मंथली बजट प्लानिंग: क्या सैलरी आते ही हो जाती है खत्म? इन 5 आदतों को आज ही बदलें, कभी नहीं होगी पैसों की किल्लत

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India News Live,Digital Desk : 'सैलरी आई नहीं कि खत्म हो गई'—यह आजकल के नौकरीपेशा लोगों की सबसे बड़ी आम समस्या बन गई है। महीने के शुरुआती 10 दिन तो राजाओं की तरह गुजरते हैं, लेकिन आखिरी हफ्ते तक आते-आते चाय-पानी के खर्च के लिए भी बटुआ गवाही नहीं देता। अगर आप भी इसी 'सैलरी टू सैलरी' वाले चक्रव्यूह में फंसे हैं, तो यकीन मानिए समस्या आपकी कमाई में नहीं, बल्कि खर्च करने के तरीके में है।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप न केवल अपनी बचत बढ़ा सकते हैं, बल्कि महीने के अंत में होने वाले मानसिक तनाव से भी मुक्ति पा सकते हैं। आइए जानते हैं वे 5 सुनहरे नियम जो आपकी आर्थिक सेहत सुधार देंगे।

1. 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' के जाल से बचें

अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही ऑफिस में इंक्रीमेंट होता है या बोनस मिलता है, लोग तुरंत नया आईफोन, महंगी गाड़ी या लग्जरी वेकेशन प्लान कर लेते हैं। इसे 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' कहते हैं। नियम सीधा है—जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, अपने खर्चों को नहीं बल्कि अपने निवेश (Investment) को बढ़ाएं। अपनी जरूरतों और इच्छाओं के बीच का अंतर समझना ही अमीर बनने की पहली सीढ़ी है।

2. पर्सनल लोन की 'मीठी छुरी' से रहें दूर

आजकल बैंकों से पर्सनल लोन लेना बहुत आसान हो गया है, लेकिन यह सबसे महंगा कर्ज होता है। इसकी ऊंची ब्याज दरें और हर महीने कटने वाली भारी-भरकम EMI आपके बजट की कमर तोड़ देती है। दिखावे या छोटी-मोटी मौज-मस्ती के लिए कभी भी पर्सनल लोन न लें। कर्ज तभी लें जब वह संपत्ति बनाने (जैसे होम लोन) के काम आए, न कि खर्च करने के।

3. EMI का गणित: 30% का थंब रूल

अगर कर्ज लेना बहुत जरूरी हो, तो अपनी इनकम का सही आकलन करें। विशेषज्ञों के मुताबिक, आपकी सभी EMI का कुल योग आपकी टेक-होम सैलरी के 25-30% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यदि आप अपनी आधी सैलरी किश्तों में दे रहे हैं, तो इमरजेंसी या भविष्य की प्लानिंग के लिए आपके पास कुछ नहीं बचेगा। हमेशा अपनी चादर देखकर ही पैर पसारें।

4. एक 'इमरजेंसी फंड' जरूर बनाएं

वक्त का कोई भरोसा नहीं होता—अचानक बीमारी, नौकरी जाना या कोई बड़ा रिपेयरिंग का काम कभी भी आ सकता है। ऐसे समय में उधार मांगने के बजाय आपकी अपनी बचत ही सच्ची साथी होती है। एक आपातकालीन निधि (Emergency Fund) तैयार करें जिसमें कम से कम आपके 6 महीने के खर्च के बराबर राशि जमा हो। यह फंड आपको मुश्किल वक्त में कर्ज के दलदल में फंसने से बचाएगा।

5. क्रेडिट कार्ड: 'सुविधा' या 'जाल'?

क्रेडिट कार्ड को 'फ्री मनी' समझने की गलती कभी न करें। कार्ड की लिमिट का केवल 30 से 40% ही इस्तेमाल करना समझदारी है। अगर आप बिल का पूरा भुगतान समय पर नहीं करते, तो इस पर लगने वाला ब्याज आपको देखते ही देखते भारी कर्ज में डुबो सकता है। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल केवल रिवॉर्ड पॉइंट्स और क्रेडिट स्कोर सुधारने के लिए करें, न कि अपनी औकात से बाहर जाकर शॉपिंग करने के लिए।