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August 19 2026 02:19 pm

डेन्यूब नदी से मिला द्वितीय विश्व युद्ध का 700 किलो वजनी खतरनाक बम, स्लोवाकिया के विशेषज्ञों ने किया सफलतापूर्वक नष्ट

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स्लोवाकिया से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है, जहां बम निरोधक टीमों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौर के अब तक के सबसे बड़े और बिना फटे विस्फोटक को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। यह लगभग 700 किलोग्राम वजनी ब्रिटिश हवाई समुद्री माइन (Sea Mine) सूखे की वजह से जलस्तर घटने के बाद डेन्यूब नदी (Danube River) के तल में दिखाई दी थी। इस खतरनाक बम के मिलने के बाद से स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया था, जिसे अब पूरी सावधानी के साथ एक नियंत्रित विस्फोट के जरिए निष्क्रिय कर दिया गया है।

ऐसे हुई बम की खोज और लागू किए गए कड़े सुरक्षा उपाय

जानकारी के मुताबिक, गत रविवार, 2 अगस्त को स्लोवाकिया के कोमारनो जिले में एक स्थानीय व्यक्ति को डेन्यूब नदी के सूखे हिस्से में यह विशालकाय समुद्री माइन नजर आई थी। बिना समय गंवाए उस युवक ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।हतियात के तौर पर डेन्यूब नदी के उस हिस्से में जहाजों और नावों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य यूरोप में पड़ी भीषण गर्मी और सूखे के चलते नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिसके कारण दशकों पुरानी युद्धकालीन सामग्रियां अब पानी से बाहर निकलकर सामने आ रही हैं।

'ऑपरेशन गार्डनिंग' के तहत 1944 में गिराया गया था यह बम

इतिहास और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह बम ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स का साल 1944 का एक हवाई समुद्री माइन है। इसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 'ऑपरेशन गार्डनिंग' के तहत डेन्यूब नदी में तैनात किया गया था। इस गुप्त अभियान का मुख्य उद्देश्य नदी के रास्ते जर्मन और हंगेरियन सैनिकों तक हथियारों और रसद की आपूर्ति को रोकना था। इन माइन को पैराशूट के जरिए गिराया जाता था और यह नदी की तलहटी में बैठकर गुजरने वाले जहाजों के चुम्बकीय या भौतिक संकेतों से एक्टिव हो जाती थीं। दशकों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद इसका डेटोनेशन सिस्टम बेहद खतरनाक बना हुआ था।

सुरक्षित स्थान पर ले जाकर किया गया नियंत्रित विस्फोट

स्लोवाकिया के बम निरोधक विशेषज्ञों ने इस अत्यंत खतरनाक बम को बेहद सावधानी के साथ रेत की मोटी परत वाले एक विशेष फायर ट्रक पर लादा और उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद इसे लगभग पांच मीटर गहरे गड्ढे में स्थापित किया गया। कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और एहतियाती उपायों के बीच एक नियंत्रित विस्फोट (Controlled Detonation) करके इस 700 किलो के बम को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध को समाप्त हुए भले ही 80 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी ऐसे बमों के भीतर मौजूद जटिल डेटोनेशन सिस्टम पानी, कीचड़ या मिट्टी में दशकों तक बंद रहने के बाद भी अस्थिर और जानलेवा बने रहते हैं।