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May 14 2026 10:41 pm

सायोनी घोष का छलका दर्द बंगाल में TMC की करारी हार और BJP की आंधी पर क्या बोलीं 'हॉट केक' सांसद?

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India News Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने इस बार सत्ता के गलियारों में ऐसी हलचल मचाई है कि ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद चेहरों के भी होश उड़ गए हैं। बंगाल की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी और 'काबा-मदीना' जैसे विवादित बयानों से चर्चा में रहने वाली टीएमसी सांसद सायोनी घोष की प्रतिक्रिया अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गिरते ग्राफ पर सायोनी ने जो कहा, उसने भविष्य की राजनीति के संकेत दे दिए हैं।

हार के बाद सायोनी घोष का पहला बयान: 'जनता का फैसला सर्वोपरि'

बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में बीजेपी को बहुमत मिलता देख सायोनी घोष के तेवर बदले-बदले नजर आए। कभी चुनाव प्रचार के दौरान हुंकार भरने वाली सायोनी ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है। उन्होंने स्वीकार किया कि शायद पार्टी लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि टीएमसी फिर से उठ खड़ी होगी, लेकिन फिलहाल उनके चेहरे पर हार की मायूसी साफ नजर आ रही थी।

विवादों से रहा है पुराना नाता, क्या वही पड़ा भारी?

सायोनी घोष केवल एक राजनेता नहीं बल्कि ग्लैमर की दुनिया का भी बड़ा नाम हैं। चुनावी दौर में उनके पुराने बयानों, विशेषकर 'काबा-मदीना' वाले वीडियो को लेकर बीजेपी ने उन्हें जमकर घेरा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के धार्मिक ध्रुवीकरण वाले बयानों ने टीएमसी के पारंपरिक हिंदू वोट बैंक में सेंध लगाने का काम किया। सायोनी घोष की हार या उनके क्षेत्र में पार्टी की कमजोरी को इसी नजरिए से देखा जा रहा है कि जनता अब बयानों के बजाय ठोस काम और शांति चाहती है।

बीजेपी की जीत पर सायोनी का तंज और आत्ममंथन

बीजेपी की जीत को लेकर सायोनी ने कहा कि चुनाव जीतना एक बात है और राज्य को चलाना दूसरी बात। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उम्मीद है कि नई सरकार बंगाल की संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचाएगी। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने यह भी माना कि टीएमसी को अब आत्ममंथन (Introspection) की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें यह देखना होगा कि आखिर कहाँ चूक हुई और क्यों हमारा अभेद्य किला ढह गया।

टीएमसी के 'युवा चेहरे' का राजनीतिक भविष्य अधर में?

ममता बनर्जी ने सायोनी घोष को युवाओं को जोड़ने के लिए बड़ी जिम्मेदारी दी थी। उन्हें 'हॉट केक' की तरह राजनीति में पेश किया गया था, लेकिन इस हार ने उनके राजनीतिक कद पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। बंगाल की जनता ने जिस तरह से परिवर्तन का जनादेश दिया है, उससे सायोनी जैसे नेताओं के लिए आने वाला समय काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। क्या वह फिर से जनता का भरोसा जीत पाएंगी या बीजेपी की यह लहर उन्हें सियासी हाशिए पर धकेल देगी, यह वक्त ही बताएगा।