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September 26 2026 09:50 pm

'कश्मीर नहीं, PoK पर बात करो': UN में भारतीय राजनयिक ने की पाकिस्तान की बोलती बंद

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर एक बार फिर भारत ने पाकिस्तान के झूठे और मनगढ़ंत प्रचार का ऐसा करारा जवाब दिया है कि इस्लामाबाद के हुक्मरानों के लिए चेहरा छिपाना मुश्किल हो गया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा वैश्विक मंच पर कश्मीर का पुराना राग अलापने और झूठे दावे करने के तुरंत बाद भारत ने अपने 'राइट टू रिप्लाई' (जवाब देने के अधिकार) का इस्तेमाल किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने वैश्विक बिरादरी के सामने पाकिस्तान के पाखंड और आतंकवाद के गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। भारतीय राजनयिक ने दो-टूक शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे। उन्होंने दुनिया को आईना दिखाते हुए कहा कि अगर कश्मीर के मुद्दे पर कोई चर्चा होनी ही है, तो वह पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) पर होनी चाहिए, जहां की जनता पर दशकों से बर्बर अत्याचार किए जा रहे हैं।

'दिन में अमन का ढोंग और रात में आतंकवाद': भारतीय राजनयिक का करारा प्रहार

महासभा में संबोधन के दौरान भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा कि जो देश आतंकवाद की पूरी वैल्यू चेन पर एकाधिकार रखता है, वह शांति और मानवाधिकारों का मसीहा बनने का ढोंग नहीं कर सकता। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा:

"वे दिन के उजाले में सुरक्षा और शांति की बात करते हैं और रात के अंधेरे में सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करते हैं। दुनिया अब उनके खोखले बयानों और पाखंड से अच्छी तरह वाकिफ हो चुकी है।"

गहलोत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि 9/11 आतंकी हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन दुनिया की नजरों से दूर नहीं, बल्कि पाकिस्तान की मुख्य सैन्य अकादमी के ठीक बगल में सुरक्षित पनाह पाकर रह रहा था। ऐसे देश को किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।

PoK की भयावह हकीकत: रावलकोट में निर्दोष नागरिकों पर बर्बरता का मुद्दा उठा

भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान में हो रहे भयानक मानवाधिकार उल्लंघनों पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को वाकई कश्मीर की चिंता है, तो उसे PoK के लोगों की बदहाली देखनी चाहिए।

गहलोत ने कहा:

"अगर हमें कश्मीर पर ही बात करनी है, तो आइए हम पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) पर ध्यान केंद्रित करें। रावलकोट और आसपास के इलाकों में निर्दोष, निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई अंधाधुंध हिंसा, हत्याओं और उनके बुनियादी अधिकारों के हनन के बारे में वहां की जनता से पूछिए।"

भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने दशकों से इस क्षेत्र पर अवैध कब्जा जमा रखा है और वहां के संसाधनों का दोहन करने के साथ-साथ स्थानीय आबादी की आवाज को बंदूकों के दम पर दबाया जा रहा है। भारत का एकमात्र अधूरा एजेंडा यह है कि पाकिस्तान इस अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्र को अविलंब खाली करे।

सेना की कठपुतली सरकार: 'Of the Army, By the Army, For the Army'

पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति पर कटाक्ष करते हुए भारतीय राजनयिक ने वहां की हुकूमत को सेना की बनाई कठपुतली सरकार करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस देश की राजधानी इस्लामाबाद को अपनी ही जनता के विरोध-प्रदर्शनों से बचाने के लिए कंटीले तारों और कंटेनरों से छावनी बना दिया गया हो, वह दूसरों को लोकतांत्रिक मूल्यों का पाठ पढ़ा रहा है।

गहलोत ने पाकिस्तान के 27वें संवैधानिक संशोधन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां असली सत्ता किसके हाथ में है और किसे आजीवन उन्मुक्ति दी जा रही है, यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सरकार जनता द्वारा चुनी हुई नहीं, बल्कि सेना द्वारा संचालित व्यवस्था है, जिसे स्थानीय लोग खुद 'फॉर्म 47 की सरकार' कहते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर की याद दिलाकर दी सख्त चेतावनी: आतंकवाद का मिलेगा माकूल जवाब

भारतीय राजनयिक ने साफ कर दिया कि भारत अब सीमा पार आतंकवाद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान को आगाह किया कि भारत ने यह साबित कर दिया है कि अपनी सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

गहलोत ने सख्त लहजे में चेतावनी दी:

"हमने दिखा दिया है कि आतंकियों के लिए छिपने की कोई जगह नहीं बचेगी। अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने में भारत कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाएगा। पाकिस्तान की तरफ से जारी आतंकवाद का अंजाम गंभीर होगा।"

भारत के इस आक्रामक और तथ्यपरक रुख ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को ध्वस्त कर दिया और यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, और चर्चा केवल PoK को खाली करने पर ही होगी।