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September 26 2026 09:50 pm

UN में पाक की हार को जीत बता रहे थे शहबाज शरीफ, भारतीय राजनयिक की छूटी हंसी; कैमरे में कैद हुआ रिएक्शन

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान एक बार फिर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। हर बार की तरह इस बार भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने वैश्विक मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ बेबुनियाद आरोप मढ़ने, कश्मीर राग अलापने और अपने मुल्क की कूटनीतिक नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए किया। हालांकि, उनके भाषण के दौरान हॉल में मौजूद भारतीय प्रतिनिधिमंडल की प्रतिक्रिया ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। जब शहबाज अपनी सरकार की स्पष्ट कूटनीतिक पराजय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने की स्थिति को अपनी 'शानदार कामयाबी' बता रहे थे, तब संयुक्त राष्ट्र में मौजूद भारतीय राजनयिक अपनी हंसी नहीं रोक पाईं। कैमरे में कैद हुआ यह भाव-भंगिमा और मुस्कुराता हुआ रिएक्शन अब सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।

शहबाज शरीफ का खोखला दावा और भारतीय राजनयिक की बेबाक मुस्कान

संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान शहबाज शरीफ ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नए मील के पत्थर गढ़े हैं और दुनिया उनके रुख की सराहना कर रही है। हकीकत से कोसों दूर इस दावे को सुनते ही हॉल में भारत की सीट पर मौजूद महिला राजनयिक ने जिस अंदाज में अपनी हंसी को दबाने की कोशिश की और फिर मुस्कुरा दीं, उसने शहबाज के पूरे भाषण की गंभीरता को शून्य कर दिया। राजनयिक का यह सहज रिएक्शन साफ बयां कर रहा था कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पाकिस्तान के इन रटे-रटाए बयानों और झूठे दावों को किस गंभीरता से लेती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर इस वीडियो क्लिप को लाखों लोग देख चुके हैं और नेटिजन्स इसे "एक मुस्कान में 1000 शब्दों का जवाब" करार दे रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की कूटनीतिक फजीहत की असल वजह

शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट, भारी विदेशी कर्ज और आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहा है। वैश्विक मंचों पर इस्लामाबाद आतंकवाद के वित्तपोषण, अल्पसंख्यकों के मानवाधिकार हनन और सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के आरोपों से लगातार घिरा हुआ है। जब भी पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद या महासभा में उठाने की कोशिश करता है, वैश्विक शक्तियां इसे द्विपक्षीय मसला बताकर खारिज कर देती हैं। इसके बावजूद घरेलू जनता को खुश करने के लिए अपनी लगातार होती कूटनीतिक पराजयों को 'सफल विदेश नीति' के रूप में पेश करने की पाकिस्तानी हुक्मरानों की पुरानी आदत रही है। भारतीय प्रतिनिधि की प्रतिक्रिया ने उसी विरोधाभास को उजागर कर दिया।

भारत का 'राइट टू रिप्लाई': मंच पर झूठ बोलने की आदत को लताड़ा

भाषण के बाद भारत ने अपने 'राइट टू रिप्लाई' (जवाब देने के अधिकार) का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के झूठे प्रचार की धज्जियां उड़ा दीं। भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक ऐसा देश जो वैश्विक स्तर पर आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह के रूप में कुख्यात है और जिसकी अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय बेलआउट पैकेजों पर टिकी है, उसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। भारत ने यह भी साफ किया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान को सलाह दी गई कि वह अपने कब्जे वाले अवैध भारतीय क्षेत्रों (POK) को तुरंत खाली करे और भारत के खिलाफ आतंकवाद को वित्तीय और साजोसामान की मदद देना बंद करे।

सोशल मीडिया पर भारतीय कूटनीति के शांत और करारे अंदाज की तारीफ

इंटरनेट पर वायरल हो रहे इस वीडियो पर दुनियाभर के उपयोगकर्ताओं की दिलचस्प प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। लोगों का कहना है कि भारतीय राजनयिकों को अब पाकिस्तान के अनर्गल प्रलाप पर गुस्सा होने की भी जरूरत महसूस नहीं होती, उनका एक व्यंग्यात्मक मुस्कुराना ही काफी होता है। रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की कूटनीतिक हैसियत वैश्विक मंचों पर इतनी ऊंची हो चुकी है कि पाकिस्तान के दुष्प्रचार का जवाब आक्रामकता से नहीं बल्कि आत्मविश्वास से भरी इसी तरह की प्रतिक्रियाओं से दिया जाता है। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि झूठ की बुनियाद पर टिके बयानों की अंतरराष्ट्रीय मंच पर क्या औकात रह जाती है।