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October 06 2026 10:53 pm

हरदीप पुरी का राज्यसभा टिकट कटा, बिना सांसद कब तक रह सकते हैं पेट्रोलियम मंत्री? जानें संविधान का नियम

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा उत्तर प्रदेश से आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए घोषित आठ उम्मीदवारों की सूची ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पार्टी ने इस बार अपने सभी मौजूदा सांसदों की जगह नए चेहरों को मौका देने की रणनीति अपनाई है, जिसके चलते केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा को दोबारा उच्च सदन का टिकट नहीं मिला है। उत्तर प्रदेश से सांसद हरदीप सिंह पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या सांसद न रहने की स्थिति में भी वे देश के पेट्रोलियम मंत्री पद पर बने रह सकते हैं और यदि हां, तो संविधान के तहत उनके पास कितना समय रहेगा?

क्या सांसद न होने पर भी कोई नेता मंत्री बना रह सकता है?

भारतीय संसदीय व्यवस्था और संविधान के प्रावधानों के तहत कोई भी नागरिक बिना किसी सदन का सदस्य हुए भी केंद्रीय या राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री नियुक्त हो सकता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 75(5) इस संबंध में बेहद स्पष्ट और कानूनी व्यवस्था तय करता है। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मंत्री बनता है और वह संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य नहीं है, तो वह लगातार छह महीने की अवधि तक अपने पद पर कार्य कर सकता है। हालांकि, इस छह महीने की तय सीमा के समाप्त होने से पहले उसे संसद के किसी एक सदन का निर्वाचित या मनोनीत सदस्य बनना अनिवार्य होता है। यदि वह निर्धारित 180 दिनों के भीतर संसद सदस्यता हासिल करने में विफल रहता है, तो छह महीने की मियाद पूरी होते ही उसका मंत्री पद स्वतः समाप्त हो जाता है।

हरदीप सिंह पुरी के मामले में कब शुरू होगी उल्टी गिनती?

संवैधानिक नियमों के अनुसार, हरदीप सिंह पुरी का मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 तक पूरी तरह सुरक्षित और वैध है। तब तक वे पूर्ण रूप से उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य हैं। छह महीने का संवैधानिक समय 25 नवंबर 2026 के बाद से गिना जाएगा, जब उनका कार्यकाल आधिकारिक रूप से समाप्त होगा। यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें मंत्रिमंडल में बनाए रखने का फैसला करते हैं, तो 25 नवंबर 2026 के बाद उनके पास संसद के किसी भी सदन में पहुंचने के लिए छह महीने यानी 25 मई 2027 तक का समय रहेगा।

क्या दोबारा वापसी के लिए केवल राज्यसभा का ही विकल्प है?

संविधान के अनुच्छेद 75(5) में यह कहीं भी अनिवार्य नहीं किया गया है कि किसी मंत्री को दोबारा उसी सदन में लौटना होगा, जहां से वह पहले था। शर्त सिर्फ इतनी है कि व्यक्ति छह महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों—लोकसभा या राज्यसभा—में से किसी एक का सदस्य बन जाए। इसलिए तकनीकी तौर पर हरदीप सिंह पुरी के सामने दोनों विकल्प खुले रहते हैं। हालांकि, वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में किसी अन्य राज्य की रिक्त सीट पर होने वाले उपचुनाव के जरिए उन्हें राज्यसभा भेजना या राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 विशिष्ट सदस्यों के कोटे में शामिल करना सबसे सुगम रास्ता माना जाता है।

क्या किसी दूसरे राज्य से संसद भेज सकती है भाजपा?

उत्तर प्रदेश की सूची में नाम न होने का मतलब यह कतई नहीं है कि हरदीप सिंह पुरी के लिए संसदीय रास्ते हमेशा के लिए बंद हो गए हैं। देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर खाली होने वाली राज्यसभा सीटों या उपचुनावों के माध्यम से पार्टी किसी भी नेता को उच्च सदन भेज सकती है। राजनीतिक इतिहास में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब प्रमुख नेताओं को उनके गृह राज्य के बजाय अन्य राज्यों से चुनकर संसद लाया गया। लेकिन यह पूरी तरह भाजपा के शीर्ष नेतृत्व, राजनीतिक समीकरणों और पार्टी संगठन के रणनीतिक फैसलों पर निर्भर करेगा कि वह पुरी के प्रशासनिक अनुभव को आगे किस रूप में उपयोग करना चाहती है।

कैबिनेट फेरबदल और मोदी 3.0 के नए समीकरण

हरदीप सिंह पुरी का नाम राज्यसभा सूची में शामिल न होने के बाद राजनीतिक हलकों में केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। पूर्व राजनयिक रहे हरदीप सिंह पुरी मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल से ही शहरी विकास, नागरिक उड्डयन और पेट्रोलियम जैसे भारी-भरकम और तकनीकी मंत्रालयों की जिम्मेदारी कुशलता से संभालते रहे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष के वैश्विक संकट के दौरान भारत के लिए रियायती दरों पर कच्चे तेल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने में उनके कूटनीतिक और प्रशासनिक अनुभव की सराहना की जाती रही है। ऐसे में यदि पार्टी उन्हें मंत्री पद से मुक्त करने का फैसला करती है, तो पेट्रोलियम जैसे संवेदनशील मंत्रालय का प्रभार किसी नए कद्दावर चेहरे को सौंपा जा सकता है।

राजनीतिक भविष्य और आगे की राह

उत्तर प्रदेश जैसे रणनीतिक राज्य में भाजपा द्वारा युवा और स्थानीय समीकरणों को प्राथमिकता देते हुए सभी नए चेहरों को आगे लाने से यह संकेत मिला है कि पार्टी भविष्य के विधानसभा और क्षेत्रीय चुनावों के मद्देनजर संगठनात्मक संतुलन साध रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 25 नवंबर को कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व हरदीप सिंह पुरी को किसी नए राज्य से उच्च सदन भेजने का रास्ता चुनते हैं, उन्हें बिना सांसद 6 महीने तक मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपे रखते हैं, या फिर उन्हें किसी अन्य महत्वपूर्ण संवैधानिक अथवा कूटनीतिक पद पर नई जिम्मेदारी दी जाती है।