राजभर का अखिलेश यादव पर 'धुरंधर' स्टाइल में वार: अतीक के काले धन और रिवरफ्रंट घोटाले को जोड़कर कसा तंज
उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव और योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री व सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के बीच जुबानी तीर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर नियमित पोस्ट जारी रखते हुए इस बार अखिलेश यादव पर एक हालिया रिलीज फिल्म 'धुरंधर' के हवाले से बेहद तीखा और फिल्मी अंदाज में हमला बोला है।
राजभर ने साल 2016 में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी और माफिया अतीक अहमद के कनेक्शन को सीधे 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़ दिया है। राजभर का दावा है कि फिल्म 'धुरंधर' में दिखाई गई काल्पनिक कहानी हकीकत के बेहद करीब है।
नोटबंदी से बेकार हुआ अतीक अहमद का काला धन: राजभर का दावा
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि साल 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को फंडिंग करने के लिए माफिया अतीक अहमद ने काले धन का बड़ा इंतजाम किया था। लेकिन 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अचानक की गई नोटबंदी की वजह से अतीक का वह सारा काला धन कागज का टुकड़ा बनकर रह गया और बेकार हो गया। राजभर के मुताबिक, अतीक की तिजोरी बंद होने के कारण तत्कालीन सपा सरकार ने चुनाव का खर्च निकालने के लिए एक दूसरा रास्ता चुना।
गोमती रिवरफ्रंट का 40% पैसा सैफई परिवार की तिजोरी में गया
राजभर ने अतीक के मुद्दे को सीधे लखनऊ के चर्चित गोमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट से जोड़ते हुए एक बड़ा घोटाला होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया:
"अतीक अहमद का काला धन डूबने के बाद गोमती रिवरफ्रंट योजना के बजट को डायवर्ट किया गया। इस परियोजना का पूरा बजट पानी की तरह बहाने के बावजूद जमीन पर महज 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका। बाकी का 40 फीसदी पैसा सीधे तौर पर सैफई परिवार की निजी तिजोरी और 2017 के विधानसभा चुनाव के प्रचार में झोंक दिया गया।"
राजभर ने आगे तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को पूरा भरोसा था कि वे 2017 में दोबारा सत्ता में लौट आएंगे और इस हेराफेरी (चोरी) को फाइलों में दबा देंगे। लेकिन जनता ने उनके पाप का घड़ा फोड़ दिया और घोटालेबाजों की सरकार चुनाव हार गई, जिसके बाद सारे चिट्ठे बाहर आ गए। उन्होंने चेतावनी दी कि उनके पास पूरी फाइल मौजूद है और वे एक-एक कर सपा राज के भ्रष्ट कारनामों को उजागर करेंगे।
'धीरज रखें... जेल में न एसी मिलेगा, न ट्विटर और न पीसी'
सपा सुप्रीमो पर व्यक्तिगत हमला बोलते हुए राजभर ने ताना मारा कि अब केंद्रीय जांच एजेंसियां गोमती रिवरफ्रंट मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने के बेहद करीब हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि थोड़ा धीरज रखिए—क्योंकि बहुत जल्द जब कार्रवाई होगी, तो जेल के अंदर न तो आराम करने के लिए एसी (Air Conditioner) मिलेगा, न ट्वीट करने के लिए मोबाइल होगा और न ही मीडिया के सामने पीसी (प्रेस कॉन्फ्रेंस) करने का मौका मिलेगा।
क्या है 1500 करोड़ का गोमती रिवरफ्रंट घोटाला?
उत्तर प्रदेश में साल 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही गोमती रिवरफ्रंट परियोजना की जांच चल रही है, जिसमें अब तक सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी देश की शीर्ष एजेंसियां कई मुकदमे दर्ज कर चुकी हैं।
शुरुआत: अखिलेश यादव ने साल 2015 में लखनऊ में गोमती नदी के किनारों के सुंदरीकरण के लिए इस ड्रीम प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी, जिसके लिए 1600 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था।
जांच में खुलासा: योगी सरकार के आते ही जब इसकी जांच कराई गई, तो पता चला कि 1435 करोड़ रुपये खर्च हो जाने के बाद भी काम अधूरा था।
CBI की कड़ाई: यूपी पुलिस की एफआईआर के बाद केस सीबीआई को ट्रांसफर हुआ। सीबीआई ने फरवरी 2021 में कई वरिष्ठ इंजीनियरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद जुलाई 2021 में देश के 42 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए 189 सरकारी अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसकी जांच अब अपने अंतिम चरण में है।