मौसम विभाग ने लखनऊ, अयोध्या समेत 40 से ज्यादा जिलों में जारी किया भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

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उत्तर प्रदेश में उमस भरी चिपचिपी गर्मी से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए राहत और सतर्कता भरी बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ ने राज्य में मानसून के पुन: पूरी तरह सक्रिय होने की घोषणा की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और मानसून ट्रफ लाइन के उत्तर प्रदेश के ऊपर से गुजरने के कारण राज्य में अगले चार दिनों तक मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहेगा। इस मौसमी बदलाव के चलते पूर्वी, मध्य और तराई उत्तर प्रदेश के अधिकांश जनपदों में बादलों की जोरदार आवाजाही शुरू हो गई है और कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने लगी हैं।

मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सामान्य बूंदाबांदी नहीं होगी, बल्कि कई इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और बादलों के भीषण गर्जन के साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने की प्रबल आशंका है। विशेष रूप से राजधानी लखनऊ, धर्मनगरी अयोध्या, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, गोंडा और बहराइच समेत 40 से अधिक जिलों के लिए मौसम विभाग ने 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट जारी किया है। आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय जिला प्रशासनों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से त्वरित निपटा जा सके।

लखनऊ, अयोध्या और मध्य यूपी में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट: आकाशीय बिजली का बड़ा खतरा

आंचलिक मौसम केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य उत्तर प्रदेश के जिलों में मानसून का सबसे अधिक असर देखने को मिलेगा। राजधानी लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, उन्नाव, रायबरेली, अमेठी और सुल्तानपुर में अगले 96 घंटों के दौरान रुक-रुक कर भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का सबसे अधिक खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने खुले में काम करने वाले लोगों और किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा है।

अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर, सरयू घाटों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने नालों की सफाई और वाटर पंपिंग स्टेशनों को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने का आदेश दिया है। वहीं, लखनऊ के हजरतगंज, गोमती नगर, चौक, चारबाग और जानकीपुरम जैसे निचले इलाकों में जलभराव की संभावना को देखते हुए नगर निगम लखनऊ ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

तराई और पूर्वांचल से लेकर रुहेलखंड तक जलभराव का संकट: इन जिलों में रहें सावधान

मौसम विभाग द्वारा जारी की गई विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) और नेपाल से सटे तराई क्षेत्रों में वर्षा का घनत्व अत्यंत अधिक रह सकता है। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और हरदोई जनपदों में भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर आ सकती हैं और निचले रिहायशी इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।

रुहेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, अमरोहा, मेरठ और अलीगढ़ में भी मध्यम से भारी वर्षा का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि तराई के जिलों में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी और स्थानीय स्तर पर होने वाली लगातार बारिश से घाघरा, सरयू, राप्ती और गंडक जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की जा सकती है। प्रशासन ने तटवर्ती गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

किसानों के खिले चेहरे, लेकिन वज्रपात से बचाव के लिए राहत आयुक्त की सख्त एडवाइजरी

मानसून की इस सक्रियता ने खरीफ फसलों, विशेष रूप से धान, गन्ना, मक्का और मौसमी सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी है। पिछले कुछ हफ्तों से बारिश की कमी के कारण धान की रोपाई और फसलों की सिंचाई को लेकर किसान बेहद चिंतित थे और नलकूपों पर निर्भर रहने को विवश थे। अब इस व्यापक मानसूनी बारिश से खेतों में नमी की कमी पूरी होगी और भूमिगत जलस्तर में भी सुधार आएगा। हालांकि, जिन इलाकों में अत्यधिक वर्षा से खेतों में जलभराव हो सकता है, वहां किसानों को उचित जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय ने आकाशीय बिजली (वज्रपात) के खतरे को देखते हुए जनहित में सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में नागरिकों से अपील की गई है कि बारिश और बिजली कड़कने के दौरान किसी भी हाल में ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर या टीन शेड के नीचे शरण न लें। किसान भाई खेत में काम करते समय यदि बादल गरजने की आवाज सुनें, तो तुरंत पक्के मकानों में चले जाएं। स्मार्टफोन यूजर्स को 'दामिनी ऐप' (Damini App) डाउनलोड करने का सुझाव दिया गया है, जो आकाशीय बिजली गिरने से 20 से 30 मिनट पहले सटीक चेतावनी प्रदान करता है।

उमस और गर्मी से मिलेगी बड़ी राहत: तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की आएगी भारी गिरावट

पिछले कई दिनों से उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों में दिन का तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा था, लेकिन वातावरण में 80 से 90 प्रतिशत तक आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) होने के कारण 42 डिग्री जैसी भीषण गर्मी का अहसास हो रहा था। दिन-रात पसीने छुड़ाने वाली उमस ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रखा था।

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों में राज्य के अधिकतर जनपदों में अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाएगी। इससे तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के करीब आ जाएगा, जिससे लोगों को चिपचिपी गर्मी से पूरी तरह राहत मिलेगी और मौसम सुहावना बन जाएगा। ठंडी पुरवैया हवाएं चलने से रात के तापमान में भी भारी गिरावट आएगी, जिससे आम जनता को उमस भरे मौसम से बड़ी निजात मिलेगी।

स्थानीय प्रशासन और नगर निकाय पूरी तरह मुस्तैद: आपातकालीन कंट्रोल रूम सक्रिय

राज्य सरकार के निर्देशों के क्रम में सभी जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों ने शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन टीमों, नागरिक सुरक्षा संगठनों, एसडीआरएफ (SDRF) और अग्निशमन दलों को स्टैंडबाय पर रखा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अस्पतालों में मौसमी बीमारियों, डायरिया, डेंगू और वायरल फीवर से निपटने के लिए दवाओं और बेड का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करें।

विद्युत विभाग को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि आंधी-तूफान के दौरान जर्जर तारों और खंभों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित शटडाउन और फॉल्ट दुरुस्त करने वाली टीमों को चौबीसों घंटे फील्ड में तैनात रखा जाए। नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर निकलने से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी मौसम बुलेटिन का पालन करें।