तेल संकट के बीच राहत: अमेरिका ने रूसी तेल कार्गो के लिए दी 30 दिन की छूट, जानें भारत को कैसे होगा फायदा
India News Live,Digital Desk : वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच एक राहत भरी खबर आई है। अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट (General License) देने का ऐलान किया है। यह कदम मुख्य रूप से उन तेल कार्गो के लिए उठाया गया है जो पहले से ही जहाजों पर लोड होकर समंदर में खड़े हैं।
अमेरिका की घोषणा: किन पर लागू होगी छूट?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह छूट पूरी तरह से सीमित है:
कार्गो पर लागू: यह केवल उन रूसी तेल कार्गो पर लागू होगा जो पहले से ही जहाजों पर लोड हो चुके हैं और समुद्र में फंसे हुए हैं।
नया सौदा नहीं: इस छूट के तहत रूस के साथ कोई भी नया तेल सौदा या नया निर्यात करने की अनुमति नहीं दी गई है।
चीन पर नियंत्रण: इस कदम का एक रणनीतिक उद्देश्य चीन को भी नियंत्रित करना है, ताकि वह संकट का लाभ उठाकर भारी डिस्काउंट पर रूसी तेल का स्टॉक जमा न कर सके।
भारत के लिए यह क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है। फरवरी 2026 में अमेरिका-ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे ईंधन की किल्लत और कीमतें बढ़ गई थीं। इस अमेरिकी छूट से भारत को निम्नलिखित फायदे होंगे:
सप्लाई चेन में सुधार: 30 दिनों की इस मोहलत के बाद भारतीय रिफाइनरियां समुद्र में फंसे उन जहाजों से बिना किसी अमेरिकी प्रतिबंध के डर के तेल आयात कर सकेंगी। इससे भारत में तेल और एलपीजी की आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त होगी।
ऊर्जा लागत में राहत: यह छूट भारतीय रिफाइनरियों को वैश्विक स्तर पर बढ़ रही ऊर्जा लागत से निपटने में मदद करेगी, जिससे घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।
आयात में तेजी: भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। मार्च 2026 में भारत ने रूस से रिकॉर्ड 22.5 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का आयात किया था, जो साबित करता है कि भारत के लिए यह आपूर्ति कितनी महत्वपूर्ण है।
भारत का रुख: 'व्यावसायिक जरूरतों पर आधारित खरीद'
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि भारत का रूसी तेल खरीदने का निर्णय पूरी तरह से व्यावसायिक हितों और आपूर्ति उपलब्धता पर आधारित है। उन्होंने कहा, "हम पहले भी रूस से तेल खरीदते रहे हैं और आगे भी खरीदते रहेंगे।" भारत का मानना है कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और समझौतों के तहत पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।