June 18 2026 06:22 pm

पिता मेहमूद की मौत के बाद इस मशहूर गायक ने छोड़ दी थी बॉलीवुड इंडस्ट्री, कहा था- 'बाबा के बाद वहां न कोई दोस्त था, न अपनापन'

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नई दिल्ली/मुंबई: ऋतिक रोशन की फिल्म 'कहो ना... प्यार है' का आइकॉनिक गाना 'एक पल का जीना' हो या रणबीर कपूर की 'तमाशा' का रूहानी गीत 'सफरनामा', इन गानों को सुनकर आज भी लोगों की रूह खुश हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन गानों को अपनी मखमली और जादुई आवाज देने वाले दिग्गज गायक ने अचानक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से पूरी तरह दूरी क्यों बना ली थी?

90 के दशक में 'ओ सनम' एल्बम से देश-दुनिया में तहलका मचाने वाले इस गायक ने साल 1996 के स्क्रीन अवॉर्ड्स में बेस्ट पॉप मेल वोकलिस्ट, 1997 में चैनल V व्यूअर्स चॉइस अवॉर्ड और साल 2001 में 'बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर' का प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम किया था। हम बात कर रहे हैं इंडस्ट्री के सबसे अनूठे गायक और अभिनेता लकी अली (Lucky Ali) की। लकी अली ने बॉलीवुड और उसकी चमक-दमक को हमेशा के लिए क्यों अलविदा कह दिया, इसका खुलासा उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में किया था।

मशहूर कॉमेडियन मेहमूद के बेटे हैं लकी अली: मौत के वक्त थे अमेरिका में

बहुत कम लोग जानते हैं कि लकी अली, हिंदी सिनेमा के कल्ट और दिवंगत लीजेंड्री एक्टर मेहमूद (Mehmood) के बेटे हैं। जब मेहमूद साहब का निधन हुआ, उस वक्त लकी अली भारत में नहीं बल्कि अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में अपना इलाज करा रहे थे।

पिता के निधन की खबर ने उन्हें अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने मुंबई और फिल्म इंडस्ट्री दोनों से खुद को दूर कर लिया। लकी अली ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था, "मैंने फिल्मों से दूरी किसी कड़वाहट या टॉक्सिसिटी की वजह से नहीं बनाई थी। असल में, मैं वहां की बनावटी दुनिया से पूरी तरह तंग आ चुका था और ऊब गया था। पिता की मौत के बाद मुझे लगा कि अब वहां मेरे लिए कुछ भी नहीं बचा है।"

'ओ सनम' गाने की कहानी: लकी अली ने बताया था, "मैंने फिल्में कीं और गाने गाए, लेकिन एक वक्त आया जब मैं उलझ गया। मैं अपने तरीके से बिना किसी पाबंदी के गाना चाहता था। मेरा मशहूर गाना 'ओ सनम' तभी बाहर आ सका जब मुझे अपने स्टाइल में गाने की पूरी आजादी मिली। साल 2015 के बाद मैंने खुद को पूरी तरह बॉलीवुड प्लेबैक से दूर कर लिया।"

दिग्गज कलाकारों से सीखी कला, फिर खुद का बनाया रास्ता

बॉलीवुड छोड़ने के फैसले पर आगे बात करते हुए लकी अली ने कहा था, "बाबा (मेहमूद) के गुजर जाने के बाद लगा कि फिल्म इंडस्ट्री में अब मेरा कोई नहीं है। वहां न कोई सच्चा दोस्त था और न ही कोई अपनापन बचा था। हालांकि, मुझे गर्व है कि मैंने श्याम बेनेगल जैसे महान डायरेक्टर के साथ 'त्रिकाल' और 'भारत एक खोज' में काम किया। मैंने सेट पर नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और ओम पुरी जैसे धुरंधर कलाकारों से एक्टिंग और जिंदगी के कई बड़े सबक सीखे।"

उन्होंने कहा कि बॉलीवुड प्लेबैक छोड़ने के बाद वे अपने खुद के इंडिपेंडेंट म्यूजिक लेबल और पुराने अनूठे स्टाइल के साथ वापस आए। लकी के मुताबिक, "संगीत की दुनिया में मेरा किसी से कोई कॉम्पिटिशन (मुकाबला) नहीं था। मैं हमेशा से समझता हूं कि अगर आप सच्चा और अच्छा काम करते हैं, तो लोग आपको सिर-आंखों पर बिठाएंगे, और अगर आप बकवास परोसेंगे, तो जनता आपको तुरंत रिजेक्ट कर देगी।"

मीना कुमारी की बहन थीं मां; लकी अली ने की हैं 3 शादियां

लकी अली की पर्सनल लाइफ भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रही है। उनके पारिवारिक रिश्तों और शादियों से जुड़े कुछ मुख्य पहलू इस प्रकार हैं:

मीना कुमारी से खास रिश्ता: लकी अली की मां का नाम मधु अली (महिलीका) था। मधु अली हिंदी सिनेमा की 'ट्रेजेडी क्वीन' कही जाने वाली दिग्गज अभिनेत्री मीना कुमारी की सगी छोटी बहन थीं। इस नाते मीना कुमारी लकी अली की सगी मौसी थीं।

तीन शादियां और बच्चे: लकी अली ने अपनी जिंदगी में तीन शादियां कीं। उनकी पहली शादी न्यूजीलैंड की मेघन जेन मैकक्लेरी से हुई थी, जिससे उनके दो बच्चे (ताअव्वुज और तस्मिया) हुए। मेघन से तलाक के बाद उन्होंने एक फारसी महिला 'इनाया' से निकाह किया, जिनसे उनके दो बच्चे (सारा और रायन) हैं। इसके बाद साल 2010 में, लकी अली ने ब्रिटिश मॉडल और पूर्व ब्यूटी क्वीन केट एलिजाबेथ हैलम से तीसरी शादी की, जिनसे उनका एक बेटा 'डैनी मकसूद अली' है। हालांकि, साल 2017 में केट से भी उनका तलाक हो गया।

सिर्फ गायकी ही नहीं, एक्टिंग और फार्मिंग के भी हैं उस्ताद

लकी अली सिर्फ एक बेहतरीन गायक ही नहीं, बल्कि एक मंझे हुए एक्टर भी रहे हैं। उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपने पिता मेहमूद की फिल्म 'छोटे नवाब' (1962) से कैमरे का सामना किया था। बड़े होने के बाद उन्होंने मल्टीस्टारर फिल्म 'कांटे' (2002), 'सुर' (2002) और रणबीर कपूर-दीपिका पादुकोण की फिल्म 'तमाशा' (2015) में अपनी शानदार और नेचुरल एक्टिंग का लोहा मनवाया।

आजकल लकी अली चकाचौंध से दूर अपनी मर्जी की जिंदगी जीते हैं। उन्हें संगीत बनाने के अलावा शानदार घुड़सवारी करने और अपने फार्महाउस पर बेहतरीन ऑर्गेनिक फार्मिंग (जैविक खेती) करने का बेहद शौक है।