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September 07 2026 07:06 pm

5.72 करोड़ जन-धन खातों में शून्य बैलेंस: RTI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, हर चौथा खाता निष्क्रिय; यूपी और बिहार सबसे आगे

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देश के अंतिम छोर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने और वित्तीय समावेशन के सबसे बड़े राष्ट्रीय मिशन प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) से जुड़े एक चौंकाने वाले आंकड़े ने नीति नियंताओं और अर्थशास्त्रियों का ध्यान खींचा है। सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, देश भर में खुले 59 करोड़ से अधिक जन-धन खातों में से 5.72 करोड़ से ज्यादा बैंक खातों में वर्तमान में शून्य (Zero) बैलेंस है। इससे भी अधिक चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि योजना के तहत खुला लगभग हर चौथा खाता (15.36 करोड़ से अधिक खाते) इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय श्रेणी में पड़ा हुआ है, जिसका लंबे समय से कोई वित्तीय इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

RTI के अहम आंकड़े: 59 करोड़ खाते और ₹3.15 लाख करोड़ की जमा पूंजी

आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ द्वारा दायर आवेदन के जवाब में वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने 12 अगस्त 2026 तक के आधिकारिक आंकड़े साझा किए हैं:

कुल खातों की संख्या: देश भर में कुल 59,03,74,907 (59.03 करोड़ से अधिक) जन-धन खाते खुले हुए हैं।

कुल जमा पूंजी: इन सभी खातों में कुल मिलाकर ₹3,15,179.90 करोड़ (₹3.15 लाख करोड़ से ज्यादा) की राशि जमा है।

महिला खाताधारकों की हिस्सेदारी: कुल खातों में से 32.89 करोड़ खाते महिलाओं (ट्रांसजेंडर खाताधारकों सहित) के नाम पर हैं, जबकि 26.14 करोड़ खाते पुरुषों के नाम दर्ज हैं।

जीरो बैलेंस खाते: कुल 5,72,35,490 खातों में एक भी रुपया नहीं है।

निष्क्रिय (Inoperative) खाते: लगभग 15,36,77,009 खाते निष्क्रिय घोषित किए गए हैं। बैंकिंग नियमों के अनुसार, जिन खातों में 2 साल से अधिक समय तक ग्राहक द्वारा कोई लेनदेन (जमा या निकासी) नहीं किया जाता, उन्हें इनऑपरेटिव माना जाता है।

जीरो बैलेंस और निष्क्रिय खातों में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर

आरटीआई से मिले राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार में ऐसे खातों की संख्या सबसे ज्यादा दर्ज की गई है:

राज्यशून्य (Zero) बैलेंस खातेनिष्क्रिय (Inoperative) खातेकुल जन-धन खाते
उत्तर प्रदेश95.92 लाख3.23 करोड़10.51 करोड़
बिहार62.35 लाख1.59 करोड़7.01 करोड़
पश्चिम बंगाल37.20 लाख1.02 करोड़5.73 करोड़
असम36.30 लाख
महाराष्ट्र36.04 लाख97.94 लाख3.85 करोड़
मध्य प्रदेश1.35 करोड़

जीरो बैलेंस और निष्क्रिय खातों में क्या अंतर है?

बैंकिंग जानकारों के अनुसार, इन दोनों श्रेणियों को अलग-अलग समझना जरूरी है:

शून्य बैलेंस खाता: किसी खाते में बैलेंस शून्य होना यह साबित नहीं करता कि वह बंद है। जन-धन खातों की मूल प्रकृति ही 'जीरो बैलेंस' सुविधा वाली है, जिसमें न्यूनतम बैलेंस न रखने पर कोई पेनाल्टी नहीं लगती। कई लाभार्थी सरकारी सब्सिडी या डीबीटी (DBT) का पैसा आते ही निकाल लेते हैं, जिससे खाता सक्रिय रहते हुए भी शून्य बैलेंस दिखाता है।

निष्क्रिय (इनऑपरेटिव) खाता: जब किसी खाते में दो साल या उससे अधिक समय तक ग्राहक की ओर से कोई भी जमा, निकासी, एटीएम स्वाइप या डिजिटल ट्रांसफर नहीं होता, तब बैंक उसे निष्क्रिय कर देते हैं। ऐसे खातों में पैसा जमा भी हो सकता है, लेकिन खाताधारक उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे होते हैं।

केंद्रीय स्तर पर कई आंकड़ों का अभाव

आरटीआई जवाब में विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई बिंदुओं का केंद्रीय स्तर पर संकलन (Centrally Maintained) नहीं किया जाता है:

जेंडर के आधार पर खातों में जमा राशि, जीरो बैलेंस या निष्क्रिय खातों का अलग-अलग डेटा केंद्र के पास मौजूद नहीं है।

₹100 से कम राशि वाले खातों का कोई केंद्रीय आंकड़ा नहीं है।

पिछले पांच वर्षों में बंद किए गए जन-धन खातों और संदिग्ध लेन-देन या साइबर धोखाधड़ी के कारण फ्रीज किए गए खातों का डेटा भी केंद्रीयकृत रूप से उपलब्ध नहीं है।

खाता खोलने से आगे 'वित्तीय साक्षरता' की जरूरत

अगस्त 2014 में शुरू हुई प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने देश के करोड़ों वंचित नागरिकों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से जोड़ने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। हालांकि, 15 करोड़ से अधिक खातों का निष्क्रिय होना यह संकेत देता है कि सिर्फ बैंक खाता खोल देना ही पर्याप्त नहीं है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में बुनियादी बैंकिंग जागरूकता, नियमित बचत की आदत और छोटे ऋण उत्पादों तक पहुंच को मजबूत करना नीति निर्माताओं के लिए अगली बड़ी प्राथमिकता होगी।