'एक फार्म हाउस में रची गई मेरी हत्या की साजिश, कार फूंकने की थी तैयारी': बाराबंकी हंगामे पर चंद्रशेखर आजाद का सनसनीखेज आरोप
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में अपने काफिले के साथ हुए विवाद, पुलिसिया धक्का-मुक्की और पथराव की घटना को लेकर बेहद सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए हैं। गोंडा में मारे गए दवा कारोबारी विनोद साहनी के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे सांसद के काफिले को बाराबंकी सीमा पर रोके जाने के बाद उपजे तनाव के बीच अब चंद्रशेखर आजाद ने एक वीडियो जारी कर अपनी जान को खतरा बताया है।
चंद्रशेखर आजाद ने दो टूक शब्दों में दावा किया है कि बाराबंकी की घटना कोई अचानक हुआ विरोध या प्रशासनिक चूक नहीं थी, बल्कि एक फार्म हाउस में बैठकर उनकी हत्या करने और उनकी गाड़ी को जिंदा फूंकने की सुनियोजित खूनी साजिश रची गई थी।
'फार्म हाउस में रची गई थी हत्या की स्क्रिप्ट, पुख्ता इनपुट हैं मेरे पास'
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और वीडियो संदेश के जरिए पूरी घटना का ब्योरा देते हुए प्रशासन और सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा किया।
उन्होंने कहा:
"मैं यह बात बेहद जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं। मेरे पास जो खुफिया जानकारियां और इनपुट आए हैं, वे गलत नहीं हैं। एक फार्म हाउस के भीतर मुझे जान से मारने का षड्यंत्र रचा गया था। योजना यह बनाई गई थी कि रास्ते में अशांति पैदा कर, पथराव की आड़ में मेरी कार को आग के हवाले कर दिया जाए ताकि मेरी जान ली जा सके। मुझे रास्ते से हटाने के लिए पूरे तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है।""
चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि प्रशासन और कुछ असामाजिक तत्वों का गठजोड़ एक दलित सांसद की बढ़ती आवाज को दबाना चाहता है। उन्होंने कहा कि जो लोग उनसे 'आंख में आंख डालकर' बात करने से डरते हैं, वे अब इस तरह के कायराना हमलों की साजिशें रच रहे हैं।
गोंडा जाते समय बाराबंकी टोल प्लाजा पर क्या हुआ था?
पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब चंद्रशेखर आजाद अपने काफिले के साथ गोंडा के बहुचर्चित विनोद साहनी हत्याकांड के पीड़ित परिजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त करने जा रहे थे।
बाराबंकी के मसौली स्थित शहाबपुर टोल प्लाजा और रामनगर के पास पुलिस ने कानून-व्यवस्था और कजरी तीज मेले का हवाला देते हुए सांसद के काफिले को भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया।
काफिला रोके जाने पर सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।
इसी दौरान वहां तख्तियां लिए कुछ उपद्रवी तत्व पहुंचे और काफिले की गाड़ियों पर जूते-चप्पल, डंडे और पथराव शुरू कर दिया।
घटना के विरोध में चंद्रशेखर आजाद अपने कार्यकर्ताओं के साथ वहीं धरने पर बैठ गए थे और पुलिस पर हमलावरों को संरक्षण देने का आरोप लगाया था।
उच्चस्तरीय जांच और थ्रेट असेसमेंट की मांग, सड़कों पर उतरे समर्थक
सांसद ने उत्तर प्रदेश सरकार और गृह मंत्रालय से मांग की है कि बाराबंकी में हुई इस हिंसा, साजिश और हत्या के षड्यंत्र की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने टोल प्लाजा, पुलिस बॉडी कैमरों और आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की है ताकि पर्दे के पीछे बैठे मास्टरमाइंड का चेहरा बेनकाब हो सके।
इधर, चंद्रशेखर आजाद पर हुए हमले के आरोपों के बाद प्रदेश भर में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया है। सहारनपुर, लखनऊ, मेरठ समेत कई जिलों में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर कार्यकर्ताओं ने सांसद की सुरक्षा व्यवस्था की तुरंत समीक्षा (थ्रेट असेसमेंट) करने और उन्हें 'जेड प्लस' सुरक्षा श्रेणी प्रदान करने की मांग की है।
चंद्रशेखर आजाद ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि वे ऐसी धमकियों और साजिशों से डरने वाले नहीं हैं और शोषितों, पिछड़ों व पीड़ितों के हक की लड़ाई हर कीमत पर जारी रहेगी।