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May 19 2026 04:46 pm

राहुल गांधी का 'झंडा' विवाद: पीएम मोदी पर तंज कसने के चक्कर में हुई बड़ी तथ्यात्मक चूक

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India News Live,Digital Desk : कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट को लेकर सुर्खियों में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे और अडानी समूह के निवेश से जुड़े मुद्दों पर एक ग्राफिक साझा करते हुए राहुल गांधी की सोशल मीडिया टीम से एक बड़ी चूक हो गई, जिसके बाद यूजर्स ने उन्हें जमकर ट्रोल किया।

क्या था ग्राफिक में?

राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर एक तुलनात्मक ग्राफिक साझा किया, जिसमें दो मुख्य बिंदु थे:

नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड द्वारा अडानी ग्रीन एनर्जी को अपने पोर्टफोलियो से बाहर करने का संदर्भ।

पीएम मोदी का 43 वर्षों में नॉर्वे का पहला ऐतिहासिक दौरा।

इस ग्राफिक में पीएम मोदी के चेहरे पर 'अडानी' का लोगो दिखाया गया था और साथ में दो झंडे थे—एक भारत का तिरंगा और दूसरा एक यूरोपीय देश का झंडा।

क्या हुई गलती?

ग्राफिक में नॉर्वे के दौरे को हाईलाइट करने के लिए जिस झंडे का उपयोग किया गया, वह वास्तव में स्वीडन का राष्ट्रीय ध्वज था।

स्वीडन का झंडा: नीले रंग पर पीले रंग का नॉर्डिक क्रॉस।

नॉर्वे का झंडा: लाल रंग पर सफेद बॉर्डर के साथ नीला क्रॉस।

सोशल मीडिया पर जैसे ही यह गलती सामने आई, यूजर्स ने कांग्रेस की रिसर्च और सोशल मीडिया टीम पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। यूजर्स का कहना है कि जिस अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मुद्दे पर इतनी गंभीर चर्चा की जा रही है, कम से कम उन देशों के झंडों की पहचान सही होनी चाहिए थी।

पीएम मोदी का नॉर्वे दौरा और महत्व

भले ही सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की इस चूक की चर्चा हो रही है, लेकिन कूटनीतिक दृष्टि से पीएम मोदी का यह नॉर्वे दौरा काफी महत्वपूर्ण है:

ऐतिहासिक यात्रा: 1983 के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला नॉर्वे दौरा है।

सर्वोच्च सम्मान: ओस्लो में पीएम मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'द ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' से सम्मानित किया गया है।

रणनीतिक समझौते: इस यात्रा का मुख्य केंद्र व्यापार, ग्रीन टेक्नोलॉजी, और 'ब्लू इकॉनमी' है। साथ ही, दोनों देशों के बीच भविष्य के निवेश और आपसी सहयोग पर कई अहम समझौते हो रहे हैं।

फिलहाल, राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी की तरफ से इस तथ्यात्मक गलती पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है और न ही ग्राफिक को डिलीट किया गया है। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने नॉर्वे में पीएम मोदी द्वारा पत्रकारों के सवाल न लेने को लेकर भी निशाना साधा है और कहा है कि “छिपाने के लिए कुछ न हो तो डरने की जरूरत नहीं पड़ती।”