सही मुहूर्त में किया गृह प्रवेश, फिर भी घर में रहती है कलह और बीमारी? जानें क्या है 'जियोपैथिक स्ट्रेस'
नई दिल्ली (डिजिटल डेस्क): आमतौर पर लोग मानते हैं कि यदि एक बार शुभ मुहूर्त देखकर नए घर में गृह प्रवेश (Grah Pravesh) कर लिया जाए, तो जीवन में सब कुछ मंगल ही मंगल होगा। लेकिन वास्तु शास्त्र और भूमि विज्ञान के अनुसार, यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। कई बार देखा जाता है कि बेहद सटीक मुहूर्त में नए मकान में शिफ्ट होने के बाद भी परिवार के सदस्य लगातार बीमार रहने लगते हैं, सिरदर्द और डिप्रेशन की समस्या बढ़ जाती है या अचानक धन की भारी कमी होने लगती है।
यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो इसका कारण केवल गृह प्रवेश का मुहूर्त नहीं, बल्कि भूमि के भीतर छिपा 'जियोपैथिक स्ट्रेस' (Geopathic Stress) और घर के केंद्र का वास्तु दोष हो सकता है। आइए जानते हैं क्या है यह अदृश्य समस्या और इससे कैसे बचा जाए।
क्या होता है जियोपैथिक स्ट्रेस (Geopathic Stress)?
वास्तु शास्त्र और आधुनिक विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि पृथ्वी की अपनी एक चुंबकीय ऊर्जा और वाइब्रेशन होती है। जब पृथ्वी के भीतर मौजूद भूमिगत जलधाराओं (Underground Water Streams), खनिज भंडारों, कोयले की खदानों या फॉल्ट लाइनों (दरारों) के कारण इस प्राकृतिक ऊर्जा के प्रवाह में रुकावट आती है, तो वहां एक हानिकारक रेडिएशन पैदा होता है। इसी डिस्टर्ब ऊर्जा क्षेत्र को जियोपैथिक स्ट्रेस कहा जाता है।
जियोपैथिक स्ट्रेस के मुख्य लक्षण:
नए घर में जाने के बाद अचानक रात की नींद गायब हो जाना (Insomnia)।
सुबह उठते ही शरीर में भारीपन, लगातार सिरदर्द और डिप्रेशन महसूस होना।
गंभीर बीमारियों में दवाओं का असर पूरी तरह खत्म या धीमा हो जाना।
घर के आंगन या बालकनी में रखे हरे-भरे पेड़-पौधों का अचानक सूख जाना।
ब्रह्मस्थान का दोष: घर के केंद्र में न करें ये गलतियां
वास्तु शास्त्र में घर के ठीक बीचो-बीच (सेंटर पॉइंट) के स्थान को 'ब्रह्मस्थान' कहा जाता है। यह स्थान घर का दिल होता है जहां से सकारात्मक ऊर्जा पूरे भवन में फैलती है।
बड़ी भूल: यदि आपने घर के बिल्कुल बीच के हिस्से में सीढ़ी, भारी दीवार, स्टोर रूम, पिलर या टॉयलेट (शौचालय) का निर्माण करवा दिया है, तो यह ब्रह्मस्थान को पूरी तरह दूषित कर देता है।
असर: इस जगह दोष होने पर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे घर में अशांति, अकारण भय और धन हानि की स्थितियां बनी रहती हैं। इसलिए ब्रह्मस्थान को हमेशा खाली, साफ-सुथरा और खुला रखना चाहिए।
क्या आपने घर निर्माण की पूरी वास्तु प्रक्रिया को अपनाया?
ज्योतिर्विद और वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, केवल गृह प्रवेश का मुहूर्त देख लेना काफी नहीं है। मकान बनाने की शुरुआत से लेकर अंत तक एक पूरी आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है:
भूमि चयन व पूजन: सबसे पहले भूखंड (जमीन) की सकारात्मकता जांची जाती है, जिसके बाद भूमि पूजन होता है।
नींव की पूजा: नींव डालते समय कलश स्थापना के साथ चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा दबाया जाता है, जो पृथ्वी तत्व को संतुलित और शांत रखता है।
वास्तु शांति यज्ञ: घर पूरी तरह बनने के बाद और गृह प्रवेश से ठीक पहले 'वास्तु शांति' की पूजा अत्यंत अनिवार्य है। यह प्रक्रिया भवन की ऊर्जा और गृहस्वामी (मकान मालिक) की व्यक्तिगत ऊर्जा के बीच एक सामंजस्य (ट्यूनिंग) बनाती है।
एक और मुख्य कारण: कई बार बाहरी वास्तु ठीक होने पर भी गृहस्वामी की कुंडली में चल रही ग्रहों की महादशा या प्रतिकूल दशा भी जीवन में अचानक संघर्ष बढ़ा देती है। इसलिए घर की जमीन की ऊर्जा (Soil Energy) को ठीक करना बेहद जरूरी है।