'इस्तीफा दो और जहां जाना है जाओ!' बागी सांसदों पर भड़की TMC, सुखेंदु का नाम लेकर कल्याण बनर्जी ने दी बड़ी नसीहत

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कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चल रहे ऐतिहासिक सियासी घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने बागी खेमे के खिलाफ अब बेहद आक्रामक और आर-पार का रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को पार्टी नेतृत्व ने अपने बागी लोकसभा सांसदों को एक कड़ा और दो टूक चेतावनी भरा संदेश जारी किया है। टीएमसी ने साफ लफ्जों में कहा है कि अगर उन्हें पार्टी की नीतियों, विचारधारा और नेतृत्व से कोई भी मतभेद है, तो वे थोड़ी भी राजनीतिक नैतिकता दिखाएं और तुरंत लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर जहां जाना चाहते हैं, वहां चले जाएं। पार्टी ने इन बागियों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गुप्त सांठगांठ करने, राजनीतिक शुचिता को ताक पर रखने और संकट के समय अपने ही कार्यकर्ताओं की पीठ में छुरा घोंपने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।

बागियों के '20 सांसदों वाले दावे' पर भड़की टीएमसी

TMC का यह तीखा पलटवार उस सनसनीखेज दावे के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसने सोमवार को पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी थी। दरअसल, बागी गुट ने दावा किया था कि टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 20 सांसद उनके संपर्क में हैं और वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ हाथ मिलाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बागियों ने यह भी कहा था कि वे बहुत जल्द लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर एनडीए को अपना खुला समर्थन घोषित करने वाले हैं।

कल्याण बनर्जी ने सुखेंदु शेखर राय का दिया उदाहरण

इस बड़े संकट के बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेता और तेजतर्रार सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी मुख्यालय में एक विशेष और हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी समूह की धज्जियां उड़ाते हुए कहा, "अगर आप पार्टी पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, दिन-रात उसकी छवि को धूमिल कर रहे हैं और उसके खिलाफ जाकर गुप्त बैठकें कर रहे हैं, तो थोड़ी नैतिकता दिखाइए। संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दीजिए, यही नैतिक रूप से एकमात्र सही रास्ता है।"

कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं को नसीहत देने के लिए टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय का बड़ा उदाहरण सामने रखा। बनर्जी ने कहा, "सुखेंदु शेखर राय ने भी पार्टी के खिलाफ अपने मतभेद और आरोप सार्वजनिक किए थे, लेकिन उन्होंने तुरंत अपने पद से इस्तीफा देकर नैतिकता की एक मिसाल पेश की थी। आज के इन बागी सांसदों को भी सुखेंदु बाबू के कदम से सीख लेनी चाहिए और उनका अनुसरण करना चाहिए, न कि सांसद की कुर्सी से चिपककर पार्टी को अंदर से खोखला करना चाहिए।"

कीर्ति आजाद का तीखा वार—'पार्टी का नाम इस्तेमाल कर पीछे से मत खेलो'

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद टीएमसी के एक और वरिष्ठ नेता कीर्ति आजाद ने भी बागी सांसदों पर विश्वासघात का बड़ा आरोप मढ़ा। आजाद ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, "अगर आप लोगों को भाजपा की गोद में जाकर बैठना ही है, तो इसे खुलकर पूरी दुनिया के सामने स्वीकार कीजिए। टीएमसी का नाम और उसका सिंबल इस्तेमाल करके पीछे से यह गंदा खेल खेलने की कोशिश मत कीजिए। यह पश्चिम बंगाल की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ साफ-साफ धोखा है।" कीर्ति आजाद ने विशेष रूप से बागी गुट का नेतृत्व कर रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार पर सीधा निशाना साधा और उनके चुनावी रिकॉर्ड सहित पार्टी में उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जो लोग मुश्किल वक्त में पार्टी को अधधर में छोड़ देते हैं, वे कभी भी ममता बनर्जी के सच्चे सिपाही नहीं हो सकते।

बीजेपी के केंद्रीय मंत्री के घर हुई सीक्रेट मीटिंग का पर्दाफाश?

कल्याण बनर्जी ने बागी गुट द्वारा मीडिया में चलाए जा रहे दावों की प्रामाणिकता पर भी बड़े सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर 20 सांसदों के समर्थन का दावा इतना ही सच्चा है, तो वह पत्र अभी तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? क्या यह सब सिर्फ मीडिया में हवा बनाने और दबाव बनाने की एक नाकाम कोशिश है?

इसके साथ ही बनर्जी ने एक बड़ा राजनीतिक धमाका करते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई एक गुप्त बैठक का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी सांसद अब अपनी राजनीतिक निष्ठा पूरी तरह बदल चुके हैं। वे संकट के समय ममता बनर्जी का साथ छोड़कर सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी के पाले में जा खड़े हुए हैं। टीएमसी नेताओं ने एकजुट होकर कहा कि बागी गुट के इस कदम से बंगाल के जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा है और आने वाले दिनों में जनता इन बागियों को इसका करारा जवाब देगी।