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May 14 2026 09:28 pm

मोदी-शाह की रणनीति के मुरीद हुए शशि थरूर, बोले- 'बंगाल-असम की जीत से दूसरी पार्टियों को बहुत कुछ सीखना चाहिए

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India News Live, Digital Desk : पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शानदार प्रदर्शन ने न केवल राजनीतिक पंडितों को चौंकाया है, बल्कि विपक्षी खेमे में भी आत्ममंथन की लहर पैदा कर दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने मोदी-शाह की जोड़ी और भाजपा की चुनावी मशीनरी की खुले दिल से प्रशंसा की है। थरूर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा ने बंगाल में ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को खत्म कर इतिहास रच दिया है।

'अथक परिश्रम और चुनावी प्रबंधन' के कायल हुए थरूर

शशि थरूर ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भाजपा की जीत को केवल संयोग नहीं माना जा सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कार्यशैली पर चर्चा करते हुए कहा:

चुनावी मशीनरी: "भाजपा ने एक ऐसी चुनावी मशीनरी तैयार की है जो 24x7 सक्रिय रहती है। विपक्षी दलों को यह सीखना होगा कि चुनाव केवल मतदान से कुछ दिन पहले नहीं, बल्कि पांच साल तक लगातार काम करके जीते जाते हैं।"

असम में हैट्रिक: असम में भाजपा की लगातार तीसरी जीत पर उन्होंने कहा कि "सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency)" के बावजूद दोबारा सत्ता में आना पार्टी के मजबूत जमीनी प्रबंधन को दर्शाता है।

बंगाल में बदलाव: बंगाल में भाजपा की दो-तिहाई बहुमत की जीत को उन्होंने 'अभूतपूर्व' बताया और कहा कि अन्य राजनीतिक दलों को भाजपा की रणनीतिक योजना (Strategic Planning) का अध्ययन करना चाहिए।

विपक्ष के लिए थरूर की 'नसीहत'

थरूर ने स्पष्ट रूप से अपनी ही पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों को चेतावनी दी कि यदि वे भाजपा के इस 'अजेय रथ' को रोकना चाहते हैं, तो उन्हें पुराने ढर्रे से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा कि "हम भाजपा की विचारधारा से असहमत हो सकते हैं, लेकिन उनकी मेहनत और संगठनात्मक क्षमता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।" थरूर के अनुसार, भाजपा का ध्यान माइक्रो-लेवल मैनेजमेंट और कार्यकर्ताओं के मनोबल को ऊंचा रखने पर रहता है, जो उनकी जीत का असली राज है।

बयान के राजनीतिक मायने

कांग्रेस नेता का यह बयान पार्टी के भीतर और बाहर नई बहस छेड़ सकता है। अक्सर भाजपा की नीतियों की तीखी आलोचना करने वाले थरूर का यह 'सॉफ्ट स्टैंड' यह दर्शाता है कि विपक्ष के भीतर अब इस बात को लेकर गंभीरता बढ़ रही है कि भाजपा की चुनावी रणनीति का मुकाबला कैसे किया जाए। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि थरूर का यह बयान भाजपा की प्रशंसा से ज्यादा, विपक्ष के लिए एक 'वेक-अप कॉल' (Wake-up call) है।