ममता बनर्जी नहीं हारतीं, तो भी बदलतीं पार्टी? BJP से राज्यसभा नामांकन के बाद कोयल मल्लिक से तीखा सवाल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में दलबदल और सियासी बयानबाजी के बीच टॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व टीएमसी सांसद कोयल मल्लिक की भारतीय जनता पार्टी में एंट्री ने राज्य का सियासी तापमान बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के कुछ ही महीनों बाद भाजपा ने कोयल मल्लिक को उसी राज्यसभा सीट के उपचुनाव में अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। सोमवार को कोलकाता में औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थामने और नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद संवाददाताओं ने उनसे सीधा और असहज करने वाला सवाल पूछ लिया—"अगर राज्य में सत्ता परिवर्तन नहीं होता और ममता बनर्जी नहीं हारतीं, तो क्या तब भी आप पार्टी बदलतीं?"
'इन सवालों के जवाब किसी और दिन'—सवाल टाल गईं कोयल मल्लिक
नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद जब पत्रकारों ने कोयल मल्लिक से पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल में सरकार न बदलने की स्थिति में भी वे तृणमूल कांग्रेस छोड़तीं, तो उन्होंने इस तीखे सवाल का सीधा उत्तर देने से परहेज किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि ऐसे तमाम सवालों के जवाब किसी और दिन के लिए सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज उनके वहां आने का मकसद पूरी तरह अलग है और वह इस नई जिम्मेदारी को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इसके साथ ही उन्होंने उच्च सदन में भेजने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय नेतृत्व और पश्चिम बंगाल के शीर्ष नेताओं का आभार व्यक्त किया।
101 दिनों में टीएमसी से दिया था इस्तीफा, अब उसी सीट से पर्चा भरा
बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रंजीत मल्लिक की बेटी कोयल मल्लिक को इसी साल तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा भेजा था। 6 अप्रैल को उन्होंने उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली थी, लेकिन किसी भी संसद सत्र में हिस्सा लिए बिना महज 101 दिनों के भीतर 16 जुलाई को उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था। अब 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा उसी सीट से मैदान में उतार दिया है। नामांकन के दौरान पश्चिम बंगाल के प्रमुख भाजपा नेता और प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य उनके साथ मजबूती से खड़े नजर आए।
सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों और ट्रोलिंग पर क्या बोलीं?
तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा के पाले में जाने को लेकर सोशल मीडिया और विपक्षी खेमे से हो रही तीखी बयानबाजी पर भी कोयल मल्लिक ने बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि जो लोग दल बदलने पर उनके खिलाफ अभद्र या नकारात्मक टिप्पणियां कर रहे हैं, वे शायद अपनी निजी परेशानियों और कुंठा के चलते ऐसा व्यवहार कर रहे हैं, इसलिए उन्हें किसी से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत और कटुता की सबसे बड़ी वजह यह है कि लोगों के पास सार्थक काम की कमी है।
'हम कोई बैंड पार्टी नहीं': भाजपा ने किया फैसले का पुरजोर बचाव
तृणमूल कांग्रेस द्वारा कोयल मल्लिक पर 'विश्वासघात' का आरोप लगाए जाने और भाजपा के 'तृणमूलीकरण' के दावों पर भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने कड़ा पलटवार किया। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा कोई भजन मंडली या बैंड पार्टी नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार राजनीतिक पार्टी है जिसे संसद में जनहित के विधेयक पारित कराने और देश चलाने के लिए जरूरी संख्या बल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि राजनीति में सब कुछ खुले तौर पर हो रहा है और पार्टी का कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है।
टीएमसी के राज्यसभा कुनबे में लगातार सेंधमारी
कोयल मल्लिक अकेली ऐसी नेता नहीं हैं जिन्होंने टीएमसी का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देब और प्रकाश चिक बराइक भी तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर उच्च सदन में वापसी कर चुके हैं। इन लगातार इस्तीफों के चलते राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 13 से घटकर 9 रह गई है। विधानसभा में बदले हुए संख्या बल को देखते हुए 16 अक्टूबर को होने वाले इस उपचुनाव में कोयल मल्लिक की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जिससे बंगाल की राजनीति में नए समीकरण उभर रहे हैं।