सावन का दूसरा दिन आज, 31 जुलाई का पंचांग: जानें शुक्रवार को शिव पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचक का समय
लखनऊ समेत पूरे उत्तर प्रदेश और देशभर के शिवालयों में सावन की धूम मची हुई है। आज 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को पवित्र सावन माह का दूसरा दिन है। सावन के इस पावन महीने में देवों के देव महादेव की विधि-विधान से पूजा करने पर मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। अगर आप भी आज शिव जी का रुद्राभिषेक या कोई विशेष अनुष्ठान करने जा रहे हैं, तो आपके लिए आज का पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल की जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जनरेटिव एआई और वैदिक पंचांग के सटीक विश्लेषण से जानते हैं आज के दिन का पूरा लेखा-जोखा।
31 जुलाई 2026: सावन के दूसरे दिन का सटीक पंचांग
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रात 10:32 बजे तक रहेगी, जिसके बाद तृतीया तिथि लग जाएगी। आज शाम 07:27 बजे तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा और उसके बाद शतभिषा नक्षत्र की शुरुआत होगी। इसके अलावा आज रात 11:55 बजे तक सौभाग्य योग है, जो पूजा-पाठ के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।
चंद्रमा आज सुबह 06:38 बजे तक मकर राशि में रहेगा और उसके उपरांत कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएगा। आज के दिन 'अशून्यशयन व्रत' भी रखा जा रहा है।
शिव पूजा के लिए आज के सबसे शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
अगर आप महादेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा करना चाहते हैं, तो इन शुभ मुहूर्तों का ध्यान रखें:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:12 बजे से सुबह 05:47 बजे तक (यह समय शिव ध्यान के लिए सबसे उत्तम है)।
प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:29 बजे से सुबह 06:22 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:26 बजे से दोपहर 02:27 बजे तक।
विजय मुहूर्त: शाम 04:28 बजे से शाम 05:28 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: रात 09:31 बजे से रात 09:48 बजे तक।
सूर्योदय और सूर्यास्त: आज सूर्योदय सुबह 06:22 बजे और सूर्यास्त शाम 07:14 बजे होगा।
इन अशुभ समय में भूलकर भी न करें कोई शुभ कार्य (Ashubh Muhurat)
ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल और पंचक के दौरान कोई भी नया या मांगलिक कार्य शुरू करने की मनाही होती है। आज इन समयों का विशेष ध्यान रखें:
राहुकाल: दोपहर 12:03 बजे से दोपहर 01:57 बजे तक (इस दौरान कोई भी शुभ कार्य न करें)।
पंचक काल: आज सुबह 06:38 बजे से पंचक शुरू हो रहा है, जो पूरे दिन रहेगा।
यमगण्ड काल: शाम 05:44 बजे से रात 07:37 बजे तक।
गुलिक काल: सुबह 08:16 बजे से सुबह 10:10 बजे तक।
सावन में शिव जी के जलाभिषेक का क्या है रहस्य?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था। मंथन से निकले भयंकर हलाहल विष को पीकर भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा की थी। विष के प्रभाव से महादेव का शरीर प्रचंड गर्मी से तपने लगा था। तब सभी देवी-देवताओं ने उनके शरीर की जलन को शांत करने के लिए उन पर निरंतर जल और दूध अर्पित किया था। यही कारण है कि सावन के महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के जीवन में शीतलता व सुख-शांति भर देते हैं।