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September 07 2026 04:13 pm

सभी कर्मियों का सर्विस रिकॉर्ड होगा ऑनलाइन, योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक सुधार

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उत्तर प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने और प्रशासनिक मशीनरी को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार ने एक ऐतिहासिक प्रशासनिक सुधार को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सभी विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों के सेवा अभिलेखों (Service Records) को अब पूरी तरह ऑनलाइन और डिजिटल किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब प्रदेश में जाली डिग्रियों, फर्जी जाति प्रमाण पत्रों या किसी अन्य के नाम पर सरकारी नौकरी हथियाने जैसे घोटालों पर हमेशा के लिए ताला लग जाएगा। सरकार के इस कदम से न केवल कर्मचारियों का पूरा सेवा इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध होगा, बल्कि फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले गिरोहों की जड़ें पूरी तरह उखड़ जाएंगी।

'मानव संपदा पोर्टल' पर दर्ज होगा हर कर्मचारी का डिजिटल कच्चा-चिट्ठा

कार्मिक विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सभी विभागों, स्वायत्तशासी संस्थाओं, निगमों और परिषदों में कार्यरत कर्मचारियों की पारंपरिक कागजी 'सर्विस बुक' की जगह अब ई-सर्विस बुक (e-Service Book) लेगी। इसके लिए सरकार के एकीकृत 'मानव संपदा' (Manav Sampada Portal) को आधार बनाया गया है।

इस पोर्टल पर कर्मचारी की नियुक्ति के पहले दिन से लेकर सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) तक का पूरा ब्योरा डिजिटल रूप से दर्ज रहेगा:

शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता: हाईस्कूल से लेकर उच्चतम डिग्री, अंकपत्र और संबंधित बोर्ड/विश्वविद्यालय से उनके सत्यापन (Verification) का डिजिटल रिकॉर्ड।

जाति, निवास और आरक्षण प्रमाणपत्र: जारीकर्ता प्राधिकारी और डिजिटल सत्यापन संख्या के साथ सुरक्षित डाटा।

नियुक्ति पत्र एवं मेडिकल फिटनेस: पहली जॉइनिंग का मूल आदेश, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र।

वेतन वृद्धि और पदोन्नति (Promotion): समय-समय पर लगने वाले इंक्रीमेंट, एसीपी और प्रोमोशन के आदेश।

छुट्टी (Leave) और गोपनीय आख्या (ACR/APAR): आकस्मिक, मातृत्व या उपार्जित अवकाश और वार्षिक गोपनीय मूल्यांकन का पूरा रिकॉर्ड।

कैसे रुकेगा फर्जीवाड़ा और फर्जी शिक्षकों जैसा खेल?

पूर्ववर्ती वर्षों में बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग समेत कई जगहों पर फर्जी दस्तावेजों या किसी अन्य अभ्यर्थी के रोल नंबर पर नौकरी करने के मामले सामने आते रहे हैं। कई मामलों में एक ही पैन कार्ड या डिग्री पर कई जिलों में अलग-अलग लोग नौकरी करते पकड़े गए थे।

इस नई ऑनलाइन व्यवस्था से ऐसे सभी रास्तों पर स्थायी रोक लगेगी:

आधार और पैन से बायोमेट्रिक सीडिंग: हर कर्मचारी की ई-सर्विस बुक उसके आधार कार्ड और पैन नंबर से लिंक होगी। इससे पूरे प्रदेश में किसी भी कर्मचारी का डुप्लीकेट रिकॉर्ड बनते ही सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा।

बोर्ड और यूनिवर्सिटीज से ऑनलाइन वेरिफिकेशन: डिग्रियों का सत्यापन सीधे 'डिजीलॉकर' (DigiLocker) और संबंधित शैक्षणिक संस्थानों के डेटाबेस से एपीआई (API) के जरिए होगा, जिससे बाजार से खरीदी गई फर्जी डिग्रियों की पोल तुरंत खुल जाएगी।

फर्जी सर्विस बुक बनाना नामुमकिन: पहले फाइलों में हेराफेरी कर बैकडेट में नियुक्तियां दिखाने या गलत प्रविष्टियां दर्ज कराने की गुंजाइश रहती थी, लेकिन डिजिटल प्रणाली में हर बदलाव का टाइम-स्टैंप (Time Stamp) और डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) दर्ज रहेगा।

कर्मचारियों को भी मिलेगा बड़ा फायदा, खत्म होगी 'बाबूगिरी'

यह व्यवस्था केवल फर्जीवाड़ा रोकने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ईमानदार कर्मचारियों को दफ्तरों में क्लर्कों (बाबुओं) की मनमानी और फाइलों के चक्कर काटने से भी मुक्ति दिलाएगी:

घर बैठे मिलेगी छुट्टी की मंजूरी: कर्मचारियों को सीएल, मेडिकल या अन्य छुट्टियों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे; वे सीधे पोर्टल या मोबाइल ऐप से आवेदन करेंगे और उच्चाधिकारी ऑनलाइन ही उसे मंजूर करेंगे।

समय पर वेतन और जीपीएफ भुगतान: सैलरी बिल और इंक्रीमेंट का काम ई-सर्विस बुक से सीधे ट्रेजरी सिस्टम (कोषागार) से जुड़ जाएगा, जिससे हर महीने वेतन मिलने में बेवजह की देरी नहीं होगी।

रिटायरमेंट पर नहीं अटकेगी पेंशन और ग्रेच्युटी: सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारियों को पेंशन पेपर तैयार कराने और सर्विस बुक के सत्यापन में महीनों भटकना पड़ता था। ऑनलाइन व्यवस्था होने से रिटायरमेंट के दिन ही पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) और ग्रेच्युटी का क्लीयरेंस अपने आप जारी हो जाएगा।

तय समयसीमा में काम पूरा करने के कड़े निर्देश

मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ सभी कर्मचारियों का डाटा तय समयसीमा के भीतर शत-प्रतिशत सत्यापित कराकर पोर्टल पर फ्रीज (Lock) करें। यदि किसी स्तर पर फर्जी दस्तावेज पकड़ में आते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कराकर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी और अब तक दिए गए वेतन की रिकवरी भी होगी।

योगी सरकार का यह डिजिटल कदम उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुशासन का एक नया मानक स्थापित करने जा रहा है।