'मैं वापस आऊंगा' की सफलता के बीच इम्तियाज अली का बड़ा ऐलान, राधा-कृष्ण की दिव्य गाथा पर बनाना चाहते हैं फिल्म; कहा- 'वह सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं'
नई दिल्ली/मुंबई: अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के लिए बॉक्स ऑफिस और क्रिटिक्स से जबरदस्त तारीफें बटोर रहे हिंदी सिनेमा के दिग्गज डायरेक्टर इम्तियाज अली (Imtiaz Ali) एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी फिल्मों में इंसानी रिश्तों और प्यार की अनूठी परिभाषा गढ़ने के लिए मशहूर इम्तियाज अली ने अपने फ्यूचर प्रोजेक्ट को लेकर एक बेहद दिलचस्प और बड़ा खुलासा किया है।
इम्तियाज ने बताया कि वे आने वाले समय में भारतीय पौराणिक कथाओं से प्रेरित होकर 'राधा-कृष्ण' की पावन कहानी को बड़े पर्दे पर उतारना चाहते हैं। हालांकि, उनका मानना है कि राधा-कृष्ण का यह दिव्य संबंध केवल एक आम 'लव स्टोरी' (प्रेम कहानी) नहीं है, बल्कि इससे कहीं ऊपर है।
हर चीज में खुद-ब-खुद आ जाता है रोमांस: इम्तियाज अली
एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान (एबीपी लाइव) को दिए इंटरव्यू में जब इम्तियाज अली से उनकी फिल्मों में दिखने वाले जबरदस्त रोमांस को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, "मैं जानबूझकर अपनी हर फिल्म या कहानी में रोमांस नहीं डालना चाहता, लेकिन लिखते और बनाते समय वह अपने आप ही फिल्म में आ जाता है। जब ऐसा होता है, तो मैं बस उसे रोकता नहीं हूं।"
'जब वी मेट' और 'रॉकस्टार' जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में देने वाले डायरेक्टर ने एक चौंकाने वाला सच बताते हुए कहा कि उन्होंने आज तक अपनी किसी भी फिल्म को विशुद्ध 'लव स्टोरी' मानकर नहीं बनाया है।
'लव आजकल' के नाम का दिलचस्प किस्सा: इम्तियाज ने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया, "जब साल 2009 में आई फिल्म 'लव आजकल' का नाम तय हो रहा था, तो मैं इसके पक्ष में नहीं था। मुझे लगता था कि फिल्म का नाम सिर्फ 'आजकल' होना चाहिए, क्योंकि मैं खुद संशय में था कि क्या यह वाकई एक लव स्टोरी है? लेकिन मेरी टीम ने मुझे समझाया कि वे इसे एक प्रेम कहानी के रूप में देख रहे हैं, जबकि मेरे लिए यह फिल्म अलग-अलग दौर (Eras) में प्यार की एक अलग व्याख्या मात्र थी।" इसी तरह उन्होंने 'जब वी मेट' को भी कभी लव स्टोरी समझकर नहीं निर्देशित किया था।
राधा-कृष्ण की कहानी के पीछे है गहरा दर्शनशास्त्र (Philosophy)
जब इम्तियाज अली से पूछा गया कि वे भविष्य में किस तरह के विषयों पर काम करने की इच्छा रखते हैं, तो उन्होंने सनातन पौराणिक कथाओं के प्रति अपना गहरा लगाव जाहिर किया।
कहानियों की परतें: इम्तियाज ने कहा, "हिंदू पौराणिक कथाओं (Mythology) में ऐसी ढेरों अद्भुत कहानियां हैं जो मुझे अंदर तक बेहद प्रभावित और प्रेरित करती हैं। मैं पहले भी यह बात कह चुका हूं कि मैं 'राधा-कृष्ण' की कहानी पर एक भव्य फिल्म बनाना चाहता हूं।"
सिर्फ प्रेम कहानी नहीं: जब इंटरव्यूर ने टोकते हुए कहा कि राधा-कृष्ण भी तो आखिरकार एक अमर प्रेम कहानी ही है, तो इम्तियाज ने मुस्कुराते हुए इस सोच को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "राधा-कृष्ण की कहानी केवल एक साधारण लव स्टोरी नहीं है। इस पावन गाथा के पीछे बहुत सी परतें (Layers) छिपी हैं। इसके पीछे एक बेहद गहरा दर्शनशास्त्र (Philosophy) और आध्यात्मिकता है, जिसे गहराई से समझने और दिखाने की जरूरत है।"
"प्यार के बिना दुनिया की कोई कहानी बन ही नहीं सकती"
इम्तियाज अली ने अंत में कहानी कहने की कला (Storytelling) पर बात करते हुए एक बेहद खूबसूरत दर्शन साझा किया। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि दुनिया का कोई भी लेखक या निर्देशक प्यार के बिना कोई भी कहानी बना सकता है। वह प्यार किसी भी रूप में हो सकता है—वह आपके देश के प्रति देशभक्ति का प्यार हो सकता है, या फिर किसी ऐसे इंसान के लिए हो सकता है जो अब इस दुनिया को छोड़कर जा चुका है और कोई उसकी याद में बदला (Revenge) ले रहा है। यानी हर कहानी की बुनियाद में हमेशा प्यार ही होगा, बस उसे परदे पर पेश करने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं।”