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September 16 2026 05:27 pm

बाढ़ के पानी के बीच जन्मीं जुड़वां बेटियां, पिता ने नाम रखा 'गंगा और यमुना': परिवार में पहले से हैं 10 बच्चे

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प्राकृतिक आपदा और सैलाब के खौफनाक मंजर के बीच कभी-कभी ऐसी मानवीय और उम्मीद जगाने वाली कहानियां सामने आती हैं, जो दिल को छू लेती हैं। नदियों के उफान और चारों तरफ फैले अथाह जलप्रलय के बीच एक गरीब परिवार में दो नन्हीं किलकारियां गूंजी हैं। बाढ़ के पानी से घिरे गांव में एक महिला ने दो जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। सैलाब की चुनौती के बीच सुरक्षित जन्मीं इन नन्ही परियों का स्वागत पूरे गांव और परिवार ने बेहद अनोखे अंदाज में किया।

पिता और परिजनों ने नदियों के प्रति अपनी कृतज्ञता और आस्था प्रकट करते हुए दोनों जुड़वां नवजात बच्चियों का नामकरण भारत की दो सबसे पावन नदियों—'गंगा' और 'यमुना' के नाम पर किया है। हैरान करने वाली बात यह भी है कि इस परिवार में पहले से ही 10 बच्चे हैं, और इन दो जुड़वां बेटियों के आगमन के साथ ही अब परिवार में कुल बच्चों की संख्या 12 हो गई है।

जब प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो चारों ओर बह रहा था 6 फीट पानी

यह भावुक कर देने वाला वाकया बाढ़ प्रभावित तराई इलाके के एक सुदूर ग्रामीण क्षेत्र का है। लगातार हो रही भारी बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण पूरा गांव जलमग्न हो चुका था। संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके थे और घरों के बाहर 5 से 6 फीट तक पानी बह रहा था।

इसी विकट परिस्थिति में रात के समय महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। चारों तरफ पानी और अंधेरा होने के कारण एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना नामुमकिन था। परिवार के पास न तो कोई बड़ी नाव थी और न ही अस्पताल तक पहुंचने का कोई सुरक्षित साधन। प्रसूता की बिगड़ती हालत देख परिवार की सांसें अटक गई थीं और अनहोनी का डर सताने लगा था।

देवदूत बनी रेस्क्यू टीम, नाव से सुरक्षित निकाला गया बाहर

महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत दल (NDRF/SDRF) को वायरलैस और फोन के जरिए सूचना दी। सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल मोटरबोट (रेस्क्यू बोट) लेकर तुरंत जलमग्न गांव में दाखिल हुआ।

सड़कें पूरी तरह पानी में डूबी होने के बावजूद रेस्क्यू टीम ने बेहद सूझबूझ और सावधानी से गर्भवती महिला को नाव में शिफ्ट किया। तेज बहाव को चीरते हुए महिला को सुरक्षित रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों और नर्सों की आपातकालीन टीम पहले से तैनात थी।

अस्पताल में गूंजीं दो किलकारियां, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया। कुछ ही घंटों की मशक्कत के बाद महिला ने सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) के जरिए दो स्वस्थ जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों बच्चियों का वजन सामान्य है और जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह खतरे से बाहर हैं।

संकट के समय दोनों बच्चियों के सुरक्षित जन्म को देखकर अस्पताल स्टाफ और परिवार की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। पिता ने भावुक होते हुए कहा:

"जब चारों तरफ पानी भरा था, हमें लगा कि शायद हम इन्हें बचा नहीं पाएंगे। लेकिन ईश्वर की कृपा और रेस्क्यू टीम की मदद से हमारी बेटियां सुरक्षित दुनिया में आईं। सैलाब के बीच जीवनदायिनी बनकर आई हैं, इसलिए हमने एक का नाम 'गंगा' और दूसरी का नाम 'यमुना' रखा है।"

परिवार में पहले से 10 बच्चे, अब 12 बच्चों का भरा-पूरा संसार

इस दिलचस्प और अनोखे मामले की चर्चा इसलिए भी हर तरफ हो रही है क्योंकि इस दंपति के घर पहले से ही 10 बच्चे (बेटे और बेटियां) मौजूद हैं। अब गंगा और यमुना के आने से घर में कुल 12 बच्चे हो गए हैं।

आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद पिता का कहना है कि वे इन बच्चियों को भगवान का साक्षात आशीर्वाद मानते हैं और मजदूरी करके भी अपने सभी बच्चों की परवरिश पूरी ईमानदारी से करेंगे। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिला को अस्पताल से डिस्चार्ज करने के बाद परिवार को आवश्यक पोषण किट, दवाइयां और नवजात शिशुओं के लिए कपड़े व जरूरी सामान उपलब्ध कराए हैं। बाढ़ की तबाही के बीच 'गंगा-यमुना' के जन्म की यह कहानी इलाके में उम्मीद और जीवन की नई मिसाल बन गई है।