140 साल का रिकॉर्ड तोड़ेगा 'सुपर अल नीनो'! जानें भारत के मॉनसून और आपकी जेब पर क्या होगा असर

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India News Live,Digital Desk : दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चेतावनी जारी की है, जिसने सरकारों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। इस साल 'सुपर अल नीनो' (Super El Niño) का खतरा मंडरा रहा है, जिसके कारण गर्मी अपने पिछले 140 सालों के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। यह केवल एक मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि एक 'ग्लोबल क्लाइमेट इमरजेंसी' जैसी स्थिति है। आखिर क्या है यह सुपर अल नीनो और यह इस बार इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है? आइए विस्तार से समझते हैं।

क्या है अल नीनो और 'सुपर' अल नीनो?

आसान भाषा में समझें तो अल नीनो प्रशांत महासागर में होने वाली एक हलचल है। सामान्य स्थिति में समुद्र का गर्म पानी एशिया की तरफ रहता है, लेकिन अल नीनो के दौरान यह गर्म पानी दक्षिण अमेरिका की तरफ बहने लगता है। इससे समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी बढ़ जाता है।

जब यह तापमान वृद्धि 1.5°C से 2°C या उससे भी ज्यादा हो जाती है, तो इसे 'सुपर अल नीनो' कहा जाता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार प्रशांत महासागर के 'नीनो 3.4' क्षेत्र में तापमान में भारी बढ़ोतरी होने वाली है, जो 1950 के बाद अब तक की सबसे उग्र घटना साबित हो सकती है।

140 साल का रिकॉर्ड क्यों टूटेगा?

न्यूयॉर्क की स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल राउंडी और अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार धरती पर 'डबल अटैक' होने वाला है। एक तरफ ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी पहले से ही गर्म है, और दूसरी तरफ 'सुपर अल नीनो' इस गर्मी को कई गुना बढ़ा देगा। यह जुगलबंदी पिछले 140 वर्षों के दर्ज तापमान के आंकड़ों को पीछे छोड़ सकती है। इससे पहले 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में भी मजबूत अल नीनो देखा गया था, लेकिन इस बार का पूर्वानुमान कहीं अधिक डरावना है।

भारत पर होने वाले 3 सबसे बड़े असर

1. मॉनसून पर 'ब्रेक' और सूखे का खतरा:

भारत की खेती और अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर मॉनसून पर निर्भर है। अल नीनो और भारतीय मॉनसून का 'दुश्मनी' का रिश्ता है। जब भी अल नीनो मजबूत होता है, भारत में बारिश कम होती है। इस साल उत्तर और मध्य भारत में सूखे जैसे हालात पैदा होने की गहरी आशंका है।

2. जानलेवा हीटवेव (भीषण लू):

सुपर अल नीनो के कारण उत्तर भारत में दिन का तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर रह सकता है। लू का दौर न केवल लंबा चलेगा, बल्कि यह पहले के मुकाबले ज्यादा जानलेवा भी हो सकता है। शहरों में 'हीट आइलैंड' का असर बढ़ेगा, जिससे रातें भी गर्म रहेंगी।

3. महंगाई और अनाज का संकट:

बारिश कम होने से धान, गन्ना और मक्का जैसी फसलों की पैदावार गिर सकती है। जब पैदावार कम होगी, तो खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे आपकी रसोई का बजट बिगड़ सकता है। इसके अलावा, नदियों और बांधों में पानी का स्तर घटने से जल संकट भी गहरा सकता है।

दुनिया भर में दिखेगा तांडव

अल नीनो का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा। इसके कारण:

दक्षिण अमेरिका: यहां विनाशकारी बारिश और बाढ़ आने की संभावना है।

ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया: इन देशों में भयंकर सूखा पड़ सकता है और जंगलों में आग (Wildfires) की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

समुद्री जीवन: समुद्र का तापमान बढ़ने से मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर भी अस्तित्व का संकट आ सकता है।