June 20 2026 02:56 pm

कल सुहागिनें रखेंगी वट सप्तमी व्रत, अधिकमास के चक्कर में बदली तारीख

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हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सप्तमी व्रत का बेहद खास और पवित्र महत्व माना जाता है। इसे कई जगहों पर 'बड़ साते' के नाम से भी जाना जाता है। इस विशेष दिन पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूरे दिन श्रद्धा भाव से व्रत रखती हैं और वट यानी बरगद के पेड़ की विशेष पूजा-अर्चना करती हैं। इस साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को यह त्योहार मनाया जा रहा है। हालांकि, इस बार व्रत की तारीख को लेकर महिलाओं में काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। आइए विस्तार से जानते हैं कि कल यानी 21 जून 2026 को मनाए जाने वाले वट सप्तमी व्रत का शुभ मुहूर्त क्या है, तारीख क्यों बदली और इसकी सही पूजा विधि क्या है।

आखिर क्यों बदली वट सप्तमी की तारीख?

आमतौर पर वट सप्तमी और वट सावित्री जैसे महत्वपूर्ण व्रत ज्येष्ठ मास के सामान्य दिनों में ही संपन्न हो जाते हैं। लेकिन इस साल पंचांग में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। ज्येष्ठ मास के दौरान अधिकमास यानी मलमास लग जाने की वजह से पंचांग की सभी तिथियों के समय में काफी फेरबदल हो गया। अधिकमास की समाप्ति के बाद जब दोबारा शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ, तो इसके कारण वट सप्तमी और आने वाली वट पूर्णिमा की तिथियां अपने सामान्य समय से कुछ दिन आगे खिसक गईं। यही वजह है कि इस साल बड़ साते का व्रत जून के तीसरे सप्ताह में जाकर बेहद दुर्लभ संयोग में रखा जा रहा है।

अखंड सौभाग्य का महापर्व कल, बरगद की पूजा का महत्व

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष (बरगद के पेड़) को देव वृक्ष माना जाता है, जिसमें साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। यह वृक्ष लंबी आयु, स्थिरता और अक्षय सुख का प्रतीक है। माना जाता है कि वट सप्तमी के दिन जो भी सुहागिन महिला बरगद के पेड़ की पूजा कर उसके चारों ओर सूत का धागा लपेटती है, उसके पति को दीर्घायु प्राप्त होती है, वैवाहिक जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कल पूजा के सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त

21 जून 2026, रविवार को पूजा के लिए दो बेहद श्रेष्ठ मुहूर्त मिल रहे हैं, जिनमें पूजा करने से अखंड फल की प्राप्ति होगी।

प्रातः काल पूजा का समय: सुबह 05 बजकर 30 मिनट से सुबह 09 बजकर 45 मिनट तक (यह समय सुबह की पूजा के लिए सबसे उत्तम है)

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक (दोपहर के समय इस मुहूर्त में पूजा करना कल्याणकारी रहेगा)

वट सप्तमी की सरल और प्रामाणिक पूजा विधि

यदि आप कल वट सप्तमी का व्रत रख रही हैं, तो इस प्रामाणिक विधि से पूजा संपन्न करें:

कल सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और सुंदर, साफ या नए वस्त्र (संभव हो तो लाल या पीले रंग के) धारण करें।

हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें और पूजन सामग्री के साथ अपने घर के पास मौजूद किसी वट वृक्ष (बरगद के पेड़) के पास जाएं।

सबसे पहले वट वृक्ष की जड़ में साफ जल या गंगाजल अर्पित करें।

इसके बाद पेड़ पर रोली, चंदन, अक्षत (साबुत चावल), फूल, भीगे हुए चने और मिठाई अर्पित कर धूप-दीप जलाएं।

अब एक कच्चे सूत का धागा या कलावा हाथ में लें और वट वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते हुए उसे तने पर लपेटें। महिलाएं अपनी श्रद्धानुसार 7, 11, 21 या 108 बार परिक्रमा कर सकती हैं।

परिक्रमा के दौरान मन ही मन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और यमराज का स्मरण करें।

पूजा संपन्न होने के बाद अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और पूरे परिवार की खुशहाली के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।

अंत में वट सावित्री या वट सप्तमी की कथा सुनें, बड़ों का आशीर्वाद लें और जरूरतमंदों में चना, फल या वस्त्र दान करें।