Kerala Election Results 2026 : केरलम में लाल किले का पतन,50 साल में पहली बार वामपंथ सत्ता से बाहर
India News Live, Digital Desk: केरलम की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है। लगभग पांच दशकों के बाद यह पहली बार है जब भारत का कोई भी राज्य वामपंथी शासन के अधीन नहीं है। सोमवार, 4 मई 2026 को आए चुनावी नतीजों ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के 'अजेय' माने जाने वाले किले को ढहा दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने 140 सीटों वाली विधानसभा में 102 सीटों पर कब्जा कर शानदार वापसी की है। इस हार के साथ ही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
सत्ता से पूरी तरह बाहर हुआ वामपंथ: एक युग का अंत
केरलम की यह हार केवल एक राज्य का चुनाव परिणाम नहीं है, बल्कि भारतीय राजनीति के एक बड़े अध्याय का समापन है। 1957 में ई.एम.एस. नंबूदिरिपाद के नेतृत्व में केरल ने दुनिया की पहली लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई कम्युनिस्ट सरकार दी थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भी दशकों तक वामपंथ का दबदबा रहा। लेकिन 2011 में बंगाल और 2018 में त्रिपुरा खोने के बाद अब केरलम भी हाथ से निकल गया है। विशेषज्ञ इसे 'लेफ्ट-मुक्त' राज्य राजनीति के दौर की शुरुआत मान रहे हैं।
UDF की 'सुनामी' और LDF की करारी शिकस्त
चुनाव परिणामों के आंकड़े UDF की लहर को साफ बयां करते हैं। कांग्रेस 63 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, वहीं उसकी सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने रिकॉर्ड 22 सीटें जीतकर मालाबार क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है। दूसरी ओर, सत्ताधारी LDF महज 35 सीटों पर सिमट गई है, जिसमें माकपा (CPI-M) को 26 और भाकपा (CPI) को केवल 8 सीटें मिली हैं। भाजपा ने भी इस बार अपनी स्थिति मजबूत की है और नेमोम व चाथनूर सहित 3 सीटों पर जीत दर्ज की है।
क्यों फिसली वामपंथ के हाथ से सत्ता?
पिनाराई विजयन सरकार के खिलाफ भारी 'एंटी-इंकंबेंसी' (सत्ता विरोधी लहर) इस हार का मुख्य कारण मानी जा रही है।
अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण: अल्पसंख्यक मतदाताओं का झुकाव इस बार पूरी तरह UDF की ओर रहा।
स्थानीय मुद्दे: बेरोजगारी, कृषि संकट और कुछ विवादित विकास परियोजनाओं ने आम जनता में नाराजगी पैदा की।
संगठनात्मक कमजोरी: पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के बाद केरलम में भी वामपंथ अपनी वैचारिक पकड़ और जमीनी जुड़ाव को बनाए रखने में असफल दिखा।
कौन थे ई.एम.एस. नंबूदिरिपाद?
केरलम की आज की स्थिति को समझने के लिए ई.एम.एस. नंबूदिरिपाद के योगदान को भूलना असंभव है। वे न केवल केरल के पहले मुख्यमंत्री थे, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने भूमि सुधार और विकेंद्रीकरण के जरिए 'केरल मॉडल' की नींव रखी थी। उन्होंने ही वामपंथ को भारतीय लोकतंत्र की मुख्यधारा से जोड़ा था, लेकिन आज वही विचारधारा अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है।