'शून्य का नहीं होता असर, अगली 30 गेंदों में ठोक सकता है शतक' वैभव सूर्यवंशी पर टीममेट का बड़ा दावा
लंदन ब्यूरो: भारतीय क्रिकेट के 15 वर्षीय उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी इन दिनों अपने आक्रामक खेल और जबर्दस्त तकनीक के कारण पूरी खेल दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं। सूर्यवंशी की बल्लेबाजी में महान सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग की झलक साफ दिखाई देती है। सहवाग की ही तरह, वैभव भी पिछले मैच की नाकामी का बोझ अपने सिर पर नहीं लेते। फिलहाल भारतीय टी20 टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर गए उनके साथी खिलाड़ी सूर्यांश शेडगे ने युवा ओपनर की मानसिकता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है।
'वह पिछली गेंद का बोझ नहीं रखता, मोमेंट में जीता है'
इंडिया 'ए' और मौजूदा टी20 टीम में वैभव सूर्यवंशी के साथी रहे सूर्यांश शेडगे ने 'जियोस्टार' को दिए इंटरव्यू में कहा, "वैभव सूर्यवंशी की सोच वाकई कमाल की है। वह बल्लेबाजी को एक खेल की तरह एंजॉय करते हैं और चीजों को कभी पेचीदा नहीं बनाते। उन्हें अपनी काबिलियत पर इतना अटूट भरोसा है कि अगर वह किसी मैच में शून्य (0) पर भी आउट हो जाएं, तो उसका असर अपने ऊपर नहीं होने देते। उनका आत्मविश्वास ऐसा है कि वह अगले ही मैच में सिर्फ 30 गेंदों पर शतक जड़ने का माद्दा रखते हैं।" सूर्यांश ने आगे कहा कि वैभव पूरी आजादी और बेखौफ अंदाज में 'प्रेजेंट मोमेंट' में जीते हैं, जो उन्हें बेहद खतरनाक बल्लेबाज बनाता है।
हर सेशन में 600 गेंदों का सामना, बचपन से मिली है खास ट्रेनिंग
वैभव सूर्यवंशी का यह निर्भीक माइंडसेट रातों-रात नहीं बना है, बल्कि इसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत और कड़ा अभ्यास है। उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने एक बातचीत में खुलासा किया कि वैभव को बहुत छोटी उम्र से ही आक्रामक शॉट खेलने के लिए तैयार किया गया था। कोच ने बताया, "वैभव अपने हर प्रैक्टिस सेशन में कम से कम 500 से 600 गेंदों का सामना करता था। अगर उसे अपना कट शॉट, पुल शॉट या लॉफ्टेड शॉट सुधारना होता था, तो वह लगातार तीन से चार घंटे तक सिर्फ उसी एक शॉट की प्रैक्टिस करता था। इस कठोर ट्रेनिंग से उसकी मसल मेमोरी और बैकलिफ्ट अद्भुत हो गई।"
10 साल की उम्र में ही रणजी और अंडर-23 बॉलर्स की उड़ाई धज्जियां
कोच मनीष ओझा के मुताबिक, वैभव की सबसे बड़ी ताकत सीनियर खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का उनका लंबा अनुभव है। उन्होंने बताया, "जब वैभव 10 साल का भी नहीं था, तब से वह नेट सेशन में अंडर-19, अंडर-23 और रणजी ट्रॉफी के सीनियर गेंदबाजों का सामना कर रहा था। हमने उसे कम उम्र में ही मैच सिमुलेशन (विभिन्न मैच परिस्थितियों) में डाल दिया था, जहां वह बड़े टारगेट का पीछा करता था या स्कोर डिफेंड करता था।" यही वजह है कि आज इंग्लैंड दौरे पर भले ही उन्हें कप्तान श्रेयस अय्यर और कोच गौतम गंभीर की देखरेख में डेब्यू का इंतजार हो, लेकिन उनके तेवरों से पूरी दुनिया वाकिफ हो चुकी है।