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October 16 2026 04:53 pm

भारत के लिए राहत भरी खबर, होर्मुज के 'मौत के रास्ते' से सुरक्षित निकलेंगे भारतीय जहाज, ईरानी विदेश मंत्री का बड़ा एलान

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India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व में जारी भीषण जंग और समुद्र में बिछे मिसाइलों के जाल के बीच भारत के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर अपनी नीति स्पष्ट कर दी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि ईरान ने भारत समेत पांच मित्र देशों के जहाजों को इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने की विशेष अनुमति दे दी है। इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

भारत समेत इन 5 देशों को मिला 'सेफ पैसेज'

अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री ने उन अटकलों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद है। अराघची ने स्पष्ट किया कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों के लिए यह रास्ता खुला रहेगा। उन्होंने बताया कि इन देशों की सरकारों और जहाज मालिकों ने ईरान से संपर्क कर 'सुरक्षित मार्ग' (Safe Passage) का अनुरोध किया था, जिसे तेहरान ने स्वीकार कर लिया है। ईरान की सेना अब इन देशों के जहाजों को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी।

शत्रु देशों के लिए 'नो एंट्री', मित्रों के लिए खुला रास्ता

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कड़े शब्दों में कहा, "हम इस समय युद्ध की स्थिति में हैं, इसलिए हमारे शत्रुओं और उनके सहयोगियों के जहाजों को गुजरने देने का कोई कारण नहीं बनता। लेकिन जिन देशों को हम अपना सहयोगी मानते हैं या जिनके साथ हमारे कूटनीतिक संबंध मजबूत हैं, उनके लिए यह मार्ग सदैव खुला है।" उन्होंने यह भी साफ किया कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी इन मित्र देशों के साथ समन्वय और सहयोग का यह सिलसिला जारी रहेगा।

अमेरिका के साथ किसी भी वार्ता से इनकार

एक तरफ जहां ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ गुप्त बातचीत और 'सत्ता परिवर्तन' के दावे कर रहा है, वहीं ईरानी विदेश मंत्री ने इन दावों की हवा निकाल दी है। सरकारी टेलीविजन से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ कोई औपचारिक या राजनयिक बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने कहा, "मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान करना 'बातचीत' नहीं कहलाता। अमेरिका इस संघर्ष में अपने लक्ष्य हासिल करने में बुरी तरह विफल रहा है और वह ईरान में अपनी मर्जी का शासन थोपने में असमर्थ है।"

ईरान की शर्त: समाधान हमारी शर्तों पर होगा

अराघची ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए कहा कि दुनिया ने देख लिया है कि कोई भी देश ईरान की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकता। उन्होंने दोहराया कि ईरान युद्ध को लंबा खींचना नहीं चाहता और वह इस संघर्ष का स्थायी अंत चाहता है, लेकिन यह समाधान ईरान की शर्तों और उसकी संप्रभुता के सम्मान के साथ ही संभव है। फिलहाल, भारत के लिए यह कूटनीतिक जीत मानी जा रही है क्योंकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है।