दुनिया के सबसे बड़े हथियार निर्यातक और वैश्विक रक्षा बाजार की वर्तमान स्थिति
India News Live,Digital Desk : आज दुनिया में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। युद्ध, सीमा विवाद और भू-राजनीतिक तनाव के कारण लगभग हर देश अपना सैन्य बजट बढ़ा रहा है । इसका सीधा असर वैश्विक हथियार बाजार पर पड़ा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में हथियारों का व्यापार कुछ ही देशों के हाथों में केंद्रित हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच वैश्विक हथियार निर्यात का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा केवल पांच देशों से आया।
एसआईपीआरआई की नवीनतम रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि संयुक्त राज्य अमेरिका वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है। 2020 से 2024 के बीच, वैश्विक हथियार बाजार में संयुक्त राज्य अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा स्वयं दर्शाता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका एक सैन्य औद्योगिक शक्ति के रूप में कितना महत्वपूर्ण हो गया है। लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली, ड्रोन और उन्नत प्रौद्योगिकी वाले हथियार संयुक्त राज्य अमेरिका से विश्व भर के देशों को भेजे जाते हैं। लॉकहीड मार्टिन और बोइंग जैसी कंपनियां इन निर्यातों की रीढ़ मानी जाती हैं। अमेरिका का एक और प्रमुख लाभ यह है कि वह अपने सहयोगियों को सैन्य सहायता और प्रौद्योगिकी दोनों प्रदान करता है।
फ्रांस ने रूस को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया है।
हाल के वर्षों में फ्रांस ने हथियारों के निर्यात में उल्लेखनीय प्रगति की है। एसआईपीआरआई के अनुसार, फ्रांस अब वैश्विक बाजार में लगभग 11 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है। राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। भारत से खरीदे गए 36 राफेल विमानों का फ्रांस के निर्यात आंकड़ों में महत्वपूर्ण योगदान है। मिस्र, कतर और कई एशियाई देशों ने भी फ्रांसीसी हथियारों में रुचि दिखाई है।
रूस की घटती पकड़: युद्ध का प्रभाव।
हथियारों के बाजार में कभी अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी रहा रूस अब तीसरे स्थान पर खिसक गया है। वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी घटकर लगभग 7 से 8 प्रतिशत रह गई है। एसआईपीआरआई के अनुसार, रूस के हथियार निर्यात में भारी 64 प्रतिशत की गिरावट आई है। यूक्रेन युद्ध के बाद, रूस को अपने ही हथियारों का इस्तेमाल अपने उद्देश्यों के लिए करना पड़ा। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ने भी उसके निर्यात को कमजोर किया है।
सस्ते हथियारों के मामले में चीन चौथे स्थान पर है।
हथियारों के निर्यात में चीन का हिस्सा लगभग 5.8 प्रतिशत है। हालांकि, हाल के वर्षों में चीन के निर्यात में थोड़ी गिरावट आई है। पाकिस्तान चीन का सबसे बड़ा हथियार खरीदार है और चीनी हथियारों की कुल खेप में उसका महत्वपूर्ण योगदान है। अफ्रीका और एशिया के कई विकासशील देश चीन से हथियार खरीदते हैं क्योंकि वहां कीमतें कम हैं और सौदे आसान हैं।
जर्मनी, तुर्की और इटली की बढ़ती भूमिका:
हथियारों के निर्यात में जर्मनी पांचवें स्थान पर है, जबकि इटली और तुर्की तेजी से उभरते हुए खिलाड़ी हैं। विशेष रूप से ड्रोन प्रौद्योगिकी में तुर्की ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। हाल के वर्षों में इटली के हथियार निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
आयातकर्ता से निर्यातक बनने तक:
भारत लंबे समय से विश्व का सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा है, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। आज भारत लगभग 100 देशों को रक्षा उपकरण और हथियार निर्यात करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया जैसे देश भारतीय रक्षा उत्पाद खरीद रहे हैं। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों ने भारत के रक्षा निर्यात को एक नई दिशा दी है। सार्वजनिक और निजी दोनों कंपनियां अब वैश्विक हथियार बाजार में भारत की उपस्थिति को मजबूत कर रही हैं।