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September 16 2026 04:28 pm

OTT पर 8.3 रेटिंग वाली साउथ की सस्पेंस क्राइम थ्रिलर: सीधी-सादी कहानी देखने वालों के उड़ जाएंगे तोते

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ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अगर आप ऐसी फिल्मों की तलाश में रहते हैं जहां हीरो की एंट्री हो, विलेन से आमना-सामना हो और अंत में एक सीधी लकीर की तरह कहानी खत्म हो जाए, तो यह फिल्म आपके लिए बिल्कुल नहीं है। लेकिन यदि आप ऐसी जटिल, दिमाग की कसरत कराने वाली और अप्रत्याशित क्राइम थ्रिलर्स के शौकीन हैं जो खत्म होने के बाद भी कई दिनों तक आपके जेहन से न उतरें, तो साउथ सिनेमा की एक कल्ट क्लासिक फिल्म इन दिनों ओटीटी पर जबरदस्त चर्चा में है।

हम बात कर रहे हैं साल 2014 में आई कन्नड़ भाषा की मास्टरपीस क्राइम थ्रिलर 'उलिदावरु कंदंते' (Ulidavaru Kandanthe) की। इस फिल्म का अंग्रेजी अनुवाद है—‘As Seen by the Rest’ (जैसा बाकियों ने देखा)। IMDb पर 8.3 की शानदार रेटिंग हासिल कर चुकी यह फिल्म भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा प्रोजेक्ट्स में गिनी जाती है, जिन्होंने कहानी कहने के पारंपरिक तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल कर रख दिया।

1 मर्डर, 5 चश्मदीद और 5 अलग सच: क्या है इस फिल्म का असली खेल?

'उलिदावरु कंदंते' की कहानी कर्नाटक के तटीय शहर मालपे के एक इलाके में कृष्ण जन्माष्टमी के उत्सव के दौरान हुई एक चोरी और रहस्यमयी हत्या से शुरू होती है। इसके बाद एक खोजी पत्रकार उस घटना के पीछे की सच्चाई जानने के लिए अलग-अलग लोगों से बातचीत करना शुरू करता है। यहीं से फिल्म का असली खेल और दर्शकों के दिमाग को चकरा देने वाला सफर शुरू होता है।

फिल्म को विश्व सिनेमा की कालजयी फिल्म 'राशोमोन' (Rashomon) और क्वेंटिन टारनटिनो की 'पल्प फिक्शन' की गैर-रेखीय (Non-linear) शैली में 5 अलग-अलग अध्यायों (Chapters) में बांटा गया है।

पांच अलग-अलग किरदार एक ही घटना को अपने-अपने नजरिए से बयां करते हैं।

हर किरदार के एंगल से कहानी का सच पूरी तरह बदल जाता है। किसी के लिए जो हीरो है, दूसरे की नजर में वही सबसे बड़ा गुनहगार दिखता है।

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शक यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिर सच कौन बोल रहा है और झूठ कौन।

यही वजह है कि यह उन फिल्मों में शामिल नहीं है जिन्हें आप आधा घंटा देखने के बाद हाथ में मोबाइल चलाते हुए भी समझ लेंगे। इसे देखने के लिए पूरी एकाग्रता की दरकार होती है।

रक्षित शेट्टी का 'रिची' अवतार और ऋषभ शेट्टी का दमदार साथ

इस फिल्म को अभिनेता-फिल्ममेकर रक्षित शेट्टी ने न केवल लिखा और निर्देशित किया है, बल्कि इसमें उन्होंने मुख्य किरदार 'रिची' (Richie) को भी जिया है। रेट्रो चश्मा, अजीबोगरीब कपड़े, बेफिक्र अंदाज और अचानक हिंसक हो जाने वाला मिजाज—रिची का किरदार टिपिकल बॉलीवुड विलेन या सीधे-सादे हीरो के खांचे में फिट नहीं बैठता। उनका यह स्वैग फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के दिलो-दिमाग पर छाया रहता है।

वहीं, 'कांतारा' फेम ऋषभ शेट्टी ने भी फिल्म में 'रघु' के किरदार में अपनी बेजोड़ अदाकारी का लोहा मनवाया है। उनके साथ किशोर, अच्युत कुमार, शीतल शेट्टी और तारा जैसे मंझे हुए कलाकारों ने फिल्म के हर एक दृश्य में जान फूंक दी है।

संस्कृति, टाइगर डांस और अजनीश लोकनाथ का रोंगटे खड़े कर देने वाला संगीत

फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी सिनेमैटोग्राफी और तटीय कर्नाटक की लोक संस्कृति है। जन्माष्टमी का त्यौहार, 'पिली वेषा' (टाइगर डांस), यक्षगान कला, मछुआरों की वास्तविक जिंदगी और स्थानीय बोली को कहानी के बैकड्रॉप में इस खूबसूरती से पिरोया गया है कि दर्शक खुद को उसी तटीय इलाके में महसूस करने लगते हैं।

इसके साथ ही, बी. अजनीश लोकनाथ का पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक वाद्ययंत्रों से सजा बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के सस्पेंस और रहस्यों को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा देता है।

किन दर्शकों को जरूर देखनी चाहिए यह फिल्म?

अगर आप 'दृश्यम', 'रतसासन' या 'कैथी' जैसी थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं और मर्डर मिस्ट्री के साथ-साथ सिनेमाई बारीकियों, गहरी फिलॉसफी और अनोखे नैरेटिव को तलाश रहे हैं, तो 'उलिदावरु कंदंते' आपके ओटीटी वॉचलिस्ट में शीर्ष पर होनी चाहिए। यह फिल्म विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (यूट्यूब/जियोसिनेमा/प्राइम वीडियो) पर सबटाइटल्स और डब वर्जन के साथ उपलब्ध है। वीकेंड पर अगर आप सिनेमाई कला का असली स्वाद चखना चाहते हैं, तो इस 8.3 रेटिंग वाली थ्रिलर को मिस बिल्कुल न करें।