राज्यसभा चुनाव के बाद मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल? 2 मंत्री पहले बाहर, 2 का अब कटा टिकट
भारतीय जनता पार्टी द्वारा राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए घोषित उम्मीदवारों की सूची ने देश के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश से पार्टी ने अपने सभी मौजूदा राज्यसभा सांसदों को बदलकर पूरी तरह नए चेहरों पर दांव लगाया है। इस अप्रत्याशित कदम के चलते मोदी सरकार के दो प्रमुख मंत्रियों—केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा—का टिकट कट गया है। चूंकि इससे पहले दो अन्य केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी उच्च सदन का कार्यकाल पूरा होने के बाद अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं, ऐसे में यह चर्चा चरम पर पहुंच गई है कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में बड़ा फेरबदल और विस्तार देखने को मिल सकता है।
2 मंत्री पहले ही बाहर, अब पुरी और वर्मा का भी रास्ता साफ?
मोदी सरकार में मंत्रियों के सदन सदस्य न रहने का सिलसिला कुछ महीने पहले शुरू हुआ था। पूर्व रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने जुलाई में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि जून में उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया था और पार्टी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन के लिए नामित नहीं किया था। इसी तरह केरल से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के चलते केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे चुके हैं।
अब नवंबर में हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा दोनों का ही 6 वर्षीय राज्यसभा कार्यकाल आधिकारिक रूप से पूरा हो रहा है। उत्तर प्रदेश से पार्टी द्वारा जारी 8 प्रत्याशियों की नई सूची में इन दोनों ही वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल नहीं हैं। इसका सीधा अर्थ यह निकाला जा रहा है कि सरकार में कुल 4 ऐसे मंत्री पद खाली होने या खाली होने की कगार पर हैं, जिनके चलते मंत्रिमंडल में नए चेहरों की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है।
4 नए मंत्रियों की एंट्री की तैयारी, किन राज्यों को मिल सकता है मौका?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चार मंत्रियों के बाहर होने के बाद कैबिनेट में खाली हुए स्थानों को भरने के लिए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कवायद शुरू हो चुकी है। रवनीत बिट्टू को पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की योजना है, जबकि केरल में भाजपा के एकमात्र ईसाई मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन को भी दक्षिण भारत के संगठनात्मक ढांचे में लगाया जा रहा है।
ऐसे में केंद्रीय मंत्रिमंडल में पंजाब, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का प्रतिनिधित्व संतुलित करने के लिए नए सांसदों या पार्टी के वफादार वरिष्ठ नेताओं को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों को भी मंत्रिपरिषद में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिल सकता है, ताकि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर चुनावी जमीन को मजबूत किया जा सके।
क्या 6 महीने तक मंत्री पद पर बने रह सकते हैं हरदीप पुरी?
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 75(5) किसी भी गैर-सांसद व्यक्ति को 6 महीने की अवधि के लिए मंत्री बने रहने की अनुमति देता है। हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा का मौजूदा कार्यकाल नवंबर के अंत तक सुरक्षित है। तकनीकी रूप से प्रधानमंत्री चाहें तो उनका इस्तीफा न लेकर उन्हें अगले छह महीने यानी मई तक पद पर बनाए रख सकते हैं, जिस दौरान किसी अन्य राज्य के उपचुनाव के जरिए उन्हें संसद भेजा जा सकता है।
हालांकि, जिस तरह पार्टी ने रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कुरियन के मामले में कार्यकाल खत्म होते ही इस्तीफा स्वीकार करने की नीति अपनाई थी, उसे देखते हुए यह माना जा रहा है कि हरदीप पुरी और बी.एल. वर्मा के कार्यकाल समाप्ति के साथ ही उनसे विभाग लेकर नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
संगठन बनाम सरकार: नए अध्यक्ष की टीम में मिल सकती है जिम्मेदारी
कैबिनेट फेरबदल की यह आहट पार्टी संगठन के भीतर हो रहे बड़े संरचनात्मक बदलावों से भी जुड़ी हुई है। हाल ही में भाजपा के केंद्रीय संगठन और राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम का विस्तार हुआ है। पार्टी की रणनीति हमेशा से यह रही है कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाले दिग्गज नेताओं को संगठन के चुनावी अभियानों और राज्यों के प्रभार में तैनात किया जाए। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भी संगठन में अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।
ऐसे में हरदीप सिंह पुरी के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रसूख और बी.एल. वर्मा की ओबीसी वर्ग पर मजबूत पकड़ का इस्तेमाल संगठन को धार देने के लिए किया जा सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सरकार से बाहर किए जा रहे नेताओं को दरकिनार नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण रणनीतिक भूमिकाएं दी जा सकती हैं।
उत्तर प्रदेश 2027 के चुनाव और सोशल इंजीनियरिंग का ताना-बाना
उत्तर प्रदेश से सभी 8 नए चेहरों को राज्यसभा भेजने का फैसला पूरी तरह 2027 के विधानसभा चुनावों के रोडमैप को ध्यान में रखकर लिया गया है। भाजपा ने इस बार जातिगत समीकरणों को बेहद बारीकी से साधा है—जिसमें तीन ओबीसी, दो दलित, दो ब्राह्मण और एक क्षत्रिय चेहरे को मैदान में उतारा गया है।
राज्यसभा में कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं को तरजीह देकर पार्टी कैडर में यह कड़ा संदेश दिया गया है कि अब केवल बड़े नामों के बजाय जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ताओं को ही सत्ता के शीर्ष पर पहुंचाया जाएगा। इसी सोशल इंजीनियरिंग के तहत अब कैबिनेट फेरबदल में भी उत्तर प्रदेश और अन्य चुनावी राज्यों के उन सामाजिक वर्गों को मंत्री पद दिया जा सकता है, जिनकी पकड़ मतदाताओं के बीच सबसे गहरी है।
कब तक हो सकता है औपचारिक ऐलान?
फिलहाल राज्यसभा की रिक्त सीटों पर नामांकन और मतदान की औपचारिक प्रक्रिया जारी है। चुनाव संपन्न होने और नए सदस्यों के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन से संपर्क कर मंत्रिपरिषद विस्तार की तारीख तय कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फेरबदल सिर्फ 4 खाली पदों को भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा रद्दोबदल हो सकता है। कुछ मंत्रियों के पास एक से अधिक भारी-भरकम विभाग हैं, जिन्हें हल्का करके नए राज्य मंत्रियों में बांटा जा सकता है, ताकि प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाई जा सके।