56 साल बाद आज गुरु पूर्णिमा पर बन रहा दुर्लभ महासंयोग, इन शुभ मुहूर्तों में पूजा करने से चमकेगा भाग्य
आषाढ़ माह की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा आज पूरे देश में गहरी आस्था और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। अगर आप अपने जीवन में सुख, शांति और आर्थिक तरक्की की तलाश में हैं, तो आज का दिन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आज महर्षि वेदव्यास जयंती के पावन अवसर पर आसमान में ग्रहों की ऐसी अद्भुत स्थिति बनी है जो पूरे 56 सालों के बाद देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं इस महासंयोग में पूजा का सही समय और लाभ।
56 साल बाद बने ये चमत्कारी राजयोग
ज्योतिष विशेषज्ञों के मुताबिक आज गुरु पूर्णिमा पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग का शानदार संयोग है। इसके साथ ही गुरु आदित्य, शश और हंस जैसे बेहद दुर्लभ शुभ राजयोग एक साथ बन रहे हैं। आज के दिन गुरु ग्रह (धर्म और भाग्य के कारक) और चंद्र ग्रह (मन और भावनाओं के कारक) की ऊर्जा अपने चरम पर है। इस दुर्लभ योग में अपने गुरुओं की पूजा, दान-पुण्य और मंत्र जाप करने से अनंत गुना विशेष फल की प्राप्ति होती है।
आज 29 जुलाई को पूजा व दान का सबसे शुभ मुहूर्त
यूं तो पूर्णिमा तिथि कल शाम से ही शुरू हो गई थी, लेकिन उदया तिथि की मान्यता के अनुसार आज 29 जुलाई बुधवार को ही व्रत और स्नान-दान करना सबसे उत्तम है। आज दिन भर पूजा के लिए कई शानदार चौघड़िया मुहूर्त मिल रहे हैं:
सुबह का समय: अलसुबह 05:29 बजे से 08:51 बजे तक (लाभ और अमृत मुहूर्त) पूजा के लिए सर्वोत्तम है। इसके बाद सुबह 10:32 से दोपहर 12:13 बजे तक भी शुभ मुहूर्त रहेगा।
शाम और रात का समय: शाम 05:15 बजे से 06:56 बजे तक (लाभ मुहूर्त) और रात 08:15 बजे से 10:54 बजे तक (शुभ व अमृत मुहूर्त) पूजा और आरती के लिए बेहद खास है।
गुरु पूर्णिमा व्रत रखने के 5 बड़े फायदे
आज के दिन व्रत और सच्चे मन से गुरु आराधना करने से अपार मानसिक शांति मिलती है। घर-परिवार में चल रही आर्थिक तंगी दूर होती है और सुख-समृद्धि का तेजी से वास होता है। इस पवित्र व्रत से घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है, ज्ञान बढ़ता है और व्यक्ति के मन की शुद्धि होती है जिससे आजीवन गुरु की कृपा दृष्टि बनी रहती है।