3 साल में सिर्फ एक बार आती है यह चमत्कारी एकादशी, कल इस विधि से करें पूजा, बरसेगी श्रीहरि और मां लक्ष्मी की कृपा

Post

India News Live, Digital Desk : सनातन धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ और मोक्षदायिनी माना गया है, लेकिन जब बात अधिकमास या मलमास में आने वाली एकादशी की हो, तो इसका महत्व अनंत गुना बढ़ जाता है। कल यानी 27 मई को बेहद दुर्लभ और अत्यंत पुण्य फल देने वाली पुरुषोत्तम एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। इस एकादशी को शास्त्रों में पद्मिनी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। चूंकि अधिकमास का संयोग हर तीन साल में एक बार बनता है, इसलिए यह विशेष एकादशी भी तीन साल में सिर्फ एक बार ही आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट और दरिद्रता का नाश होता है।

क्यों इतनी खास है पुरुषोत्तम एकादशी? जानिए इसका पौराणिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिकमास को 'पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है, और पुरुषोत्तम स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु का सबसे प्रिय नाम है। स्वयं भगवान विष्णु इस पूरे महीने के अधिपति देव हैं। यही कारण है कि इस पावन महीने में आने वाली एकादशी को पुरुषोत्तमी एकादशी कहा जाता है। चूंकि मां लक्ष्मी का एक नाम कमला भी है, इसलिए इसे कमला एकादशी भी कहते हैं। इस दिन व्रत रखने, जप-तप और दान करने से सामान्य एकादशी की तुलना में हजार गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जो लोग लंबे समय से आर्थिक तंगी, कर्ज या करियर में बाधाओं का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं माना जाता।

भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाली सटीक पूजा विधि

अगर आप भी इस दुर्लभ एकादशी का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताई गई इस सरल और प्रभावी पूजा विधि का पालन जरूर करें:

सूर्योदय से पहले स्नान: एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें और भगवान विष्णु के प्रिय पीले रंग के साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।

पूजा स्थल की तैयारी: पूजा घर में एक साफ चौकी रखें, उस पर पीला कपड़ा बिछाएं और पूरे स्थान पर गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र करें।

व्रत का संकल्प: चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर पूरी श्रद्धा से व्रत का संकल्प लें।

पीली सामग्रियों का भोग: भगवान श्री हरि विष्णु को पीले फूल, पीला चंदन, पीले फल और पंचामृत अर्पित करें।

मां लक्ष्मी की विशेष पूजा: चूंकि यह कमला एकादशी है, इसलिए माता लक्ष्मी को कमल या लाल गुलाब का फूल चढ़ाएं और उन्हें सुहाग की सामग्री अर्पित करें।

मंत्र जाप: पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' महामंत्र का कम से कम 108 बार या एक माला जाप अवश्य करें।

तुलसी दल का नियम: घी का दीपक जलाकर आरती करें और भोग लगाएं। ध्यान रहे कि भगवान विष्णु को लगाए जाने वाले भोग में तुलसी का पत्ता जरूर शामिल हो, क्योंकि तुलसी के बिना श्रीहरि भोग स्वीकार नहीं करते।

संध्या पूजन: शाम के समय भी भगवान की आरती करें और अपने घर के मुख्य द्वार व तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं।

नोट कर लें पुरुषोत्तम एकादशी 2026 के शुभ मुहूर्त और पारण का समय

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी का व्रत हमेशा शुभ मुहूर्त और नियमों को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। इस साल के महत्वपूर्ण मुहूर्त इस प्रकार हैं:

एकादशी तिथि का प्रारंभ: 26 मई 2026 को सुबह 05:10 बजे से

एकादशी तिथि का समापन: 27 मई 2026 को सुबह 06:21 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त का समय: सुबह 04:34 बजे से सुबह 05:17 बजे तक

विजय मुहूर्त का समय: दोपहर 02:47 बजे से दोपहर 03:40 बजे तक

व्रत पारण (खोलने) का समय (28 मई): सुबह 06:01 बजे से सुबह 07:56 बजे के बीच

पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय: 28 मई को सुबह 07:56 बजे

धार्मिक नियमों के अनुसार, एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब द्वादशी तिथि के भीतर शुभ समय पर पारण किया जाए। इसलिए 28 मई को सुबह 7:56 बजे से पहले अपना व्रत अवश्य खोल लें।