बंगाल में टूटा 'मुस्लिम वोट बैंक' का तिलस्म? मुस्लिम बहुल सीटों पर भी भाजपा की प्रचंड जीत
India News Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। सबसे चौंकाने वाला बदलाव राज्य की मुस्लिम बहुल सीटों पर देखने को मिला है, जिन्हें पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अभेद्य किला माना जाता था। आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि भाजपा ने न केवल ममता बनर्जी के इस गढ़ में सेंधमारी की है, बल्कि कई जिलों में टीएमसी का सूपड़ा साफ कर दिया है। मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में भाजपा की सीटों में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
मुस्लिम बहुल जिलों का गणित: 2021 बनाम 2026
मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर की 43 महत्वपूर्ण सीटों पर, जहां मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका में है, मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा:
टीएमसी: 20 सीटें
भाजपा: 18 सीटें (पिछले चुनाव के मुकाबले 10 सीटों की बढ़त)
अन्य: 5 सीटें
मुर्शिदाबाद: टीएमसी को सबसे बड़ा झटका
मुर्शिदाबाद जिला कभी टीएमसी की ताकत हुआ करता था, लेकिन 2026 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई:
2021 का हाल: टीएमसी ने 22 में से 20 सीटें जीती थीं, भाजपा के पास सिर्फ 2 सीटें थीं।
2026 का बदलाव: टीएमसी सिमटकर महज 9 सीटों पर रह गई। भाजपा ने अपनी ताकत बढ़ाते हुए 6 अतिरिक्त सीटें जीतीं। बाकी सीटें कांग्रेस, वामपंथी और अन्य क्षेत्रीय दलों के खाते में गईं।
मालदा और उत्तर दिनाजपुर में बराबरी और बढ़त
मालदा (12 सीटें): 2021 में टीएमसी के पास 8 सीटें थीं, जो अब घटकर 6 रह गई हैं। भाजपा ने अपनी सीटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर ली है, यानी यहां दोनों अब बराबरी पर हैं।
उत्तर दिनाजपुर (9 सीटें): भाजपा ने यहां अपनी पुरानी 2 सीटों को बरकरार रखते हुए टीएमसी से 2 और सीटें छीन लीं। अब भाजपा की झोली में यहाँ 4 सीटें हैं।
20% मुस्लिम आबादी वाली सीटों पर 'क्लीन स्वीप'
सबसे विनाशकारी आंकड़े उन 153 सीटों से आए हैं जहां मुस्लिम वोटर्स की तादाद लगभग 20% है। यहां भाजपा ने टीएमसी का पूरी तरह सफाया कर दिया है:
2021 की स्थिति: इन 153 सीटों में से टीएमसी ने 94 और भाजपा ने 59 सीटें जीती थीं।
2026 का 'कमल' धमाका: टीएमसी 94 से गिरकर सीधे 15 सीटों पर आ गई, जबकि भाजपा ने अविश्वसनीय प्रदर्शन करते हुए 138 सीटों पर कब्जा जमा लिया।
क्या रहे जीत के कारण?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे और महिला केंद्रित योजनाओं (जैसे लक्ष्मी भंडार की जगह नई योजनाओं का विकल्प) ने मुस्लिम महिलाओं और युवाओं के एक वर्ग को प्रभावित किया है। साथ ही, एंटी-इंकंबेंसी और विकास के मुद्दे ने ध्रुवीकरण की पुरानी राजनीति को पीछे छोड़ दिया है।