BREAKING:
August 07 2026 06:18 pm

साबुन, तेल और बिस्कुट की कीमतों में होने वाली है भारी बढ़ोतरी; FMCG कंपनियों ने तैयार किया 'प्राइस हाइक' प्लान

Post

India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट (ईरान-अमेरिका-इज़राइल) में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब आपकी रसोई और बाथरूम के बजट पर पड़ने वाला है। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और इनपुट लागत में वृद्धि के कारण दिग्गज एफएमसीजी (FMCG) कंपनियां अब अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) से आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लग सकता है।

नुवामा की रिपोर्ट: 3 से 4 फीसदी तक महंगे होंगे उत्पाद

ब्रोकरेज फर्म 'नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज' की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि कच्चे माल की कीमतों में इसी तरह उछाल जारी रहा, तो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में साबुन, सोडा और खाद्य तेल जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में 3 से 4 प्रतिशत की सीधी वृद्धि देखी जा सकती है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? ये हैं 3 मुख्य कारण

कंपनियों के पास फिलहाल 30-45 दिनों का स्टॉक मौजूद है, इसलिए चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में प्रभाव कम रहा, लेकिन नया स्टॉक आने पर कीमतें बढ़ना तय है। इसके पीछे ये तीन वजहें प्रमुख हैं:

पैकेजिंग लागत: साबुन, बिस्कुट और शैम्पू जैसे उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक का उपयोग होता है, जो कच्चे तेल से बनता है। तेल महंगा होने से पैकेजिंग की लागत बढ़ गई है।

लॉजिस्टिक्स और मालभाड़ा: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कंटेनर किराए से लेकर जहाजों के बीमा तक, सब कुछ महंगा हो गया है। इससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।

खाद्य तेल का आयात: भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से आयात करता है। युद्ध के कारण समुद्री रास्तों में बाधा आने से कुकिंग ऑयल की कीमतों में स्वतः ही उछाल आने की आशंका है।

आम आदमी की जेब पर कितना पड़ेगा असर?

महंगाई की यह नई लहर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। सुबह के टूथपेस्ट और साबुन से लेकर रात के खाने के तेल तक, हर चीज की कीमत बढ़ने से मासिक बजट बिगड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां अपनी मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए बढ़ी हुई लागत का बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर डालने की रणनीति अपना रही हैं।