Trump's sensational claim : भारत-पाक संघर्ष में गिरे 11 लड़ाकू विमान, 200% टैरिफ की 'घुड़की' से ऐसे थमा युद्ध

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India News Live,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष को लेकर दुनिया को चौंका दिया है। वॉशिंगटन में आयोजित 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) की पहली बैठक के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों पर 200% व्यापार शुल्क (Tariff) लगाने की धमकी देकर एक भीषण युद्ध को टाल दिया। ट्रंप के मुताबिक, इस टकराव के दौरान भारत और पाकिस्तान ने अपने 11 कीमती और घातक लड़ाकू विमान खो दिए थे, जो उनके पिछले दावों (7-8 विमान) से कहीं ज्यादा हैं।

'ऑपरेशन सिंदूर' और 11 जेट विमानों का नया आंकड़ा

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) का जिक्र करते हुए कहा कि मई 2025 में दोनों देशों के बीच तनाव अपनी चरम सीमा पर था। उन्होंने बताया, "वह युद्ध पूरी तेजी पर था, विमान गिराए जा रहे थे। कुल 11 बहुत ही महंगे जेट विमान मार गिराए गए।" ट्रंप ने कहा कि शुरुआत में वह कम विमानों की बात कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने इस आंकड़े को संशोधित कर 11 कर दिया है। हालांकि, भारत सरकार और भारतीय वायुसेना ने हमेशा ट्रंप के इन दावों को मनगढ़ंत बताया है और स्पष्ट किया है कि कोई भी भारतीय लड़ाकू विमान उस दौरान नहीं गिरा था।

'पैसे के आगे सब फेल': 200% टैरिफ की वो धमकी जिसने रोका युद्ध

ट्रंप ने अपनी मध्यस्थता का बखान करते हुए कहा कि जब स्थिति परमाणु युद्ध की कगार पर पहुंच गई, तो उन्होंने आर्थिक हथियार का इस्तेमाल किया। ट्रंप के अनुसार, "मैंने पीएम मोदी और पाकिस्तानी नेतृत्व से सीधे बात की और कहा कि अगर आप इस लड़ाई को तुरंत नहीं रोकते हैं, तो अमेरिका आपके साथ सभी व्यापारिक समझौते रद्द कर देगा और 200% टैरिफ लगा देगा।" ट्रंप ने चुटकी लेते हुए कहा, "पैसे जैसी कोई चीज नहीं है। जैसे ही उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का एहसास हुआ, दोनों देश पीछे हट गए।"

शहबाज शरीफ का हवाला: 'ट्रंप ने बचाई 2.5 करोड़ जानें'

ट्रंप ने अपनी उपलब्धि गिनाते हुए दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वयं उनके मुख्य कर्मचारी (Chief of Staff) के सामने यह स्वीकार किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के हस्तक्षेप ने कम से कम 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई। ट्रंप के मुताबिक, यह युद्ध किसी भी समय एक बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक संकट का रूप ले सकता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और आर्थिक दबाव की रणनीति ने ही दक्षिण एशिया में शांति बहाल की।

भारत का रुख: मध्यस्थता के दावों को फिर से किया खारिज

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ट्रंप के इन बयानों पर अपनी पुरानी स्थिति दोहराई है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम का समझौता दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच सीधी बातचीत का नतीजा था, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का। भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि वह अपने पड़ोसी के साथ सभी मुद्दों को द्विपक्षीय (Bilateral) तरीके से सुलझाने में विश्वास रखता है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।