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September 04 2026 06:40 am

नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए फिर 'मसीहा' बने सोनू सूद: पड़ोसी मुल्क में राहत सामग्री और जीवनरक्षक दवाओं की भेजी बड़ी खेप

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पड़ोसी देश नेपाल में कुदरत के अप्रत्याशित कहर, मूसलाधार मानसूनी बारिश और विनाशकारी बाढ़-भूस्खलन के चलते लाखों जिंदगियां गहरे संकट में घिर गई हैं। काठमांडू घाटी से लेकर तराई के मैदानी इलाकों तक नदियां उफान पर हैं, सैकड़ों घर जमींदोज हो चुके हैं और हजारों परिवार खुले आसमान के नीचे बेबस व लाचार बैठे हैं। इस विकट मानवीय त्रासदी के बीच हमेशा संकटमोचक बनकर उभरने वाले बॉलीवुड अभिनेता और समाजसेवक सोनू सूद एक बार फिर वास्तविक जीवन के 'सुपरहीरो' बनकर सामने आए हैं। 'सोनू सूद चैरिटी फाउंडेशन' के माध्यम से अभिनेता ने नेपाल के सबसे ज्यादा प्रभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सूखा राशन, पीने का स्वच्छ पानी, तिरपाल, वाटरप्रूफ टेंट, एंटी-वेनम और जरूरी जीवनरक्षक दवाइयों की बड़ी खेप रवाना की है।

इस विशाल मानवीय मिशन को धरातल पर उतारने के साथ ही सोनू सूद ने एक बड़ा बयान देकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अभिनेता ने नेपाल में चलाए जा रहे इस सहायता अभियान की सफलता और प्रेरणा का पूरा श्रेय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। सोनू सूद ने कहा कि भारत सरकार की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighborhood First) की कूटनीतिक नीति और प्रधानमंत्री मोदी के 'वसुधैव कुटुंबकम' के अटूट संकल्प ने ही उन्हें हमेशा यह सिखाया है कि जब भी किसी पड़ोसी पर विपत्ति आए, तो एक सच्चे भाई की तरह सबसे पहले उसकी ढाल बनकर खड़ा होना चाहिए। अभिनेता का यह कदम न केवल भारत और नेपाल के सदियों पुराने रोटी-बेटी के सांस्कृतिक रिश्तों को प्रगाढ़ कर रहा है, बल्कि आपदा के इस काले दौर में बेसहारा नेपाली नागरिकों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरा है।

नेपाल में जलप्रलय और तबाही का मंजर: जब सोनू सूद फाउंडेशन ने संभाला मोर्चा

पिछले कई दिनों से हिमालयी राष्ट्र नेपाल में हो रही रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बागमती, कोशी, नारायणी और गंडक जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर बह रही हैं, जिससे काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर, काभ्रेपलांचोक और तराई के कई जिले जलमग्न हो चुके हैं। राजमार्गों पर विशाल भूस्खलन होने से दर्जनों गाड़ियां मलबे में दब गईं और देश के कई हिस्सों का संपर्क पूरी तरह कट गया। इस आपदा में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों ग्रामीण अपने मवेशियों और आशियानों को खोकर दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।

स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों के हाथ-पांव फूलते देख सोनू सूद की टीम ने जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाला। अभिनेता ने बिना किसी औपचारिकता में समय गंवाए स्थानीय नेपाली स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और रेडक्रॉस की इकाइयों के साथ मिलकर एक 24 घंटे सक्रिय रहने वाला 'इमरजेंसी रिस्पांस नेटवर्क' स्थापित किया। प्रभावित क्षेत्रों से मिल रही प्राथमिक सूचनाओं के आधार पर राशन के सूखे पैकेट्स (आटा, दाल, चावल, तेल, बिस्कुट, मिल्क पाउडर), वाटर प्यूरीफायर टेबलेट्स, ओआरएस के पैकेट्स, अस्थायी शेल्टर के लिए तिरपाल और बच्चों व बुजुर्गों के लिए गर्म कपड़ों से भरे ट्रकों को रवाना किया गया। नेपाल के सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में जहां गाड़ियां नहीं पहुंच पा रही थीं, वहां सोनू सूद के वॉलंटियर्स पैदल पीठ पर राहत सामग्री लादकर पीड़ितों तक पहुंचाने में जुटे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया मदद का श्रेय: 'संकट में सीमाएं कभी दीवार नहीं बन सकतीं'

नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के बाद दिए गए अपने आधिकारिक बयान में सोनू सूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा की। सोनू सूद ने कहा, "जब भी हमारे पड़ोस में या दुनिया के किसी भी कोने में इंसानियत कराहती है, तो भारत कभी अपनी आंखें नहीं फेरता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हमेशा दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत केवल अपने नागरिकों के कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारा देश संकट के समय पूरे विश्व का संबल बनने की क्षमता रखता है। 2015 के नेपाल भूकंप के समय भारत द्वारा चलाया गया 'ऑपरेशन मैत्री' आज भी दुनिया के आपदा प्रबंधन इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। पीएम मोदी की वही मानवीय संवेदना और कार्यशैली मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी है।"

