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September 17 2026 07:13 pm

यूपी चुनाव का चक्रव्यूह: लखनऊ में अरुण कुमार और बीएल संतोष खींचेंगे RSS-BJP तालमेल का खाका

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की बिसात पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके वैचारिक आधार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी चुनावी मशीनरी को पूरी ताकत से झोंकना शुरू कर दिया है। पिछले लोकसभा चुनावों के अनुभवों और आगामी विधानसभा संग्राम की गंभीरता को देखते हुए संगठन की सबसे निचली इकाई से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक में अभूतपूर्व तालमेल बिठाने की कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में राजधानी लखनऊ के बंथरा स्थित एक रिजॉर्ट में संघ और भाजपा की संयुक्त उच्चस्तरीय समन्वय बैठक का आयोजन किया गया है।

इस बैठक के जरिए संघ और भाजपा के बीच संवादहीनता को दूर कर छह संगठनात्मक प्रांतों में जमीनी पकड़ मजबूत करने का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 20 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से संगठन के सबसे अहम पहिए यानी बूथ स्तर की नब्ज टटोलने के लिए मैदान में उतर रहे हैं।

बंथरा में RSS-BJP की महाबैठक: अरुण कुमार और बीएल संतोष का साझा मंथन

लखनऊ में आयोजित समन्वय बैठक की कमान संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष ने संभाली है। बीएल संतोष मंगलवार देर रात ही लखनऊ पहुंच चुके थे। इस बैठक में अवध और कानपुर प्रांत के संघ, भाजपा और विचार परिवार (एबीवीपी, विहिप, भारतीय मजदूर संघ आदि) के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं।

संघ और पार्टी के बीच समन्वय का मुख्य फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर टिका है:

प्रचारकों और नेताओं का तालमेल: पिछले चुनावों में संघ के स्वयंसेवकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उपजे असंतोष को पूरी तरह पाटना।

प्रांतवार रोडमैप: उत्तर प्रदेश को छह संगठनात्मक प्रांतों में बांटकर क्षेत्रवार सामाजिक, जातीय और राजनीतिक मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करना।

जनसरोकार और योजनाओं की समीक्षा: योगी सरकार की कल्याणकारी नीतियों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और जनता के बीच उपजे किसी भी स्थानीय आक्रोश का समय रहते समाधान निकालना।

20 सितंबर को सहारनपुर में नितिन नवीन: 4800 शक्ति केंद्र संयोजकों का महाकुंभ

एक तरफ जहां लखनऊ में वैचारिक और रणनीतिक तालमेल का खाका खिंच रहा है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 20 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर पहुंच रहे हैं। पार्टी ने चुनावी चक्रव्यूह को मजबूत करने के लिए 6 से 8 बूथों को मिलाकर एक 'शक्ति केंद्र' बनाया है।

सहारनपुर में आयोजित होने वाले विशाल सम्मेलन में पश्चिमी यूपी के करीब 4,800 शक्ति केंद्र संयोजक सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने हाजिर होंगे।

यह सम्मेलन महज कोई औपचारिक रैली नहीं, बल्कि बूथ प्रबंधन और मतदाता संपर्क की वास्तविक जमीनी रिपोर्ट लेने की प्रयोगशाला होगा।

नितिन नवीन सीधे शक्ति केंद्र संयोजकों से पूछेंगे कि पन्ना प्रमुख कितने सक्रिय हैं, किन-किन इलाकों में पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है और विपक्ष के नैरेटिव की काट जमीन पर कैसे की जा रही है।

कमजोर बूथों को चिन्हित कर चुनाव से पहले उन्हें दुरुस्त करने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।

गोरक्ष, अवध और काशी क्षेत्र को मथेंगे विनोद तावड़े

चुनावी मोर्चे पर भाजपा की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े भी छह दिवसीय सघन संगठनात्मक प्रवास पर उत्तर प्रदेश पहुंचे हैं। तावड़े का दौरा सीधे पूर्वांचल और मध्य यूपी पर केंद्रित है:

17 और 18 सितंबर: गोरखपुर में गोरक्ष क्षेत्र के पदाधिकारियों और विधायकों के साथ बैठक।

अवध क्षेत्र: प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में संगठनात्मक बैठकें और स्थानीय स्तर पर फीडबैक।

काशी क्षेत्र: प्रयागराज में पदाधिकारियों संग समीक्षा कर चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देना।

विनोद तावड़े के इस विस्तृत दौरे से जहां पार्टी नेताओं में गुटबाजी और मतभेदों को सुलझाने में मदद मिलेगी, वहीं आगामी टिकट वितरण और चुनाव अभियान का प्राथमिक डेटा भी तैयार होगा।

मिशन 2027: मतभेद और गुटबाजी को जड़ से खत्म करने का कड़ा संदेश

हालिया संगठनात्मक फेरबदल के बाद भाजपा और संघ दोनों ही यह भली-भांति समझ चुके हैं कि उत्तर प्रदेश की सत्ता में बने रहने के लिए केवल शीर्ष नेताओं की रैलियां काफी नहीं हैं, बल्कि संघ के स्वयंसेवकों की सक्रियता और बूथ कार्यकर्ताओं का समर्पण सबसे जरूरी है।

यही वजह है कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने सख्त संदेश दिया है कि सांसद, विधायक और पार्टी पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक समय बिताएं, जनसंपर्क बढ़ाएं और आपसी खींचतान को पूरी तरह किनारे रखें। लखनऊ से सहारनपुर और गोरखपुर तक शुरू हुआ यह महामंथन इस बात का साफ संकेत है कि भाजपा ने यूपी चुनाव के लिए अपनी पूरी ताकत मैदान में उतार दी है।