आयुष्मान भारत योजना को लेकर चुनौती,आखिर क्यों सरकारी स्कीम से किनारा कर रहे हैं बड़े प्राइवेट अस्पताल?
India News Live, Digital Desk: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (AB PM-JAY) वर्तमान में एक कठिन दौर से गुजर रही है। सितंबर 2018 में शुरू हुई दुनिया की यह सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना, जो गरीबों को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज प्रदान करती है, अब बड़े निजी अस्पतालों की बेरुखी का सामना कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, देश की प्रमुख प्राइवेट अस्पताल चेन इस योजना से धीरे-धीरे बाहर निकलने या अपनी भागीदारी कम करने पर विचार कर रही हैं।
कम रिम्बर्समेंट और सरकारी कंट्रोल बनी मुख्य वजह
इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े अस्पतालों के कुल राजस्व में सरकारी योजनाओं की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकार द्वारा तय की गई इलाज की दरें हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने विभिन्न सर्जरी और इलाज के लिए जो कीमतें तय की हैं, वे अस्पतालों की 'ऑपरेशनल कॉस्ट' (संचालन लागत) से भी कम हैं। प्रीमियम सुविधाएं देने वाले अस्पतालों के लिए इतनी कम दरों पर गुणवत्तापूर्ण इलाज देना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
पेमेंट में देरी से कैश फ्लो का बिगड़ा गणित
अस्पतालों के पीछे हटने की एक और बड़ी वजह सरकारी एजेंसियों द्वारा क्लेम सेटलमेंट में होने वाली देरी है।
कैश फ्लो की समस्या: क्लेम का पैसा समय पर न मिलने से अस्पतालों को दैनिक खर्चों और स्टाफ की सैलरी निकालने में दिक्कत आती है।
रिटर्न का दबाव: देश के कई बड़े मेडिकल सेंटर्स अब प्राइवेट इक्विटी फर्म्स के स्वामित्व में हैं, जो 18-25% तक के मुनाफे की उम्मीद रखते हैं।
फोकस में बदलाव: महंगे उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टरों की फीस के कारण अब ये अस्पताल सरकारी स्कीम के बजाय 'कैश-पेइंग' मरीजों और प्राइवेट इंश्योरेंस वाले ग्राहकों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
70+ बुजुर्गों के लिए विस्तार, पर संसाधनों की कमी
साल 2024 में सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाकर 70 साल से अधिक उम्र के सभी बुजुर्गों को इसमें शामिल किया था। इससे लाभार्थियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। हालांकि, बड़े प्राइवेट अस्पतालों का केवल शहरों तक सीमित होना और उनकी घटती रुचि इस लक्ष्य की राह में रोड़ा बन रही है।
30% भारतीयों के पास अब भी बीमा नहीं, बढ़ सकता है संकट
आंकड़ों के अनुसार, आज भी करीब 30 प्रतिशत भारतीयों के पास किसी भी तरह का स्वास्थ्य बीमा नहीं है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आयुष्मान कार्ड ही एकमात्र सहारा है। यदि बड़े और विशेषज्ञ अस्पताल इस योजना से खुद को अलग कर लेते हैं, तो वंचित आबादी के लिए गंभीर बीमारियों का उच्च गुणवत्ता वाला इलाज मिलना एक बड़ा संकट बन सकता है।