भारत-नेपाल रिश्तों में ठहराव: विदेश मंत्री शिशिर खनाल का भारत दौरा स्थगित, सीमा विवाद और प्रोटोकॉल बने कारण
India News Live,Digital Desk : नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल का प्रस्तावित भारत दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। यह दौरा न केवल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ताओं के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि इससे पीएम बालेन शाह के संभावित भारत दौरे की नींव भी रखी जानी थी। इस स्थगन के पीछे 'इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस' (IBCA) शिखर सम्मेलन का टलना एक तात्कालिक कारण माना जा रहा है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में सीमा विवाद और प्रशासनिक प्रोटोकॉल से जुड़े मुद्दों को मुख्य वजह बताया जा रहा है।
दौरा स्थगित होने के पीछे 3 बड़े कारण
हालिया घटनाक्रमों और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत और नेपाल के बीच हाल ही में उपजे तनाव के पीछे तीन प्रमुख कारक हैं:
लिपुलेख और सीमा विवाद पर नेपाल का रुख: नेपाली विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कैलाश मानसरोवर यात्रा के रूट (लिपुलेख दर्रा) को लेकर भारत और चीन दोनों के प्रति कड़ा विरोध दर्ज कराया है। नेपाल लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपना संप्रभु हिस्सा बताता है, और इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने से कूटनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है।
पीएम बालेन शाह का सख्त प्रोटोकॉल: नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह अपनी 'राष्ट्रवादी' छवि और कड़े प्रोटोकॉल के लिए चर्चा में हैं। खबरों के अनुसार, उन्होंने विदेश मंत्री के पद से नीचे के किसी भी विदेशी अधिकारी (जैसे भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री) से मिलने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते मिस्री का नेपाल दौरा भी रद्द करना पड़ा।
सीमा पर नई कस्टम ड्यूटी: नेपाल सरकार द्वारा भारत-नेपाल सीमा पर हाल ही में लगाई गई नई कस्टम ड्यूटी ने सीमावर्ती व्यापार और स्थानीय लोगों की आजीविका को प्रभावित किया है। इस एकतरफा निर्णय पर नई दिल्ली ने अपनी चिंता जाहिर की थी, जिसे रिश्तों में 'अड़चन' के रूप में देखा जा रहा है।
क्या अब भी पटरी पर आ सकते हैं रिश्ते?
भले ही हालिया उच्च-स्तरीय बैठकें टली हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर अनौपचारिक बातचीत जारी है। पूर्व राजदूत विजय कांत कर्ण जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने के लिए प्रधानमंत्रियों के बीच सीधी बातचीत ही एकमात्र समाधान है।
द्विपक्षीय एजेंडा जो अभी भी चर्चा का इंतजार कर रहे हैं:
रेलवे और हवाई कनेक्टिविटी: अयोध्या-जनकपुर रेलवे प्रोजेक्ट और पोखरा-भैरहवा हवाई अड्डों के लिए अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्गों पर सहमति।
ऊर्जा और व्यापार: पेट्रोलियम पाइपलाइन का विस्तार, चीनी निर्यात पर लगे प्रतिबंधों की समीक्षा और नेपाल के साथ पेट्रोलियम उत्पादों का सुचारू व्यापार।
क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट: दोनों देशों के बीच क्यूआर (QR) आधारित भुगतान प्रणाली को पूरी तरह से क्रियाशील करना, ताकि आम नागरिकों को सुविधा हो।
क्या है आगे की राह?
नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद भारत ने सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन अब धीरे-धीरे कूटनीतिक उत्साह में कमी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि गेंद अब नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह के पाले में है। उन्हें कूटनीतिक लचीलापन दिखाते हुए आगे बढ़कर संवाद शुरू करने की जरूरत है, ताकि द्विपक्षीय संबंधों में मौजूद गलतफहमियों को दूर किया जा सके।