'पीएम मोदी संघ के सबसे सच्चे प्रतिनिधि': दत्तात्रेय होसबाले के बयान से सियासी हलचल, जानें RSS के 'पंच परिवर्तन' का पूरा प्लान

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा के रिश्तों को लेकर अक्सर कयास लगाए जाते हैं, लेकिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के ताजा बयान ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। संघ में नंबर दो की हैसियत रखने वाले होसबाले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर सराहना करते हुए उन्हें 'आरएसएस का सबसे अच्छा प्रतिनिधि' करार दिया है। पीटीआई को दिए एक विशेष इंटरव्यू में होसबाले ने स्पष्ट किया कि सरकार की योजनाओं और संघ की विचारधारा के बीच एक गहरा और अटूट समन्वय है।

मोदी का 'यूनिक स्टाइल' और संघ का संदेश

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का काम करने का अपना एक अलग और अनूठा अंदाज है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि भले ही शब्द अलग हों, लेकिन मूल संदेश एक ही होता है। होसबाले ने कहा, "संघ ने पर्यावरण संरक्षण के लिए एक पेड़ लगाने की अपील की, तो पीएम मोदी ने उसे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान बनाकर जन-आंदोलन में बदल दिया।" उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी की भाषा और क्रियान्वयन का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन उनकी वैचारिक जड़ें पूरी तरह से संघ के सिद्धांतों में रची-बसी हैं।

RSS का 'पंच परिवर्तन' और मोदी का 'पंच प्रण'

होसबाले ने संघ के आगामी 25 वर्षों के रोडमैप का खुलासा करते हुए 'पंच परिवर्तन' पर जोर दिया। दिलचस्प बात यह है कि संघ के ये पांच लक्ष्य सीधे तौर पर पीएम मोदी के 'पंच प्रण' से मेल खाते हैं:

सामाजिक सौहार्द: समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना।

पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली।

स्वदेशी/आत्मनिर्भरता: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और भारतीय मूल्यों का गौरव।

नागरिक कर्तव्य: अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का बोध।

पारिवारिक मूल्य: बिखरते परिवारों को बचाना और संस्कारों का बीजारोपण।

होसबाले ने कहा कि लाल किले की प्राचीर से जब पीएम मोदी 'आत्मनिर्भर भारत' की बात करते हैं, तो वह नैसर्गिक रूप से संघ के ही वैचारिक कार्यों को आगे बढ़ा रहे होते हैं।

BJP और RSS के अटूट रिश्तों की इनसाइड स्टोरी

भाजपा और संघ के बीच कथित दूरियों की खबरों पर लगाम लगाते हुए होसबाले ने 1980 के दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के संस्थापकों ने जनता पार्टी इसीलिए छोड़ी थी क्योंकि वे संघ के साथ अपने संबंधों को खत्म नहीं करना चाहते थे। उन्होंने जोर देकर कहा, "भाजपा बनाने वाले नेता खुद चाहते थे कि संघ से उनका रिश्ता कभी न टूटे।" यही कारण है कि आज भी सरकार की कई योजनाओं में संघ की विचारधारा की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

शताब्दी वर्ष और भविष्य का भारत

संघ अपने शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में होसबाले का यह बयान संगठन और सरकार के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि जब संघ के शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट और सिक्का जारी किया गया था, तब पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा था कि संघ का दिखाया रास्ता ही भारत का मार्ग है। होसबाले ने पीएम मोदी को एक ऐसा स्वयंसेवक बताया जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कभी अलग नहीं हुआ और जो संघ के विचारों को वैश्विक स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहा है।