘तारे ज़मीन पर’ ने डिस्लेक्सिया जैसी मानसिक स्थिति और बच्चों के मनोविज्ञान पर देश में एक नई बहस छेड़ दी, तो वहीं साल 2010 में आई व्यंग्यात्मक फिल्म ‘पीपली लाइव’ ने किसानों की आत्महत्या और मीडिया के गिरते स्तर पर तीखा प्रहार किया। इन फिल्मों ने साबित कर दिया कि आमिर खान प्रोडक्शंस केवल मनोरंजन के लिए फिल्में नहीं बनाता, बल्कि वह समाज को एक आईना दिखाने का काम करता है।
'दंगल' से चीन और ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर मचाया हाहाकार
इस बैनर के इतिहास की सबसे बड़ी और भारतीय सिनेमा की ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक है ‘दंगल’ (2016)। हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगाट और उनकी बेटियों गीता व बबीता फोगाट के संघर्ष और असल जिंदगी की कहानी पर बनी इस फिल्म ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर वह कारनामा कर दिखाया जो आज तक कोई भारतीय फिल्म नहीं कर पाई। फिल्म ने खासकर चीन (China) के बॉक्स ऑफिस पर कमाई की ऐसी सुनामी लाई कि फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन $2000\text{ करोड़}$ रुपये के पार चला गया। 'दंगल' आज भी दुनिया भर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म के सिंहासन पर काबिज है।
ऑस्कर से पुराना नाता: 'लापता लेडीज़' बनी भारत की नई उम्मीद
आमिर खान प्रोडक्शंस की फिल्मों का ऑस्कर से एक बेहद गहरा और अटूट नाता रहा है। इस बैनर की कई फिल्मों को समय-समय पर भारत सरकार द्वारा ऑस्कर की आधिकारिक प्रविष्टि (Official Entry) के रूप में भेजा गया है। अपनी पहली फिल्म ‘लगान’ से शुरू हुआ यह सिलसिला साल 2024 में रिलीज हुई और किरण राव द्वारा निर्देशित बेहद खूबसूरत व सामाजिक व्यंग्य से भरपूर फिल्म ‘लापता लेडीज़’ (Laapataa Ladies) तक जारी रहा। इस फिल्म को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों और समीक्षकों की खूब सराहना मिली है, जिसने वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा की साख को और मजबूत किया है।
नए टैलेंट, डायरेक्टर्स और राइटर्स के लिए सबसे बड़ा गॉडफादर
इस बैनर की 25 सालों की यात्रा की सबसे खूबसूरत बात यह रही है कि आमिर खान ने कभी भी सिर्फ स्टार-पावर पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने हमेशा नए, उभरते और लीक से हटकर सोचने वाले फिल्ममेकर्स, राइटर्स और कलाकारों को बढ़ावा दिया है। इस बैनर ने कई ऐसी नई क्रिएटिव आवाजों को एक मजबूत प्लेटफॉर्म दिया, जो आज फिल्म इंडस्ट्री के बड़े और स्थापित नाम बन चुके हैं। उत्कृष्टता, रचनात्मकता और सिनेमा के प्रति बेइंतहा जुनून से भरी आमिर खान प्रोडक्शंस की यह 25 साल की यात्रा हर उस सिनेमाप्रेमी के लिए एक उत्सव है, जो अच्छी और सच्ची कहानियों पर विश्वास रखता है।