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July 18 2026 03:55 pm

Pitru Paksha 2025 : पिंडदान के लिए भारत के सबसे पवित्र स्थान

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India News Live,Digital Desk : पितृ पक्ष हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक काल है, जो हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इस दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद के लिए श्राद्ध और पिंडदान का आयोजन किया जाता है। इस साल पितृ पक्ष 8 सितंबर 2025 से शुरू होकर 21 सितंबर 2025 को समाप्त होगा।

पितृ पक्ष को हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का समय माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस अवधि में किए गए तर्पण और पिंडदान से न केवल पितरों को मोक्ष मिलता है, बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि भी बनी रहती है। भारत में कई पवित्र स्थान हैं, जहाँ पिंडदान करने से अपार पुण्य और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

पवित्र पिंडदान स्थलों की सूची:

गया (बिहार)

वाराणसी / काशी (गंगा घाट)

प्रयागराज (त्रिवेणी संगम)

हरिद्वार

उज्जैन (शिप्रा नदी)

अयोध्या (सरयू नदी, भरत कुंड)

बद्रीनाथ (ब्रह्मकपाल घाट)

द्वारका (गोमती घाट)

जगन्नाथ पुरी (ओडिशा)

कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

मथुरा (बोधिनी, विश्रांति, वायु तीर्थ)

पुष्कर (राजस्थान)

सिद्धपुर (कपिलमुनि आश्रम, बिंदु सरोवर)

अवंतिका

हरिद्वार में पिंडदान

हरिद्वार गंगा नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख तीर्थस्थल है। मान्यता है कि यहाँ नारायणी शिला पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहाँ पिंडदान के बाद परिवार को सुख और शांति का आशीर्वाद मिलता है।

मथुरा में पिंडदान

यमुना तट पर बसे मथुरा के पवित्र तीर्थों - बोधिनी, विश्रांति और वायु तीर्थ - पर पिंडदान विशेष महत्व रखता है। मंत्रोच्चार के साथ अर्पित किए गए पिंड मृत आत्मा को शांति प्रदान करते हैं।

उज्जैन में पिंडदान

मध्यप्रदेश का उज्जैन पिंडदान के लिए एक पवित्र स्थान माना जाता है। शिप्रा नदी के तट पर तर्पण और पिंडदान करने से आत्मा को मुक्ति का मार्ग मिलता है।

प्रयागराज में पिंडदान

गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम स्थल प्रयागराज को श्राद्ध और पिंडदान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ स्नान और पिंडदान से पाप नष्ट होते हैं और आत्मा मोक्ष पाती है।

अयोध्या में पिंडदान

राम जन्मभूमि अयोध्या में सरयू नदी के किनारे स्थित भरत कुंड पर पिंडदान करने की परंपरा है। यहाँ अनुष्ठान के बाद गरीबों को दान देने का विशेष महत्व है।

वाराणसी में पिंडदान

काशी विश्वनाथ मंदिर की नगरी वाराणसी गंगा घाटों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पिंडदान को सबसे प्रभावी माना जाता है।

गया में पिंडदान

गया, बिहार का प्रमुख तीर्थ स्थल, पिंडदान का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। यहाँ फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है।

जगन्नाथ पुरी और द्वारका

पुरी और द्वारका, चार धामों में शामिल, पिंडदान और तर्पण के लिए विशेष महत्व रखते हैं। यहाँ किए गए अनुष्ठान से आत्मा को शांति मिलती है।

सिद्धपुर और अन्य स्थान

सिद्धपुर का बिंदु सरोवर और कपिलमुनि आश्रम पिंडदान के लिए प्रसिद्ध हैं। कहा जाता है कि यहाँ स्नान करने से पाप नष्ट हो जाते हैं।

पिंडदान का महत्व

पिंडदान का उद्देश्य मृतक आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाना है। गेहूँ, चावल, तिल, दूध और शहद से बने पिंड मंत्रोच्चार के साथ अर्पित किए जाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में गिनी जाती है।