अभिनेता ने आगे स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार इतनी बड़ी तादाद में राहत सामग्री, एम्बुलेंस सहायता और मेडिकल इक्विपमेंट्स को बिना किसी लालफीताशाही के तेजी से पहुंचाने में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और सीमा शुल्क अधिकारियों का अभूतपूर्व सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के उस विजन के कारण ही यह संभव हो सका, जिसमें आपदा के समय पड़ोसी मुल्कों के साथ समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। सोनू सूद ने कहा कि भारत और नेपाल का संबंध केवल दो देशों की भौगोलिक सीमाओं का नहीं है, यह सांझी संस्कृति, देवभूमि और आत्मिक बंधनों का अटूट रिश्ता है। ऐसे में यदि हम अपने पड़ोसियों के आंसुओं को पोंछने के लिए आगे नहीं आएंगे, तो हमारा सामर्थ्य व्यर्थ है।

यूपी-नेपाल सीमा से राहत का ग्रीन कॉरिडोर: पूर्वांचल के रास्ते पहुंचीं जीवनरक्षक सामग्रियां

इस समूचे राहत अभियान का केंद्र बिंदु उत्तर प्रदेश की खुली सीमाएं बनीं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे जनपदों का नेपाल के साथ सीधा भौगोलिक जुड़ाव है। सोनू सूद फाउंडेशन की ओर से दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से जुटाई गई राहत सामग्री के बड़े-बड़े ट्रकों को महाराजगंज स्थित सोनौली बॉर्डर और सिद्धार्थनगर के बढ़नी बॉर्डर के रास्ते नेपाल सीमा में दाखिल कराया गया।

सोनौली बॉर्डर पर उत्तर प्रदेश पुलिस, सशस्त्र सीमा बल (SSB) और कस्टम विभाग के अधिकारियों ने मानवीय आधार पर तत्परता दिखाते हुए इन राहत वाहनों को बिना किसी अनावश्यक देरी के ग्रीन कॉरिडोर बनाकर नेपाल के रूपंदेही और भैरहवा जिले की ओर रवाना किया। सोनौली और रक्सौल के रास्ते दवाओं और सर्जिकल सामानों की पहली खेप काठमांडू और काभ्रे के उन अस्पतालों में पहुंचाई गई, जहां बाढ़ पीड़ितों के लिए एंटी-बायोटिक्स, पेनकिलर्स और टिटनेस के टीकों का भारी टोटा पड़ गया था। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के युवा कार्यकर्ताओं ने भी अभिनेता के इस आह्वान पर आगे बढ़कर बॉर्डर पर राहत सामग्री की अनलोडिंग और री-पैकेजिंग में दिन-रात एक कर दिया।

कोरोना काल से जारी है 'मसीहा' का सफर: सरहदों से परे इंसानियत का पैगाम

यह पहला मौका नहीं है जब 51 वर्षीय अभिनेता सोनू सूद ने किसी प्राकृतिक या मानवीय आपदा के समय अपनी पूरी ताकत झोंक दी हो। साल 2020 में कोरोना महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान जब लाखों प्रवासी मजदूर मुंबई की सड़कों पर पैदल अपने घर लौटने को मजबूर थे, तब सोनू सूद ने हजारों बसों, ट्रेनों और यहां तक कि चार्टर्ड उड़ानों की व्यवस्था कर मजदूरों को उनके घर पहुंचाया था। इसके बाद ऑक्सीजन सिलेंडरों की किल्लत हो, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान बंकरों में फंसे भारतीय मेडिकल छात्रों को पोलैंड और रोमानिया के रास्ते सुरक्षित स्वदेश वापस लाना हो, या फिर तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप के समय मेडिकल राहत भेजना—सोनू सूद हर बार व्यवस्था से आगे निकलकर एक व्यक्ति-संस्था के रूप में खड़े नजर आए।

सोनू सूद द्वारा नेपाल बाढ़ पीड़ितों की मदद करने और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए जाने के बाद नेपाल की जनता, सोशल मीडिया यूजर्स और वहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अभिनेता और भारत सरकार का आभार जताया है। काठमांडू और पोखरा के युवाओं ने सोशल मीडिया पर 'थैंक यू सोनू सूद' और 'थैंक यू इंडिया' के संदेशों के साथ तस्वीरें साझा की हैं। अभिनेता ने अपने प्रशंसकों और देश के संपन्न नागरिकों से भी अपील की है कि वे इस कठिन घड़ी में नेपाल के जरूरतमंदों के लिए खुलकर हाथ बढ़ाएं। सोनू सूद का यह अभियान एक बार फिर साबित करता है कि जब निस्वार्थ सेवा का संकल्प मजबूत हो और उसे देश के शीर्ष नेतृत्व के विजन का नैतिक समर्थन प्राप्त हो, तो कठिन से कठिन बाधाएं भी रास्ता छोड़ देती हैं।