Sharadiya Navratri 2025 : कन्या पूजन का महत्व और विधि
- by Priyanka Tiwari
- 2025-09-25 17:21:00
India News Live,Digital Desk : शारदीय नवरात्रि 2025 22 सितंबर से शुरू होकर 1 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। नवरात्रि के अंतिम दिन यानी कन्या पूजन का खास महत्व है। कुछ लोग अष्टमी तिथि को कन्याओं की पूजा करते हैं, वहीं कई नवमी तिथि को भी यह पावन अनुष्ठान करते हैं। आइए जानते हैं कन्या पूजन का महत्व और इसे करने की सही विधि।
कन्या पूजन का महत्व
कन्या पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भक्ति, सेवा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। ऐसा माना जाता है कि हर कन्या में देवी दुर्गा का रूप विद्यमान होता है। इसलिए उनकी पूजा करना घर और जीवन में शांति, सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाली लाता है।
इस दिन कन्याओं का सम्मान करने से हमें करुणा, सेवा भावना और नैतिक मूल्यों की सीख मिलती है। साथ ही यह अनुष्ठान जीवन में ज्ञान, सद्गुण और आशीर्वाद प्राप्त करने का मार्ग भी खोलता है।
कन्या पूजन कब करें
अष्टमी तिथि: नवरात्रि का आठवां दिन, देवी दुर्गा के त्याग और साहस का प्रतीक है।
नवमी तिथि: नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इसे शक्ति साधना का अंतिम चरण माना जाता है।
दोनों दिन कन्याओं की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वरीय कृपा बनी रहती है।
कन्या पूजन की विधि
1. सुबह की तैयारी
पूजा स्थल को साफ और पवित्र करें।
रंग-बिरंगे और साफ कपड़े पहनें।
कन्याओं के लिए मिठाई, हलवा, पूरी, काले चने आदि प्रसाद तैयार करें।
2. कन्याओं का स्वागत
आमंत्रित कन्याओं के चरण शुद्ध जल से धोकर उन्हें आदरपूर्वक बैठाएँ।
उन्हें सुंदर वस्त्र और उपहार दें।
प्रसाद भेंट करें और पूजा के दौरान उनका समान और आदर बनाए रखें।
3. आशीर्वाद और विदाई
पूजा के अंत में कन्याओं से आशीर्वाद लें।
देवी दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।
सभी कन्याओं को सम्मान और उपहार देकर ससम्मान विदा करें।