June 18 2026 07:35 pm

थलपति विजय का मास्टरस्ट्रोक: विधानसभा के पहले ही दिन राज्यपाल को साधा, केंद्र को दिखाईं आंखें; किए ये 5 बड़े एलान

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तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता और फिर सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) ने विधानसभा के पहले ही दिन अपनी जबरदस्त राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया है। विपक्ष (DMK) के उन आरोपों का करारा जवाब देते हुए कि उनकी पार्टी 'तमिलझा वेत्री कड़गम' (TVK) भाजपा और केंद्र सरकार से टकराने से डरती है, विजय सरकार ने राज्यपाल के पहले ही अभिभाषण में केंद्र के खिलाफ सीधे तौर पर आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ केंद्र को सुप्रीम कोर्ट तक घसीटने की चेतावनी दी है, बल्कि तमिलनाडु के ज्वलंत मुद्दों पर झुकने से साफ इनकार कर दिया है।

राष्ट्रगान और तमिल गान विवाद को बेहद चतुराई से सुलझाया

तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राष्ट्रगान और तमिल गीत 'तमिल थाई वाइथु' के क्रम को लेकर विपक्षी दल टीवीके सरकार पर हमलावर थे। राज्य में अमूमन राष्ट्रगान राज्यपाल के अभिभाषण के अंत में होता था, जिससे पहले कई बार राज्यपालों और पूर्ववर्ती सरकारों में टकराव हुआ है। लेकिन सीएम विजय ने सत्र की शुरुआत में ही पहले तमिल गीत और उसके तुरंत बाद राष्ट्रगान कराकर राज्यपाल के संभावित गुस्से और विपक्ष के विरोध, दोनों की हवा निकाल दी और सदन की गरिमा को बखूबी संभाला।

हक नहीं मिला तो सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की विशेष टीम उतारेगी विजय सरकार

राज्यपाल के अभिभाषण के जरिए थलपति विजय सरकार ने साफ कर दिया कि केंद्र के साथ वित्तीय संसाधनों (टैक्स शेयर) के बंटवारे को लेकर विधानसभा में एक बड़ा प्रस्ताव पारित किया जाएगा। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी तमिलनाडु को उसका उचित आर्थिक हिस्सा नहीं मिला, तो वे देश के शीर्ष वकीलों की एक विशेष टीम तैयार कर इस मामले को सीधे सुप्रीम कोर्ट ले जाएंगे। यह टीम एक विस्तृत रिपोर्ट भी जारी करेगी, जो केंद्र द्वारा तमिलनाडु के साथ किए जा रहे कथित आर्थिक भेदभाव का कच्चा चिट्ठा दुनिया के सामने रखेगी।

शिक्षा नीति और NEET पर सीधा हमला: 'शिक्षा को राज्य सूची में वापस लाओ'

राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर विजय सरकार ने केंद्र पर तीखा निशाना साधा। इसके साथ ही, नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत तमिलनाडु को मिलने वाले 3,458 करोड़ रुपये के फंड को रोकने के लिए भी केंद्र की कड़ी आलोचना की गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि केंद्र यह पैसा सिर्फ इसलिए रोक रहा है क्योंकि तमिलनाडु 'तीन भाषा नीति' को मानने के लिए तैयार नहीं है। सीएम विजय ने एलान किया कि तमिलनाडु साल 1968 में पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरै द्वारा अपनाई गई 'दो भाषा नीति' पर ही अडिग रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने मांग उठाई कि शिक्षा को समवर्ती सूची (Concurrent List) से हटाकर पूरी तरह राज्य का विषय (State Subject) बनाया जाए, ताकि केंद्र का हस्तक्षेप खत्म हो सके।

जातीय जनगणना का आग्रह और 10 लाख करोड़ के कर्ज से निपटने का प्लान

विजय सरकार ने एलान किया कि वे राष्ट्रीय जनगणना के हिस्से के रूप में तमिलनाडु में जातीय जनगणना कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे, जिसके बाद राज्य में एक व्यापक सामाजिक सर्वेक्षण कराया जाएगा ताकि हर समुदाय को उसकी आबादी के हिसाब से वास्तविक सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व मिल सके। आर्थिक मोर्चे पर बात करते हुए सरकार ने याद दिलाया कि राज्य पर 10 लाख करोड़ रुपये का भारी कर्ज है, जिससे हर नागरिक पर एक लाख का कर्ज बैठता है। इस वित्तीय संकट से निपटने के लिए सरकार ने शराब निर्माताओं पर नया टैक्स लगाया है, जिससे हर साल 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा और चुनावी वादों को पूरा किया जा सकेगा।