गाजियाबाद की बबीता शर्मा की मेहनत के कायल हुए पीएम नरेंद्र मोदी: 'मन की बात' में की खुलकर तारीफ, महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की बनीं राष्ट्रीय मिसाल

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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के मंच से जब भी किसी आम नागरिक के असाधारण प्रयासों का जिक्र होता है, तो वह पूरे देश के लिए प्रेरणा बन जाता है। इस बार उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की कर्मठ महिला बबीता शर्मा के अथक परिश्रम, नवाचार और आत्मनिर्भरता की प्रेरक यात्रा ने प्रधानमंत्री का ध्यान अपनी ओर खींचा। प्रधानमंत्री ने बबीता शर्मा के जमीनी प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए बताया कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली महिला ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन से न केवल अपना जीवन संवारा, बल्कि समाज की सैकड़ों महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन और सम्मान से जीने की नई राह भी दिखाई। गाजियाबाद जैसे औद्योगिक और तेजी से बढ़ते शहर के कोने से निकलकर देश के सर्वोच्च मंच पर पहचान बनाने की यह कहानी महिला सशक्तिकरण और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प का जीवंत प्रमाण बन गई है।

'मन की बात' में गूंजा गाजियाबाद का नाम: पीएम मोदी ने की बबीता शर्मा के जज्बे की खुलकर तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान देशवासियों को संबोधित करते हुए गाजियाबाद की बबीता शर्मा के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश के छोटे-छोटे शहरों और कस्बों में हमारी माताएं और बहनें जिस प्रकार अपनी प्रतिभा, स्थानीय संसाधनों और अदम्य साहस के बल पर सकारात्मक बदलाव ला रही हैं, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। बबीता शर्मा ने जिस समर्पण के साथ विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए खुद को स्थापित किया और दूसरी महिलाओं को संगठित कर उन्हें आजीविका के साधनों से जोड़ा, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

प्रधानमंत्री द्वारा नाम लिए जाने के बाद गाजियाबाद के प्रशासनिक हलकों से लेकर स्थानीय मोहल्लों तक खुशी की लहर दौड़ गई। राष्ट्रीय पटल पर बबीता शर्मा के नाम की गूंज ने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों और नीयत साफ हो, तो स्थानीय स्तर पर किया गया एक छोटा सा सार्थक प्रयास भी पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच सकता है।

संघर्ष से स्वावलंबन तक का सफर: कैसे एक छोटे से विचार ने बदली सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी

बबीता शर्मा की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का कड़ा संघर्ष, पारिवारिक चुनौतियां और आर्थिक तंगियों से लड़कर आगे बढ़ने की एक लंबी दास्तान है। शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों और सामाजिक बंधनों के बीच उन्होंने खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का फैसला किया था। उन्होंने महसूस किया कि उनके आसपास ऐसी अनगिनत महिलाएं हैं जो हुनरमंद तो हैं, लेकिन उचित मंच, सही मार्गदर्शन और बाजार की कमी के कारण घर की चारदीवारी तक ही सीमित रह जाती हैं।

इस स्थिति को बदलने के लिए बबीता शर्मा ने महिलाओं को एकजुट करना शुरू किया। उन्होंने छोटे स्तर पर स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) और स्थानीय गृह उद्योग की नींव रखी। शुरुआत में कुछ ही महिलाएं उनके साथ जुड़ी थीं, लेकिन बबीता के अटूट विश्वास और लगातार उत्साहवर्धन ने कारवां को बड़ा कर दिया। उन्होंने महिलाओं को पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य उत्पाद तैयार करने, सिलाई-कढ़ाई और रीसाइक्लिंग से जुड़े कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिलाया। धीरे-धीरे यह छोटा सा प्रयास एक संगठित और सफल उद्यम के रूप में विकसित हो गया, जिससे दर्जनों परिवारों की रसोई में सम्मान की रोटी पकने लगी।

आत्मनिर्भर भारत और नारी शक्ति की मिसाल: स्थानीय संसाधनों से तैयार किया सफल मॉडल

बबीता शर्मा के कार्य मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने कभी बाहरी बड़े निवेश या भारी-भरकम मशीनों पर निर्भरता नहीं रखी। उन्होंने स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध कच्चे माल और पारंपरिक घरेलू हुनर को आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार ढाला। पैकेजिंग, गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष ध्यान देकर उन्होंने अपने उत्पादों को स्थानीय बाजारों से लेकर बड़े मेलों और प्रदर्शनियों तक पहुंचाया।

उनके इस मॉडल ने महिलाओं को केवल काम ही नहीं दिया, बल्कि उनमें वित्तीय साक्षरता और डिजिटल लेनदेन की समझ भी विकसित की। समूह से जुड़ी महिलाएं अब खुद बैंक खाते संचालित करती हैं, डिजिटल यूपीआई के माध्यम से व्यापार करती हैं और अपने बच्चों की उच्च शिक्षा व स्वास्थ्य पर स्वाभिमान के साथ खर्च कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने इसी आत्मनिर्भर दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि यही वो 'लोकल फॉर वोकल' की वास्तविक भावना है जो देश की अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री की सराहना के बाद इलाके में जश्न का माहौल, बबीता बोलीं- यह जिम्मेदारी और बढ़ गई

'मन की बात' कार्यक्रम का प्रसारण समाप्त होते ही गाजियाबाद स्थित बबीता शर्मा के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और पड़ोसियों ने ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ इस ऐतिहासिक पल का स्वागत किया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बबीता ने पूरे गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश का नाम पूरे देश में रोशन किया है।

प्रधानमंत्री द्वारा हौसला अफजाई किए जाने पर भावुक होते हुए बबीता शर्मा ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री द्वारा उनके सामान्य से काम को इतनी बड़ी पहचान देना उनके जीवन का सबसे अविस्मरणीय और गौरवशाली क्षण है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन सभी मेहनतकश महिलाओं का है जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया और कभी हार नहीं मानी। बबीता के अनुसार, प्रधानमंत्री के शब्दों ने उनके भीतर नई ऊर्जा भर दी है और अब उनकी जिम्मेदारी समाज के प्रति और अधिक बढ़ गई है। उनका अगला लक्ष्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की और अधिक युवतियों को आधुनिक कौशल से जोड़कर उन्हें उद्यमी बनाना है।

अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत: स्वरोजगार और नवाचार से समाज में सकारात्मक बदलाव

बबीता शर्मा की यह असाधारण उपलब्धि समाज की उन तमाम महिलाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो अपने सपनों को पंख लगाने की इच्छा रखती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि उम्र, पृष्ठभूमि या शुरुआती परेशानियां कभी भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं। आज जब देश महिला नेतृत्व वाले विकास (Women-led Development) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब बबीता शर्मा जैसी जमीनी नायिकाएं समाज की वास्तविक रोल मॉडल बनकर उभर रही हैं।

गाजियाबाद जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने भी बबीता शर्मा के स्वयं सहायता समूह को आगे बढ़ाने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उनके उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लिस्ट कराने में सहयोग का आश्वासन दिया है ताकि उनका यह सफल मॉडल एक जिले तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश और देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन सके।

बबीता शर्मा की मेहनत को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल उत्तर प्रदेश की नारी शक्ति के अदम्य साहस की जीत है, बल्कि यह इस बात का भी भरोसा दिलाता है कि ईमानदारी से किए गए परिश्रम को समाज और देश के शीर्ष नेतृत्व से हमेशा यथोचित आदर और समर्थन प्राप्त होता है।