LPG-LNG संकट के बीच 'सीक्रेट डील'! कतर ने ईरान को दिए 6 अरब डॉलर? खाड़ी युद्ध से खुद को किया पूरी तरह अलग
India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व के युद्धक्षेत्र से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में खलबली मचा दी है। इजरायली मीडिया के दावों के अनुसार, कतर और ईरान के बीच एक 'गुप्त समझौता' हुआ है, जिसके तहत कतर ने तेहरान को 6 अरब डॉलर (लगभग 50,000 करोड़ रुपये) देने की पेशकश की है। इस भारी-भरकम राशि के बदले ईरान ने कतर के बेशकीमती तेल और गैस संयंत्रों पर हमले रोकने पर सहमति जताई है। अमर उजाला की शैली में रिपोर्ट करें तो, इस सौदे ने कतर को युद्ध की आग से फिलहाल सुरक्षित कर दिया है।
6 अरब डॉलर का 'अमेरिकी' कनेक्शन
इस समझौते की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह वही पैसा है जो साल 2023 में अमेरिका ने कैदियों की अदला-बदली के सौदे के तहत कतर को दिया था। इजरायली वेबसाइट 'जेफीड' का दावा है कि अब कतर यह पूरी धनराशि सीधे ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर' (IRGC) को सौंपने जा रहा है। गौरतलब है कि IRGC ही इस समय युद्ध के मोर्चे पर ईरानी सेना का नेतृत्व कर रही है। इस आर्थिक मदद के बदले 20 मार्च के बाद से कतर पर कोई बड़ा ईरानी हमला नहीं हुआ है।
मध्यस्थता से पीछे हटा कतर, अमेरिका को करारा जवाब
कतर, जिसे अब तक मध्य पूर्व का सबसे बड़ा 'शांतिदूत' और मध्यस्थ माना जाता था, उसने अब हाथ पीछे खींच लिए हैं। कतर के विदेश मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब ईरान और अमेरिका के बीच बिचौलिए की भूमिका नहीं निभाएंगे। कतर का कहना है कि जब अमेरिका ही ईरान को बातचीत के लिए राजी नहीं कर पा रहा, तो उनकी भूमिका का कोई मतलब नहीं रह जाता। बता दें कि कतर ने ही अतीत में अमेरिका और तालिबान के बीच ऐतिहासिक 'दोहा समझौता' कराया था।
'इजरायल की जंग में हम साथ नहीं' - कतर का बड़ा एलान
कतर सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर खुद को इस महायुद्ध से अलग कर लिया है। सरकार ने साफ कहा है कि यह युद्ध कतर और ईरान के बीच नहीं है और वे किसी भी हाल में ईरान पर हमला नहीं करेंगे। कतर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस लड़ाई में अमेरिका की मदद नहीं करेगा क्योंकि यह युद्ध मुख्य रूप से इजरायल के हितों के लिए लड़ा जा रहा है। इस फैसले ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक पकड़ को कमजोर कर दिया है।
LNG उत्पादन में 17% की गिरावट से घबराया कतर?
इस गुप्त समझौते के पीछे कतर की आर्थिक मजबूरी भी मानी जा रही है। कतर एनर्जी के अनुसार, ईरानी हमलों के कारण कतर के LNG (तरल प्राकृतिक गैस) उत्पादन में 17 प्रतिशत की भारी कमी आई है। हालिया हमलों में 4 कतरी नागरिकों की जान गई और 16 घायल हुए थे। चूंकि कतर भारत और चीन जैसे बड़े देशों को गैस सप्लाई करता है, इसलिए अपने वैश्विक कारोबार को बचाने के लिए कतर को ईरान के साथ यह 'लेन-देन' करना पड़ा।
रास लाफान हमले के बाद थमीं मिसाइलें
कतर के ऊर्जा केंद्र 'रास लाफान' पर हुए भीषण हमले के बाद से ही पर्दे के पीछे बातचीत शुरू हो गई थी। 20 मार्च के बाद से कतर की सीमाओं पर शांति देखी जा रही है। हालांकि ईरान ने इस चुप्पी पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि 6 अरब डॉलर की यह 'प्रोटेक्शन मनी' काम कर गई है। भारत जैसे देशों के लिए यह राहत की बात हो सकती है क्योंकि कतर से आने वाली गैस की आपूर्ति अब बाधित नहीं होगी।