सावधान! राहु की महादशा कर रही है कंगाल? अगर कुंडली के इन भावों में है राहु, तो धारण करें यह एक रत्न, चमक जाएगी किस्मत
ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक मायावी और छाया ग्रह माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु अशुभ स्थिति में हो या उस पर राहु की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, तो उसे जीवन में अचानक धन हानि, मानसिक तनाव, बनते कामों में रुकावट और अज्ञात शत्रुओं का सामना करना पड़ता है। रत्न शास्त्र के अनुसार, राहु के इन नकारात्मक प्रभावों को कम करने और उसे बलवान बनाकर शुभ फल पाने के लिए 'गोमेद' (Hessonite) रत्न पहनने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं कि कुंडली के किस भाव में राहु होने पर गोमेद पहनना चाहिए, इसके क्या लाभ हैं और इसे धारण करने के कड़े नियम क्या हैं।
कुंडली के इन भावों में राहु होने पर जरूर पहनें गोमेद
ज्योतिष गणना के अनुसार, यदि आपकी कुंडली के केंद्र भावों यानी पहले (1st), चौथे (4th), सातवें (7th) और दसवें (10th) भाव में राहु बैठा है, तो राहु को शांत और मजबूत करने के लिए गोमेद रत्न धारण करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा यदि आप राहु की महादशा या अंतर्दशा से गुजर रहे हैं और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, तो यह रत्न आपके लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
गोमेद पहनने के बेमिसाल फायदे: वकालत और राजनीति में दिलाता है बंपर सफलता
राहु का यह चमत्कारी रत्न व्यक्ति के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव लेकर आता है:
अचानक धन लाभ: राहु के कारण होने वाली अचानक धन हानि को रोककर यह आपकी आर्थिक स्थिति (Financial Status) को मजबूत करता है और धन-संपत्ति में वृद्धि कराता है।
करियर और राजपक्ष में उन्नति: जो लोग वकालत (Law), राजनीति (Politics), या किसी बड़े सरकारी या प्रशासनिक पद से जुड़े हैं, उनके लिए गोमेद पहनना करियर में ऊंची उड़ान देने वाला माना गया है।
शत्रुओं का नाश और सुख-समृद्धि: यह रत्न आपके गुप्त शत्रुओं और विरोधियों को परास्त करने में मदद करता है। इसके प्रभाव से पारिवारिक सुख और संतान सुख में भी वृद्धि होती है।
असली और नकली गोमेद की पहचान कैसे करें?
बाजार में मिलने वाले नकली रत्नों से बचना बेहद जरूरी है। उत्तम श्रेणी का गोमेद साफ, भारी और चिकना होता है। इसका रंग गोमूत्र के समान हल्का पीला, कुछ लालिमा लिए हुए या श्याम वर्ण (डार्क) होता है।
असली गोमेद की जांच का घरेलू तरीका: गोमेद रत्न को कुछ देर के लिए असली गोमूत्र में भिगोकर रखें। यदि रत्न असली है, तो वह गोमूत्र का रंग बदल देगा।
गोमेद धारण करने की सही विधि, दिन और चमत्कारी मंत्र
गोमेद रत्न को धारण करने से पहले उसके शुद्धिकरण और सही समय का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है, अन्यथा इसके विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं:
सही धातु: गोमेद रत्न को हमेशा लोहे की अंगूठी में ही जड़वाकर पहनना चाहिए।
शुभ दिन और मुहूर्त: इसे किसी भी शनिवार के दिन शनि की होरा में पहनें। इसके अलावा स्वाती, शतभिषा, आर्द्रा नक्षत्र या फिर रविपुष्य योग में इसे धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है।
राहु का बीज मंत्र: अंगूठी पहनने से पहले राहु के विशेष बीज मंत्र "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः" का कम से कम 108 बार या अपनी श्रद्धा अनुसार जाप करें।
रत्न पहनने से पहले इन चीजों का दान करना है जरूरी
वास्तु और रत्न शास्त्र के अनुसार, गोमेद धारण करने से पहले बीज मंत्रों का पाठ, छोटा हवन और सूर्य भगवान को अर्घ्य देना चाहिए। इसके तुरंत बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को नीले रंग के वस्त्र, कंबल, काले तिल, बाजरा और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा दान करने के बाद ही अंगूठी को हाथ की उंगली में धारण करना चाहिए।
ध्यान दें: गोमेद कितने रत्ती (Weight) का पहनना चाहिए, इसके लिए अपनी कुंडली के अनुसार किसी योग्य ज्योतिषाचार्य या रत्न विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।