SEBI ने ऐसे दबोचा ₹144 करोड़ का शेयर घोटाला! WhatsApp चैट, फ्लाइट टिकट और Zomato ऑर्डर तक खंगाल डाले
नई दिल्ली ब्यूरो: भारतीय शेयर बाजार की नियामक संस्था सेबी (SEBI - भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने हाल ही में एक ऐसे बड़े फ्रॉड का भंडाफोड़ किया है, जिसने यह साफ कर दिया है कि अब बाजार में हेराफेरी करने वाले शातिरों का बचना नामुमकिन है। सेबी ने करीब 144 करोड़ रुपये के एक विशालकाय "पंप एंड डंप" (Pump and Dump) शेयर घोटाले का सनसनीखेज पर्दाफाश किया है। इस ऐतिहासिक जांच की सबसे खास बात यह रही कि सेबी के अधिकारियों ने आरोपियों को पकड़ने के लिए सिर्फ बैंक और ट्रेडिंग खातों को ही नहीं खंगाला, बल्कि व्हाट्सऐप चैट, इंडिगो की फ्लाइट टिकट, होटल बुकिंग, फूड डिलीवरी ऐप (Zomato), डोमेन रजिस्ट्रेशन और मोबाइल टावर लोकेशन जैसे आधुनिक डिजिटल सबूतों का एक अभेद्य जाल बुनकर 226 लोगों के पूरे सिंडिकेट को बेनकाब कर दिया।
इन 5 कंपनियों के शेयरों में हुआ 'पंप एंड डंप' का खेल
सेबी द्वारा जारी किए गए 394 पन्नों के एक बेहद विस्तृत और ऐतिहासिक आदेश के मुताबिक, यह पूरा घोटाला साल 2017 से 2020 के बीच अंजाम दिया गया था। शातिरों ने मुख्य रूप से इन 5 कंपनियों के शेयरों को अपना निशाना बनाया था:
मौर्या उद्योग (Mauria Udyog)
विशाल फैब्रिक्स (Vishal Fabrics)
7NR रिटेल
GBL इंडस्ट्रीज
डार्जलिंग रोपवे कंपनी (Darjeeling Ropeway Company)
क्या होती है पंप एंड डंप स्कीम?
इस खेल में जालसाज पहले किसी पेनी स्टॉक (सस्ते शेयर) को चुनते हैं। फिर झूठी खबरें फैलाकर, आपस में ही शेयर को बार-बार खरीद-बेचकर (सर्कुलर ट्रेडिंग) उसका वॉल्यूम और कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ा देते हैं (पंप करना)। जब शेयर आसमान पर पहुंच जाता है और आम रिटेल निवेशक लालच में आकर उसे खरीदने टूट पड़ते हैं, तब ऑपरेटर अपने सारे शेयर ऊंचे दाम पर बेचकर भाग जाते हैं (डंप करना)। इसके बाद शेयर धड़ाम हो जाता है और आम निवेशकों की गाढ़ी कमाई डूब जाती है।
कैसे खुली पोल? जब आरोपी के बहाने को SEBI ने डिजिटल सबूतों से उड़ाया
जांच के दौरान जब एक मुख्य आरोपी ने खुद को बचाने के लिए यह दलील दी कि जिन संदिग्ध मोबाइल नंबरों से डीलिंग हो रही थी, वे उसके नहीं बल्कि उसके दफ्तर के छोटे कर्मचारियों के हैं, तब सेबी ने कमाल की सायबर-फोरेंसिक जांच दिखाई। सेबी ने विमानन कंपनी IndiGo के फ्लाइट बुकिंग डेटा, होटल रिजर्वेशन, डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों के इनवॉइस और ईमेल रिकॉर्ड खंगाले। सेबी ने साबित कर दिया कि जिन तारीखों पर उन नंबरों से संदेश भेजे गए, उन्हीं तारीखों पर उक्त आरोपी उन्हीं नंबरों के आधार पर फ्लाइट में सफर कर रहा था और होटलों में ठहरा था। यहां तक कि GoDaddy के डोमेन रजिस्ट्रेशन और एडमिन एक्सेस आईपी एड्रेस (IP Address) को भी मैच किया गया।
2.1 करोड़ से ज्यादा Bulk SMS और सोशल मीडिया का जाल
मार्केट को गुमराह करने के लिए इस सिंडिकेट ने बड़े पैमाने पर तकनीक का दुरुपयोग किया था। जांच में सामने आया कि:
आम निवेशकों को फंसाने के लिए 2.1 करोड़ से अधिक बल्क एसएमएस (Bulk SMS) भेजे गए थे।
करीब 60,000 से ज्यादा अनोखे मोबाइल नंबरों पर निवेश के भ्रामक टिप्स शेयर किए गए थे।
फेसबुक, टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए इन शेयर्स को जबरन प्रमोट किया गया था।
सेबी ने 62 लेबर कॉन्ट्रैक्टरों और डमी कर्मचारियों के बैंक खातों की भी कड़ियां जोड़ीं, जिनके नाम पर शेयर खरीदे-बेचे गए थे और मुनाफा वापस प्रमोटर्स के खातों में ट्रांसफर किया जा रहा था।
मास्टरमाइंड हनिफ शेख पर ₹10 करोड़ का जुर्माना, 7 साल का बैन
इस पूरे ₹144 करोड़ के शेयर बाजार महाघोटाले का मास्टरमाइंड हनिफ शेख को घोषित किया गया है। सेबी ने सख्त रुख अपनाते हुए हनिफ शेख पर 10 करोड़ रुपये का भारी-भरकम व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है और उन्हें अगले 7 साल के लिए शेयर बाजार (Capital Market) में किसी भी प्रकार की ट्रेडिंग या गतिविधि करने से पूरी तरह प्रतिबंधित (Ban) कर दिया है। इसके अलावा, पूरे सिंडिकेट से 143.79 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को वापस जमा कराने (Disgorgement) का आदेश दिया गया है और कुल मिलाकर 47.8 करोड़ रुपये की पेनल्टी ठोकी गई है।
यह ऐतिहासिक कार्रवाई देश के करोड़ों छोटे और आम रिटेल निवेशकों के लिए एक बड़ा भरोसा है कि सेबी बाजार को पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।