वृंदावन का वो चमत्कारिक मंदिर जहाँ गोपियों को मिले थे श्रीकृष्ण; दर्शन मात्र से दूर होती है विवाह की हर बाधा
India News Live,Digital Desk : कान्हा की नगरी वृंदावन केवल बांके बिहारी के लिए ही नहीं, बल्कि आदि शक्ति के उस पावन केंद्र के लिए भी प्रसिद्ध है जहाँ प्रेम और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। हम बात कर रहे हैं मां कात्यायनी शक्तिपीठ की, जिसे ब्रज भूमि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। राधा बाग क्षेत्र में स्थित यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और इसका संबंध सीधे द्वापर युग की उन गोपियों से है जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को पाने के लिए यहाँ कठोर तपस्या की थी।
सती के 'केश' गिरने की पावन कथा
धार्मिक पुराणों के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के पार्थिव शरीर के हिस्से किए थे, तब इस पवित्र स्थान पर देवी के 'केश' (बाल) गिरे थे। इसी कारण इसे 'उमा शक्तिपीठ' के नाम से भी पूजा जाता है। मान्यता है कि ब्रज की रक्षा का दायित्व स्वयं मां कात्यायनी के कंधों पर है।
गोपियों की तपस्या और श्रीकृष्ण का 'महारास'
श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णन मिलता है कि द्वापर युग में गोपियां भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त करना चाहती थीं।
बालू की मूर्ति: गोपियों ने पूरे कार्तिक मास तक यमुना के तट पर बालू (रेत) से मां कात्यायनी की प्रतिमा बनाकर उनकी आराधना की थी।
वरदान और रासलीला: माता ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें मनोवांछित वरदान दिया। इसी के फलस्वरूप शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में श्रीकृष्ण ने अनंत रूप धारण कर गोपियों के साथ 'महारास' रचाया था।
स्वामी केशवानंद महाराज और मंदिर का पुनरुद्धार
इस भव्य मंदिर का आधुनिक इतिहास स्वामी केशवानंद महाराज से जुड़ा है। उन्होंने हिमालय की कंदराओं में 33 वर्षों तक कठिन साधना की। साधना के दौरान मिले दिव्य आदेश के बाद उन्होंने वर्ष 1923 में वृंदावन के इस लुप्त शक्तिपीठ को खोज निकाला और यहाँ भव्य मंदिर का निर्माण कराया।
अष्टधातु की प्रतिमा और मंदिर की भव्यता
सफेद संगमरमर से निर्मित यह मंदिर स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।
मुख्य द्वार: मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो विशाल सुनहरे सिंह (शेर) पहरा देते प्रतीत होते हैं।
गर्भगृह: यहाँ मां कात्यायनी की अष्टधातु से बनी अलौकिक प्रतिमा है। देवी की चार भुजाएं हैं, जिनमें तलवार, कमल का पुष्प और अभय-वर मुद्राएं हैं।
पंचदेव मंदिर: यहाँ मां के साथ भगवान शिव, विष्णु, सूर्य और गणेश जी भी विराजमान हैं, जो इसे पूर्ण आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनाते हैं।
अधूरी मुराद और शीघ्र विवाह के लिए विशेष स्थान
लोक मान्यता है कि जो भी कुंवारे युवक या युवतियां विवाह में आ रही अड़चनों से परेशान हैं, वे यदि यहाँ आकर मां कात्यायनी के दर्शन कर मन्नत मांगते हैं, तो उनके शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। यहाँ की 'कात्यायनी पूजा' विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।