15 साल पुराने मामले में सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने कोर्ट में किया सरेंडर, गैर-जमानती वारंट के बाद मची थी हलचल

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India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने 15 साल पुराने एक मामले में बुधवार को अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) के बाद से ही इस मामले ने तूल पकड़ लिया था। गुपचुप तरीके से कोर्ट पहुंचे सांसद को पहले न्यायिक हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में वकीलों की दलीलों के बाद अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।

क्या था पूरा मामला और क्यों जारी हुआ था वारंट?

यह घटना 16 मार्च 2011 की है, जब प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सरकार थी। उस समय विधानसभा चुनाव की तैयारी के दौरान तुर्कमान गेट स्थित सामियाना प्लाजा में एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें सपा सांसद रामजीलाल सुमन बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने वाले थे। हालांकि, ऐन वक्त पर स्थानीय प्रशासन ने बैठक की अनुमति देने से इनकार कर दिया और मौके पर ताला जड़ दिया था। आरोप है कि सांसद और उनके समर्थकों ने प्रशासनिक आदेशों को दरकिनार कर जबरन ताला तोड़ा और वहां बैठक की। इस दौरान मारपीट, गाली-गलौज और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में सांसद समेत 4 नामजद और 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। लंबे समय से कोर्ट में हाजिर न होने के कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे।

अदालत में क्या हुआ?

सांसद रामजीलाल सुमन ने कड़ी सुरक्षा के बीच एसीजेएम फर्स्ट की अदालत में आत्मसमर्पण की अर्जी पेश की। चूंकि मामला सांसद से जुड़ा था, इसलिए पत्रावली को एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट (एसीजेएम सेकेंड) के पास ट्रांसफर कर दिया गया। विशेष अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच लगभग आधे घंटे तक लंबी बहस हुई, जिसके बाद अदालत ने सांसद की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। अब इस पुराने मामले में अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 27 जून की तारीख मुकर्रर की है।